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कोरोना संकट में प्राइवेट अस्पतालों ने कमाये 7000 करोड़, कांग्रेस ने मांगा आय-व्यय का ब्योरा

Ranchi : कोरोना संकट के दौर में पिछले 17 माह में झारखंड के निजी अस्पतालों ने 7000 करोड़ रुपये कमाये हैं. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी राहत निगरानी समिति के सौजन्य से कोरोना काल में प्राइवेट अस्पतालों के रवैये को लेकर रांची प्रेस क्लब में बुधवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. अस्पतालों द्वारा आपदा में अवसर के विषय पर सभी ने गंभीर चिंता जतायी.

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कांग्रेसी नेता आलोक कुमार दुबे ने कहा कि निजी अस्पतालों ने सरकार के आदशों की अवहेलना की.

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मरीजों को घर, जमीन, जायदाद, गहना बेचने को मजबूर किया. सात हजार करोड़ रुपये कमाये. इसका हिसाब निजी अस्पतालों को देना होगा. आय-व्यय का ब्योरा अगर उन्होंने नहीं दिया गया तो इसके परिणाम गंभीर होंगे. गोष्ठी में पारित किये गये प्रस्तावों से सरकार को अवगत कराने पर सहमति बनी.

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इसमें सरकार से 17 महीने की अवधि में अस्पतालों द्वारा किये गये आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की गयी है. कांग्रेस के ही लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि निजी अस्पतालों ने अगर जानकारी नहीं दी तो छठ पूजा के बाद निजी अस्पतालों में जाकर उनके गलत कृत्यों का पर्दाफाश किया जायेगा.

नवंबर के अंतिम सप्ताह में मोराहाबादी मैदान में जनता दरबार लगाया जायेगा. गोष्ठी कार्यक्रम में प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह, रांची विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर व समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ प्रभात कुमार सिंह, रामगढ़ कॉलेज के प्रिंसिपल मिथिलेश कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे.

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हर घर में कहर

राजेश सिंह ने कहा कि कोरोना काल में प्राइवेट अस्पतालों के कहर से हर घर और हर परिवार ग्रसित रहा है. यह एक छोटा विषय नहीं है. सरकार तक वस्तुस्थिति की जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता है.

लोक कल्याणकारी सरकार हमसे टैक्स वसूलती है. हम सभी को सुविधाएं देने का वचन देती है. कोविड-19 में जिस तरह से निजी अस्पतालों का रवैया रहा वह काफी दुखद था. सरकार हमें मूल मुद्दों से भटका कर दूसरी चीजों में उलझाती है.

निजी अस्पताल सिर्फ लूट के लिए के लिए ही बने हुए हैं. सरकारी अस्पताल इस देश की लाइफ लाइन हैं जो इस महामारी में साबित हुआ है. समाज के अंदर कुरीतियों के खिलाफ सभी को खड़ा होना होगा.

अच्छे-अच्छे बुद्धिजीवि भी तथ्य पर बात नहीं करते हैं. बड़े पूंजीपति और अधिकारी अस्पताल खोलकर अपना व्यापार कर रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

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मापदंडों का पालन नहीं करते अस्पताल

डॉ प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के लिए भारतीय शासक दोषी हैं. प्राइवेट अस्पताल खोले जाने को मापदंड बने हुए हैं. उन मापदंडों का पालन किये बगैर सरकार उन्हें खोलने की अनुमति देती है जो सरासर गलत है.

झारखंड के प्राइवेट अस्पताल और देश के दूसरे हिस्सों के प्राइवेट अस्पतालों में आसमान जमीन का फर्क है. अपनी एक आपबीती का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे यहां बीमार पड़े और रांची के एक बड़े अस्पताल में इलाज कराने गये तो उन्हें देखने वाला कोई नहीं था. पर जब वे दिल्ली गये तो ऐसी समस्या नहीं दिखी.

झारखंड के निजी अस्पतालों के अत्याचार से पूरी जनता कराह रही है जिससे बाहर निकालने की जरूरत है. सरकार को चाहिए कि निजी अस्पतालों पर अंकुश लगाये.

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