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निजी विद्यालय करते हैं RTE का उल्लंघन, केंद्र ने राज्यों से मांगा बीपीएल श्रेणी के तहत खाली सीटों का आंकड़ा

आंकड़ा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट पर मांगा गया.

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Ranchi : निजी विद्यालयों में बीपीएल(गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी के तहत रिक्त सीटों का आंकड़ा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र की मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखा है. पत्र के माध्यम से केंद्र ने राज्यों को निजी विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत नामांकन संबंधी जानकारी देने को कहा है. ज्ञात हो कि आरटीई कानून के तहत निजी विद्यालयों को बीपीएल श्रेणी के बच्चों का नामांकन लेना है. केंद्र को बाल अधिकार संरक्षण आयोग(सीपीसीआर) ने एक रिपोर्ट भेजी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में निजी विद्यालय आरटीई कानून की अनदेखी कर बीपीएल बच्चों का नामांकन नहीं लेते हैं. रिपोर्ट के अध्ययन के बाद एचआरडी ने राज्यों से नामांकन संबंधी आंकड़ा मांगा है.

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क्या है एनसीपीसीआर की रिपोर्ट

एनसीपीसीआर की रिपोर्ट में देश की राजधानी दिल्ली में शैक्षणिक सत्र् 2018-19 में निजी विद्यालयों में आरक्षित लगभग 13 हजार नर्सरी सीटें रिक्त हैं. आरक्षित सीटें आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के बच्चों के लिए होती है. वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो यूपी, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र आदि राज्यों में इसकी स्थिति और भी चिंताजनक है. निजी विद्यालयों द्वारा आरटीई कानून का घोर उलघ्घन किया जा रहा है. इस रिपोर्ट के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेवर ने राज्यों को रिक्त ईडब्ल्यूएस सीटों के बारे में आंकड़ा उपलब्ध करने को पत्र लिखा. ताकि इसकी वस्तु: स्थिति का आकलन केंद्र सरकार कर सके. निजी विद्यालयों में बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्यों को आंकड़ा मांगा जा रहा है.

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नर्सरी और केजी का आंकड़ा नहीं देते निजी विद्यालय

सीपीसीआर के अनुसार ज्यादात्तर प्राइवेट(निजी) विद्यालय शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत आर्थिक रूप से वंचित बच्चों को प्रवेश नहीं देते हैं. केजी एवं नर्सरी के नामांकन के दौरान 25 फीसदी बच्चे इसके अधिकारों से वंचित रह जाते हैं. आयोग के अनुसार पूरे देश के निजी विद्यालयों ने पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में आरटीई कानून के तहत आरक्षण नियमों का घोर उल्लंघन किया गया है.

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