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प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खाता खोलने में निजी बैंकों ने दिखायी उदासीनता, 1.59 करोड़ खातों में से खोले सिर्फ 1.60 लाख बैंक अकाउंट

Ranchi : झारखंड में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खाता खोले जाने में निजी बैंकों ने उदासीनता दिखायी है. प्रत्येक घर में एक बैंक खाता जरूर खुले. इसके लिए 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना लाया गया. पर प्राइवेट बैंक इसमें अपेक्षित सहयोग यहां नहीं दिखा सके हैं. लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भागवत कराद ने यह जानकारी दी है. रांची सांसद संजय सेठ ने केंद्र से यह जानना चाहा था कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत रांची सहित पूरे झारखंड में अब तक कितने खाते खुले ?

इस योजना को धरातल पर उतारने में निजी बैंकों की क्या भूमिका रही ? अब तक कितने स्ट्रीट वेंडर्स को उनके व्यवसाय के लिए लोन दिए गये ?

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इसके जवाब में राज्यमंत्री ने बताया कि जनधन खाता खोलने में विभिन्न बैंकों से जुड़े बिजनेस कॉरस्पॉडेंट की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रही. अब तक इस योजना के तहत झारखंड में 1.59 करोड़ खाते खोले गये. इनमें से रांची में 11.29 लाख खाते जन धन योजना से खुले.

सुखद बात यह रही कि इन खातों को खोलने में सरकारी बैंकों ने सबसे अधिक बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. 1.59 करोड़ खातों में सिर्फ 1.60 लाख खाते ही 14 निजी बैंकों के द्वारा खोले गये. शेष सभी खाता खोलने में सरकारी बैंकों और उनके बिजनेस कॉरस्पॉडेंस ने बहुत अच्छी भूमिका निभाई.

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2.80 लाख स्ट्रीट वेंडर को मिला लोन

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक कोरोना संक्रमण काल में सबसे अधिक समस्याएं स्ट्रीट वेंडर्स को झेलनी पड़ीं. उनका व्यवसाय बंद हो गया. पूंजी खत्म हो गई.

वे फिर से अपना व्यवसाय शुरू कर सकें, इसके लिए इन्हें 10000 रुपये का एक लोन दिया गया. आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत प्रधानमंत्री ने सभी स्ट्रीट वेंडर्स को यह सुविधा उपलब्ध कराई.

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इसके तहत प्रथम चरण में संबंधित वेंडर को 10000 रुपये का लोन दिया जाना है. साल भर के अंदर यदि इसे वापस कर देते हैं तो उसे दूसरे चरण में 20000 रुपये और तीसरे चरण में 50000 रुपये तक लोन देने का प्रावधान है.

इस प्रावधान के तहत अब तक 26.80 लाख स्ट्रीट वेंडर को 10000 रुपये का लोन दिया गया जबकि 33, 000 से अधिक को 20000 रुपये तक का लोन प्रदान किया गया.

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