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करोड़ों में खेल रहे एग्रीकल्चर की पढ़ाई कराने वाले प्राइवेट यूनिवर्सिटी, छात्र भविष्य को लेकर चिंतित

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Ranchi : राज्य के निजी विश्वविद्यालयों से एग्रीकल्चर में स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्रों की परेशानी बढ़ गयी है. ये छात्र न तो स्नातकोत्तर की पढ़ाई सरकारी विवि से कर सकते हैं और न ही किसी तरह के रिसर्च प्रोग्राम में हिस्सा ही ले सकते हैं. इसी को लेकर अध्ययनरत छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. लेकिन उनके करियर को लेकर इस परेशानी का जवाब यहां के निजी विश्वविद्यालयों को नहीं है.

निजी विश्वविद्यालयों का जोर बस तय सीट पर नामांकन लेने तक ही होता है. राज्य में एग्रीकल्चर की पढ़ाई कराने वाले पांच प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में 60 से 120 विद्यार्थियों का नामांकन लिया जाता है. इनकी फीस 17 हजार प्रति सेमेस्टर से लेकर 50 हजार प्रति सेमेस्टर तक है. इसमें नामांकन शुल्क अलग से होता है.

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झारखंड राय यूनिवर्सिटी की फीस सर्वाधिक

एग्रीकल्चर में स्नातक कोर्स कराने वाले सभी निजी विश्वविद्यालयों में झारखंड राय यूनिवर्सिटी की फीस सबसे ज्यादा है. यहां चार वर्षीय कोर्स में प्रति सेमेस्टर कोर्स फीस 50 हजार रुपये है. इसी तरह आइसेट यूनिवर्सिटी की प्रति सेमेस्टर कोर्स फीस 17 हजार रुपये है.

जबकि साईंनाथ यूनिवर्सिटी की कोर्स फीस 21 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर है. वहीं राधा गोविंद यूनिवर्सिटी की कोर्स फीस 20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर है. एक छात्र से औसतन 25 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर कोर्स फीस ली जाती है. एक शैक्षणिक सत्र के प्रथम वर्ष में

लगभग 70 छात्रों का नामांकन लिया गया है. कोर्स फीस में सेमेस्टर फीस के अलावा नामांकन शुल्क अलग से देना होता है. शैक्षणिक सत्र 2019 के पहले वर्ष में निजी विश्वविद्यालयों ने 70 लाख रुपये छात्रों से वसूल लिए हैं. इस तरह से देखें तो चार वर्षीय कोर्स पूरा होते-होते एक निजी विश्वविद्यालय एक बैच से 2 करोड़ 80 लाख रुपये की कमाई कर लेंगे.

संस्थानों के पास नहीं है सटीक जानकारी

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झारखंड राय यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि ने बताया कि संस्थान को ऐसी बाध्यता नहीं होती है कि उन्हें आइसीएआर की मान्यता लेनी ही हो. आइसीएआर एग्रीकल्चर की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों से आइसीएआर के सिलेबस और क्वालिटी एजुकेशन देने की बात करता है.

इसी तरह आइसेक्ट व राधा गोविंद यूनिवर्सिटी से इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने भी सटीक जानकारी नहीं दी. वहीं जब इसपर साईंनाथ यूनिवर्सिटी से जानकारी लेने की कोशिश की गयी, तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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नामांकन के वक्त नहीं दी थी जानकारी

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, साईंनाथ यूनिवर्सिटी , आइसेक्ट यूनिवर्सिटी आदि के पूर्ववर्ती छात्र व वर्तमान शैक्षणिक सत्र में नामांकन ले चुके 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने संस्थान पर आरोप लगाया. इन छात्रों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब हम नामांकन ले रहे थे तो विवि प्रशासन से कोर्स की मान्यता के बारे में पूछा गया था.

उस दौरान विवि प्रशासन ने बताया था कि संस्थान को मान्यता मिली हुई है. लेकिन कोर्स को मान्यता मिली है या नहीं इसकी जानकारी नहीं दी. छात्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन हमारे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो हम आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी करेंगे.

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