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प्राथमिक शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ठप करने की दी चेतावनी

दो दिवसीय आंदोलन पर है राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ

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Ranchi : अंतर जिला स्थानांतरण नियमावली में संशोधन, शिक्षकों को प्रोन्नति, अनुकंपा के अधार पर नियुक्ति एवं प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों को भरने की मांगों को लेकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले गुरुवार को हजारों की संख्या में प्राथमिक शिक्षकों ने बिरसा चौक पर प्रदर्शन किया. मुख्य सचिव के समक्ष धरना सह प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत दो दिवसीय आंदोलन पर राज्य के प्राथमिक शिक्षक आंदोलनरत्त हैं. प्रदर्शन के दौरान संघ के प्रदेश अध्यक्ष बिजेंद्र चौबे ने कहा कि वर्तमान सरकार में नौकरशाही हावी है, अधिकारियों के आचरण, व्यवहार तथा अफसरशाही प्रवृत्ति से शिक्षक समुदाय पूरी तरह से त्रस्त हो गया है. शिक्षकों की लंबित मांगों का निषपादन करने की बजाय शिक्षकों को अधिकारी प्रताड़ित कर रहे हैं. प्रदेश महासचिव मूर्ति ठाकुर ने कहा कि विभागीय नीति ने शिक्षकों को न केवल परेशानी में डाला है, बल्कि उनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है, अफसरशाही प्रवृत्ति से शिक्षक समाज आंदोलन को विवश हो गया है. समय रहते शिक्षकों की मांगों पर सरकार विचार नहीं करती है, तो पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था ठप कर दी जायेगी.

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सरकार ने मांग पूरी नहीं की, तो उग्र होगा आंदोलन

प्राथमिक शिक्षकों के आंदोलन के दौरान हजारों की संख्या में शिक्षकों ने बिरसा चौक के समक्ष प्रदर्शन किया एवं सरकार एवं विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाये. प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिक्षक संघ मुख्य के प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि अधिकारी नौनिहालों के भविष्य को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. वहीं, शिक्षकों को शिक्षा के कार्य से दूर कर गैरशैक्षणिक कार्य में लगाया जा रहा है. सरकार समय रहते शिक्षकों की वाजिब मांगों को पूरा नहीं करती है, तो शिक्षकों का आंदोलन उग्र होगा. प्रदर्शन में अनूप केशरी, उत्तील यादव, सुनील कुमार, धीरज कुमार, सुनील भगत, संतोष कुमार, दीपक दत्ता, हरेकृष्ण चौधरी, देवी प्रसाद, रमेश प्रसाद, जयंत तिवारी, अजय कुमार, अनिल खलखो, प्रभात कुमार, अवधेश कुमार, गोपाल राम, अनिल सिंह, दीपक दत्ता, हरेकृष्ण चौधरी, देवी प्रसाद, मुखर्जी, रमेश प्रसाद आदि शिक्षकों ने प्रदर्शन के दौरान विचार एवं मांगों के समर्थन में शिक्षकों को संबोधित किया.

ये हैं प्राथमिक शिक्षकों की प्रमुख मांगें

  1. अंतर्विभागीय समिति द्वारा लिये गये निर्णय के बावजूद राजकीयकृत प्रारंभिक प्रोन्नति नियमावली 1993 में संशोधन हो.
  2. प्राथमिक शिक्षक का स्थानांतरण एवं अंतर जिला स्थानांतरण नियमावली में संशोधन हो.
  3. अनुकंपा के आधार पर एवं 1983-86 में नियुक्त शिक्षकों का नियुक्ति तिथि से वरीयता निर्धारण एवं स्नातक कॉमर्स योग्यताधारी शिक्षकों तथा देवघर विद्यापीठ से प्राप्त डिग्री की अवरुद्ध प्रोन्नति का मामला निष्पादित हो.
  4. उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में पद सृजन हो.
  5. स्नातक प्रशिक्षित ग्रेड 4 एवं प्रधानाध्यापक ग्रेड सेवन के पद पर लंबित प्रोन्नति तथा परिकल्पित रूप से भूतलच्छी प्रभाव से प्रोन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जाये.
  6. ग्रेड 4 एवं ग्रेड 7 में प्रोन्नति के उपरांत वित्तीय लाभ रोकने संबंधी आदेश को निरस्त किया जाना तथा मैट्रिक इंटर योग्यताधारी अप्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड वन का वेतनमान स्वीकृत किया जाये.
  7. मध्य विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के रिक्त पड़े 95% पदों को तत्काल भरा जाये.
  8. विद्यालय विलय के फलस्वरूप विभागीय दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर किये गये स्थानांतरण-पदस्थापन की समीक्षा कर आवश्यक सुधार हो.
  9. योजना इकाई के शिक्षकों के अनियमित वेतन भुगतान की समस्या को देखते हुए इसे गैर योजना इकाई में परिवर्तित किया जाये.
  10. शिक्षिकाओं के विशेष अवकाश में परिवर्तन की विभागीय घोषणा पर आपत्ति की गयी है.
  11. राज्य के सभी जिला में कार्यरत राज्यकर्मी शिक्षकों के लिए परिवहन भत्ता की स्वीकृति मिले.
  12. नयी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल हो.
  13. बायोमीट्रिक उपस्थिति HRMS आदि के नाम पर अकारण वेतन भुगतान पर अवांछित रोक तथा प्रशिक्षण के नाम पर शिक्षकों को अपमानित किये जाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगे.

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