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प्रधान सचिव ने बताया कैसे पारा शिक्षकों की नौकरी हो सकती है स्थायी

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Ranchi: झारखंड के पारा शिक्षकों की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है. बिहार एवं छत्तीगढ़ के तर्ज पर जिस बहाली प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं. उस पर सरकार ने पहले से ही बेहतर सुविधाएं प्रदान की है. यह बातें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने बुधवार को झारखंड शिक्षा परियोजना की समीक्षा बैठक के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी में पारा शिक्षकों 50 फीसदी का आरक्षण का प्रस्ताव झारखंड सरकार ने पहले से ही राज्य के पारा शिक्षकों को दिया है. बिहार में शिक्षकों की स्थायी बहाली प्रक्रिया सरकार की ओर से रोक दी गयी है और उनके मानदेय में वृद्धि की जा रही है, लेकिन झारखंड सरकार ने शिक्षक बहाली प्रक्रिया में पारा शिक्षकों 50 फीसदी का आरक्षण दिया है तथा लगभग दस हजार शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया इसी के तर्ज पर की जा चुकी है. इसमें पारा शिक्षकों को वेटेज दिया गया है. छत्तीसगढ़ राज्य से बेहतर योजना पारा शिक्षकों को झारखंड सरकार द्वारा दिया जा रहा है. सरकार उन्हें मानदेय से ज्यादा उनके स्थायीकरण पर बल दी जा रही है. इसके लिए पारा शिक्षकों को लिखित परीक्षा के माध्यम से गुजरना होगा, ताकि उनको स्थायी शिक्षक के रूप में बहाल किया जा सके.

दिशा विहीन है पारा शिक्षकों का आंदोलन- प्रधान सचिव

विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने कहा पारा शिक्षकों का आंदोलन सही दिशा में उनके हितों के अनुरूप नहीं चल रहा है इसके कारण विभाग उनके आंदोलन को गंभीरतापूर्वक नहीं ले रही है. पारा शिक्षकों के नेता पारा शिक्षकों के सही कल्याण नहीं करना चाहते हैं. इसलिए आंदोलन के दौरान सही मुद्दों को नहीं उठा रहे, ताकि सरकार उनके मुद्दों पर विचार कर सके. 10 हजार पारा शिक्षक स्कूलों में लौटे हैं. अन्य पारा शिक्षकों से अनुरोध होगा की वे भी अपनी मुद्दों के साथ कार्य पर वापस लौट आयें. उनके मानदेय में सरकार ने प्रधान सचिव स्तर विचार-विर्मश करने के वृद्धि कर दिया है. जहां तक स्थायीकरण का प्रश्न है परीक्षा के माध्यम से सरकार उनकी नौकरी स्थायी करने के पक्ष में है, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों बेहतर नौकरी प्रदान किया जा सके.

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