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प्राइवेट स्कूलों ने की गलती, लेकिन खामियाजा भुगतेंगी छात्राएं

Rahul Guru
Ranchi: झारखंड हाइकोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीएसई बोर्ड ने स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोत्तरी को लेकर सख्ती दिखलानी शुरू की है. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद भी स्कूलों ने फीस में मनमानी बढ़ोत्तरी की है जिसका खामियाजा छात्राओं को भूगतना होगा.

दरअसल, सीबीएसई ने सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के आवेदन और रिन्यूअल के लिए आवेदन शुरू किया है. सीबीएसई की ओर से जो नोटिस जारी किया गया है, उसमें कुछ नयी बातें जोड़ी गयी है.

बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि जिन स्कूलों ने 10 फीसदी से अधिक फीस नहीं बढ़ाई होगी, केवल उन्हीं स्कूलों की छात्राओं को सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप दिया जायेगा.

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स्कूलों को भेजा गया है नोटिस

अहम बात यह है कि स्कूलों ने कितना फीस बढ़ाया है, इसकी जानकारी सीबीएसई बोर्ड को देनी थी. शहर के तमाम स्कूलों ने ऐसा नहीं किया है. अधिकांश स्कूलों ने फीस में 10 फीसदी से अधिक बढ़ोत्तरी की है.

सीबीएसइ ने स्कूलों को कहा है कि उन्हीं स्कूलों की छात्राओं के आवेदन स्वीकार किये जायेंगे, जिनके स्कूलों की ट्यूशन फीस 10 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ी होगी.

साथ ही स्कूलों की ट्यूशन फीस एक हजार पांच सौ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस बाबत बोर्ड ने जानकारी तमाम स्कूलों को भेज दी है.

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18 अक्टूबर तक करना है आवेदन

सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप के लिए आवेदन 18 अक्टूबर तक करना है. जिन छात्राओं को 2018 से छात्रवृत्ति मिल रही हैं, वे पहले रिन्यूअल के लिए 15 नवंबर, 2019 तक आवेदन करेंगी.

छात्राएं इस बार सीधे बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकती हैं. छात्राओं को इस बार भी शपथपत्र देना होगा. आवेदन के साथ छात्राओं को 10वीं का मार्क्स शीट और प्रमाणपत्र देना होगा.

चयनीत छात्राओं को 11वीं व 12वीं की पढ़ाई के लिए हर माह पांच सौ रुपये दिये जाते हैं. पैसे सीधे छात्रा के बैंक खाते में जाते हैं. 2019 में 10वीं पास कर चुकी छात्राएं आवेदन कर सकती हैं.

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राज्य में क्या है फीस बढ़ोत्तरी के नियम

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2018 में निजी स्कूलों को 10 फीसदी तक फीस बढ़ाने का अधिकार है. यह फैसला स्कूल स्तर पर गठित कमेटी करेगी जो दो साल के लिए लागू होगी.

कोई स्कूल अधिक फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे डीसी की अध्यक्षता वाली कमेटी से अनुमति लेनी होगी. अगर स्कूल कमेटी के फैसले से अभिभावक असहमत हैं तो वह जिला कमेटी में अपील करेगा.

जिला कमेटी से असहमति पर प्रमंडलीय आयुक्त के यहां अपील करना होगा. यहां से भी असहमत होने पर न्यायाधिकरण में अपील करनी होगी. अपील पर जिला कमेटी को 60 दिन और न्यायाधिकरण को 30 दिन में फैसला देना होगा.

जुर्माना है प्रावधान

इस अधिनियम के खिलाफ फीस वृद्धि करने पर 50 हजार रुपये से ढाई लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है. दूसरी बार नियम का उल्लंघन करने पर यह न्यूनतम एक लाख रुपये होगी. सरकार उस स्कूल की मान्यता भी रद्द कर सकती है.

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