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पत्रकार सुरक्षा कानून का तैयार हुआ मसविदा, कांग्रेस ने घोषणा पत्र में कानून बनाने की बात कही थी

छत्तीसगढ़ सरकार ला सकती है पत्रकार सुरक्षा कानून

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Ranchi/Raipur: छत्तीसगढ़ में पिछले एक दशक से भी अधिक समय से सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक उथल-पुथल के बीच विकास के दावे सरकार की ओर से किये जाते रहे हैं. जबकि विकास सिर्फ राज्य के बड़े शहरो तक ही सिमटा हुआ दिखाई देता है. वहीं राज्य में जनसरोकर को लेकर विकास के दावों को समाने लाने वाले कई पत्रकारो की जान भी गयी है. जेल जाना पड़ा और कारपोरेट के दबाव में पत्रकारो को नैकारी भी गवानी पड़ी. ऐसी हालत में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर छत्तीसगढ़ में मानवाधिकार और पत्रकार संगठनों द्वारा देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कानून के मसविदो को अंतिम रूप देने का काम रायपूर में किया गया. पत्रकार सुरक्षा कानून’ को अन्तिम रूप देने के लिए देशभर से सैकड़ों की संख्या में पत्रकार, सम्पादक, मीडिया मालिकों, वकील, मानवाधिकार कार्यकता 17 फरवरी, रविवार को को गास मेमोरियल सेंटर, रायपुर में जुटे. कार्यक्रम में पत्रकारों के मानवाधिकार तथा उनके आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक सुरक्षा के लिए बनाये जा रहे इस महत्वपूर्ण कानून को अंतिम रूप दिया गया.

क्यों जरूरी है  ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ 

नेता-माफिया-पुलिस का गंठजोड़ छोटे शहरों, कस्बों और सुदूर इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए विशेष रूप से खतरनाक स्थिति है.  इसलिए पत्रकारों के लिए विशेष कानून की जरूरत वर्तमान समय में महसूस हो रही है.

क्या हुआ सम्मेलन में

पत्रकारों की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी का हनन हुआ है. बस्तर से लेकर राजधानी तक पत्रकार प्रताड़ित हो रहे हैं. इन गंभीर हालातों को ध्यान में रखते हुए 17 फरवरी को गास मेमोरियल सेंटर, रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में कई विषयों पर चर्चा हुई. कानून के लिए बहस तथा सुझावों को अंतिम रूप देते हुए अन्य आयोग से अलग-थलग एक स्वशासी आयोग के रूप में पीड़ित तथा जनसरोकार पत्रकारों,  मानवाधिकार संगठनों, शिक्षाविद, कानून के जानकार शख्सियतों की भागीदारी से जनाधिकार शक्तियों को संक्रेद्रित करते हुए बड़े कार्पोरेट हाऊसेस, गिल्ड और काउंसिल, शासन-प्रशासन के दबाव से मुक्त आयोग के माध्यम से कानून तैयार करने की कोशिश की गयी. बताया गया कि पीड़ित मानवता के लिए संघर्षरत मीडिया कर्मियों के लिए इस महत्वपूर्ण कानून को बनाने की जरूरत है.

क्या चीजें होंगी ‘पत्रकार सुरक्षा कानून ‘ के मसौदे में

संविधान के अनुच्छेद 19 में वाक् स्वतंत्रय आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण, अनुच्छेद 20 में अपराधों की दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण, अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण, अनुच्छेद 25 में अंत:करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता, सीआरपीसी की धाराओं के बावजूद लंबे समय से पत्रकारों को, जिस तरह लोकतंत्र में चौथा स्तंभ समझा नहीं जाता, उसी तरह उनकी दैहिक, अभिव्यक्ति, राजनैतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा का सवाल एक मुकम्मल कानून का रूप लेगा. मसविदा समिति की सदस्य और अधिवक्ता शालिनी गेरा ने सम्मेलन में कानून पर विस्तार से उसके तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया.

