Ranchi

जोन के अनुसार शिक्षकों के ट्रांसफर की तैयारी, पर प्रोन्नति पर विभाग नहीं कर रहा बात

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Ranchi: राज्य के प्राथमिक, माध्यमिक और हाई स्कूल के शिक्षकों के ट्रांसफर की तैयारी चल रही है. इस बार शिक्षकों का ट्रांसफर जोन को प्राथमिकता देते हुए किया जाना है. हर जिला से शिक्षकों के नाम, योगदान की तिथि, वर्तमान में किस स्कूल में हैं, इससे पहले कब-कब कहां थे, किस जोन में हैं इसकी जानकारी ली जा रही है. इस ट्रांसफर की प्रक्रिया में शिक्षकों के हितों को गौण किया जा रहा है. वहीं जोन निर्धारण की प्रक्रिया में भी गड़बड़ी हो रही है.

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बीआरपी-सीआरपी कर रहे जोन निर्धारण

शिक्षक संघ का आरोप है कि स्कूलों के जोन का निर्धारण उपायुक्त के निर्देशन में स्कूली साक्षरता विभाग, पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा किया जाना है. जबकि विभिन्न जिलों में उसकी अनदेखी कर बीआरपी-सीआरपी आदि से जोन निर्धारण कराया जा रहा है.

जिसमें कई तरह की अनियमितताएं हो रही है. जिस प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन सूचना मांगी जा रही है, उसमें विभिन्न जिला के डीइओ कार्यालय से मिलीभगत के आधार पर स्थानांतरण की सूची तैयार की जा रही है.

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प्रोन्नति का मामला गौण

बता दें कि वर्ष 2015 में शिक्षकों को प्रोन्नति का संकल्प सरकार द्वारा जारी किया गया था. जिसमें अविलंब लंबित प्रोन्नतियों के मामले को निपटाने का आदेश दिया गया. लेकिन राज्य के 12 जिलों में अब तक यह काम पूरा नहीं किया गया है. शिक्षक संघ की मानें तो गत वर्ष 2019 में अनुकंपा एवं अन्य के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड वन में वरीयता निर्धारित कर प्रोन्नति देने का काम दुमका को छोड़कर किसी भी जिलों में पूरा नहीं किया गया.

शिक्षकों की प्रोन्नति को लंबित बनाये रखा गया. प्रोन्नति एवं ट्रांसफर के लिए एक ही जिला शिक्षा स्थापना समिति अधिकृत है, फिर प्रोन्नति के कार्य को हाशिए पर रखकर आनन- फानन में नियमों को दरकिनार कर सिर्फ स्थानांतरण की कार्यवाही की जा रही है.

ट्रांसफर प्रक्रिया में शिक्षकों के रोटेशन आधारित पदस्थापन का प्रावधान है. वहीं इस ट्रांसफर प्रक्रिया में गृह जिले से सुदूर जिलों में पदस्थापित शिक्षकों के लिए अंतर जिला स्थानांतरण के प्रावधान को ध्यान नहीं दिया गया है. जबकि पूर्व की स्थानांतरण नियमावली में इसका प्रावधान था. प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक वर्तमान स्थानांतरण नीति की समीक्षा कर इसमें शिक्षकों के अंतर जिला स्थानांतरण को नियमानुसार करना चाहिए.

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  1. जोन वाइज शिक्षकों की स्थानांतरण नीति अच्छी है, परन्तु इसकी पूरी प्रक्रिया आनलाईन एवं पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।बिचौलिया गिरी का कोई स्थान नहीं रहे।स्थानांतरण हेतु आवेदन जमा करना, प्रत्येक जोन मे अवस्थित विद्यालयों मे रिक्त पदों की विवरणी सहित सबकुछ संबंधित वेबसाइट पर उपलब्ध रहे तो न ही शिक्षकों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ेगा और न ही कोई आफिस बाबू इसमें मनमानी कर सकेंगे।

  2. जोन वाइज शिक्षकों की स्थानांतरण नीति अच्छी है, परन्तु इसकी पूरी प्रक्रिया आनलाईन एवं पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।बिचौलिया गिरी का कोई स्थान नहीं रहे।स्थानांतरण हेतु आवेदन जमा करना, प्रत्येक जोन मे अवस्थित विद्यालयों मे रिक्त पदों की विवरणी सहित सबकुछ संबंधित वेबसाइट पर उपलब्ध रहे तो न ही शिक्षकों को कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ेगा और न ही कोई आफिस बाबू इसमें मनमानी कर सकेंगे।

  3. झारखंड के शिक्षा विभाग के द्वारा 2015 के पूर्व कार्यरत शिक्षकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया गया है।नयी नियुक्ति नियमावली के तहत सीधे स्नातक प्रशिक्षित वेतनमान पर शिक्षकों की नियुक्ति के पूर्व बीस-पच्चीस वर्षों से इन्टर प्रशिक्षित वेतनमान पर कार्यरत उच्चतर योग्यताधारी शिक्षकों को प्रौन्नति देना था, परन्तु न तो आलाधिकारियों ने इसपर गंभीरता दिखाई और न ही विभागीय मंत्री के द्वारा अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों के क्रियाकलापों पर कभी संज्ञान लिया गया।विडम्बना यह है कि राज्य स्तरीय पदाधिकारी शिक्षकों की लंबित प्रौन्नति के निष्पादन हेतु वर्षों से कागजी घोड़े दौड़ाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं, जिले के पदाधिकारी भी उनके निर्देशों को तवज्जो नहीं देते हैं, कयोंकि वे जानते हैं कि उनपर कोई कार्रवाई होनी नहीं है।अभी भी लगभग बारह जिले के प्राथमिक शिक्षक प्रौन्नति की बाट जोहते-जोहते हर माह रिटायर होते जा रहे हैं।जहाँ तक प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता का सवाल है तो इसमें तथाकथित सुधार के नाम पर सरकारी विद्यालयों को एनजीओ का प्रयोगशाला बना दिया गया है, शिक्षकों को शिक्षण कार्य से अधिक परियोजना के डाटा कलेक्शन अभियान मे संलग्न रहना पड़ता है।

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