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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सराब’ वाली टिप्पणी पर असली शराब की याद आ गई

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Surendra Kishore

नामांकन पत्र के साथ उम्मीदवार इन दिनों शपथ पत्र के साथ

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अपने बारे में तीन महत्वपूर्ण सूचनाएं देते हैं–

1.-उनकी शैक्षणिक योग्यता कितनी है ?

2.-उनके खिलाफ कितने केस चल रहे हैं ?

3.-उनके पास कितनी संपत्ति है ? 

मेरी राय है कि उन्हें अब एक और सूचना भी देनी चाहिए- वे शराब पीते हैं या नहीं ?

जाहिर है कि शपथ पत्र के साथ कोई सूचना देंगे और वह गलत हो जाएगी तो सजा मिलेगी.

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लगे हाथ एक कथा गांधी युग की. उन दिनों कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय प्रयाग में था. महात्मा गांधी के बाद पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से दो नेताओं के यात्रा–विपत्र बारी-बारी से कांग्रेस कोषाध्यक्ष के समक्ष पेश किए गए.

दोनों शीर्ष नेता शराब भी पीते थे. उनमें से एक नेता ने अपने बिल में शराब पर खर्च का विवरण लिख दिया था. उनका बिल पास नहीं हुआ.

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वे कोषाध्यक्ष से बोले,‘मेरा बिल पास क्यों नहीं हुआ?’

कोषाध्यक्ष ने कहा कि ‘कांग्रेस में नशाबंदी है और तुमने शराब का खर्च बिल में शामिल कर दिया है. यह कैसे पास होगा?’

दूसरे शीर्ष नेता का नाम लेते हुए शिकायत के लहजे में पहले नेता ने कहा ‘वह भी शराब पीता है ! उसका बिल आप कैसे पास कर देते हैं ?’

जवाब मिला, ‘ वह बिल में शराब के बदले फल का रस वगैरह लिख देता है.’

पहले नेता ने कहा कि ‘ठीक है. मेरा शराब वाला आइटम काट दीजिए. पर, मैं झूठ नहीं लिखूंगा.’

क्या यह संयोग था कि सच बोलने वाले सत्ता से बाहर रहे और झूठ लिखने वाले नेता जी को आजादी के बाद सत्ता मिली?

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(सुरेंद्र किशोर के फेसबुक वॉल से : सुरेंद्र किशोर वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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