क्या है कानून के मसौदे में

‘छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा’ के ड्राफ्ट की अवधारणा सबसे पहले 2016 में पेश की गयी थी. इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना का प्रसारण, संपादन, टिप्पणी करना, समीक्षा करना, ऐसे जिनका पत्रकारिता प्राथमिक अथवा मुख्य पेशा है, चाहे वह किसी भी संस्था या यूनियन से पंजीकृत हो या न हो उसकी सुरक्षा. अगर उस व्यक्ति पर या उसके परिवार की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक सुरक्षा व अधिकारों का किसी भी तरीके से उल्लंघन होने पर ‘छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा’ कानून के तहत कार्रवाई हो. इस कानून के अंतर्गत पत्रकारों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एक स्वायत राज्य आयोग का गठन करे, जिसका एक कानूनी इकाई के रूप में अस्तित्व होगा. अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अर्ध-न्यायिक अधिकार होंगे. इस कानून के तहत पत्रकारों को सुरक्षा के रूप में आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक सुरक्षा के साथ उनके संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा तथा दैहिक सुरक्षा सुनिश्चित हो.

प्रशासन की कठपुतली बनकर न रह जायें पत्रकार

सम्मेलन में यह भी तय किया गया है कि यह आयोग अन्य आयोग की तरह शासन-प्रशासन के हाथ का कठपुतली कानून बनकर न रह जाये. इस दृष्टि से इस कानून को बनाने में विशेष ध्यान रखा जाएगा. पत्रकारों को मुआवजा राशि के लिए सुझाये गये फंड तथा भविष्य निधि के लिए तकनीकी जानकारियों का अध्ययन किया जायेगा. कानून के बनने के साथ पत्रकारों को सचेत किया गया है कि वे खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों के साथ बहुत एहतियात बरतें. कानून में अपनी तथा अन्य लोगों की सुरक्षा और उनके मानवाधिकार व अन्य अधिकारों का ध्यान भी रखेंगे. इस पूरे सम्मेलन में पत्रकार को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरतने और/या सूचना के प्रसारण को अपना प्राथमिक, अहम या मुख्य काम बनाया हो, या फिर ऐसा व्यक्ति जिसका काम सूचना एकत्रित करना, जमा करना, पैदा करना, प्रसंस्कृत करना, संपादित करना, टिप्पणी करना, उसकी समीक्षा करना, प्रसारित करना, प्रकाशित करना या सूचना को किसी माध्यम से प्रदान करना या ऐसा कोई भी संचार करना हो जिसे छापा जा सके, डिजिटल या तस्वीर के रूप में प्रसारित किया जा सके,या फिर ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसके पास पत्रकारिता करने की योग्यता या तर्जुबा हो.

कब से शुरू हुई कानून बनाने की प्रक्रिया 

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीस (पीयूसीएल) छत्तीसगढ़ और पत्रकार सुरक्षा कानून (पसका) संयुक्त संघर्ष समिति की संयुक्त पहल पर पिछले तीन वर्षों से पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का विशेष कानून पर एक मसविदा तैयार किया गया. कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इस मुद्दे को शामिल भी किया था. फिलहाल कांग्रेस पार्टी बहुमत से सत्ता में है. मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण के तत्काल बाद ही भूपेश बघेल ने मीडियाकर्मियों को आश्वत किया है कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सम्बन्धी कानून बनाया जायेगा. इसके चलते प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का यह विशेष कानून जल्द अमल में लाने की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ सहित पूरे देशभर में तेज हो गयी है.

कानून बनने की उम्मीद कैसे बलबत हुई 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इस मुद्दे को शामिल भी किया था. फिलहाल कांग्रेस पार्टी बहुमत से सत्ता में आ गयी है. मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण के तत्काल बाद ही भूपेश बघेल ने मीडियाकर्मियों को आश्वत किया है कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सम्बन्धी कानून बनाया जायेगा. इसके चलते प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का यह विशेष कानून छत्तीसगढ़ में अमल होने के बाद पूरे देशभर पहल की जायेगी.

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