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विपरीत हालात में भी युवा कर रहे जेपीएससी की तैयारी

Chhaya

Ranchi: राज्य की गिरती शिक्षा व्यवस्था के बावजूद युवाओं के हौसले में कमी नहीं है. सच्ची लगन और हिम्मत के साथ राज्य के युवा इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. विगत कई सालों में जिस तरह से झारखंड लोकसेवा आयोग ने अपनी छवि धूमिल की है, ऐसे में युवाओं को निराशा हाथ लगी, तो कुछ ने शायद इसके बाद जेपीएससी परीक्षा देने का इरादा ही बदल दिया। लेकिन इन सबसे परे राज्य में कई ऐसे युवा हैं जो विभिन्न परिस्थितियों से जूझते हुए भी राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में ध्यान लगा रहे हैं.

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पढ़ाई के साथ कर रहे हैं नौकरी

खूंटी निवासी 30 वर्षीय गुलशन मुंडू पिछले छह साल से सरकारी नौकरी में है. खूंटी जिला में जल संसाधन जल पथ प्रमंडल में जूनियर इंजीनियर हैं. इसके साथ ही छठी जेपीएससी पीटी पास कर चुके हैं. गुलशन जब पांचवीं कक्षा में थे तब ही इनके पिता का देहांत हो गया. ऐसे समय में इनकी माता ने इन्हें सरकारी स्कूल में पढ़ाते हुए पढ़ाया. गुलशन बताते हैं कि पिता के देहांत के बाद आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी. स्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने स्टूडेंट लोन ले कर बीआइटी मेसरा से सिविल इंजीनियरिंग की.

सिविल इंजीनियरिंग के बाद कई दिनों तक उन्होंने स्व अध्ययन किया और 2010 में दिल्ली जाकर कोचिंग करने की सोची, दिल्ली में चार पांच माह रहने के बाद आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण ये वापस आ गये. इस दौरान उन्होंने कई प्रतियोगिता परीक्षाएं दीं. वर्ष 2012 उन्होंने जूनियर इंजीनियरिंग की प्रतियिगता परीक्षा पास की और इनकी नौकरी हो गयी. उन्होंने कहा कि बीआइटी में पढ़ते हुए उन्हेांने काफी कुछ झेला, अंग्रेजी कमजोर होने की भी समस्या थी. ऐसे में उन्होंने धैर्य के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया. उन्होंने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी, ऐसे में कई बार घर से निजी कंपनियों में नौकरी करने की बात कही गयी, लेकिन फिर भी ये अपने निर्णय पर अडिग रहे.

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अनिश्चितता में भी नहीं छोड़ा धैर्य

सिमडेगा निवासी सोनू सिंह के जीवन की कहानी भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है. किसान परिवार से नाता रखने वाले सोनू ने पहली बार में ही जेपीएससी पीटी पास कर ली और वर्तमान में ये मेंस की तैयारी कर रहे हैं. 2008 में इतिहास विषय में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद ये दिल्ली चले गये. घर की जमीन बेच कर दिल्ली में उन्होंने यूपीएससी के लिए कोचिंग ली, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वर्ष 2016 में ये वापस रांची आ गये. दिल्ली में रहते हुए उन्होंने दो बार यूपीएससी पीटी परीक्षा पास की लेकिन मेंस पास नहीं कर पाये.

माता पिता की सेहत भी अब इस लायक नहीं है कि उन्हें घर से कोई आर्थिक मदद मिले. ऐसे में उन्होंने रांची में किसी तरह ल़ॉज लिया और कोचिंगों में पढ़ाना शुरू किया. इसी क्रम में उन्होंने छठी जेपीएससी की परीक्षा पीटी पास की है. अपने बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि अपने राज्य में युवाओं को तरजीह दी जायेगी ये सोचकर दिल्ली से रांची आया, लेकिन राज्य में जेपीएससी की स्थिति काफी खराब है. अनिश्चितता भरे माहौल में भी उम्मीद है कि किसी न किसी तरह परीक्षा पास कर लेंगे और नौकरी हो जायेगी.

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खेती बारी से ऊपर उठ करना चाहते हैं कुछ नया

पलामू निवासी उज्व् ल कुमार दस सालों से जेपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. उनके पिता किसान हैं. पीजी के बाद से लगातार ये जेपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कई परीक्षाएं जैसे रेलवे, बैंकिंग, एसएससी की परीक्षा पास की, लेकिन प्रशासनिक क्षेत्र में रुचि होने के कारण उन्होंने जेपीएससी का ही लक्ष्य ततय किया है. उन्होंने कहा कि रांची से ही प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करते हुए कई बार ट्युशन लिया लेकिन पढ़ाई में बाधा आने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी. दो भाई और दो बहन में बड़े होने के कारण घर की जिम्मेवारी उनके ऊपर है. उन्होंने बताया कि किसान परिवार से होने के कारण पढ़ाई में काफी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है. विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए इस वर्ष छठी जेपीएससी पीटी पास की है।

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क्या है जेपीएससी का हाल

राज्य में जेपीएससी के हाल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां जेपीएससी के निर्णय कैबिनेट में लिये जाते हैं. कुछ हालिया आंकड़ों को देखें तो 18 दिसंबर 2016 को छठी जेपीएससी परीक्षा आयोजित की गयी. 24 फरवरी 2017 को रिजल्ट घोषित हुआ, 18 अप्रैल 2017 को कैबिनेट ने संशोधित रिजल्ट देने का फैसला लिया, जिसके बाद पुनः 11 अगस्त को रिजल्ट जारी किया गया. 7 नवंबर 2017 से होनेवाली मुख्य परीक्षा को ऐन वक्त पर स्थगित किया गया. जिसके बाद विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षियों ने हंगामा किया. आयोग ने छात्रों के सामने 29 जनवरी से परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया.

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