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आदिवासी जन परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष बने प्रेमशाही मुंडा

पूरे राज्य में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन करेगी एजेपी

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Ranchi : आदिवासी जन परिषद (एजेपी) का विशेष महाधिवेशन शुक्रवार को करमटोली स्थित सेलिब्रेशन हॉल में संपन्न हुआ. इसके माध्यम से परिषद ने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्रीय कार्यसमित सदस्यों की घोषणा की. आदिवासी जन परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में प्रेमशाही मुंडा का चुनाव किया गया. रतन लाल सिंह मुंडा को महासचिव, अभय भुटूकुंवर को वरीय उपाध्यक्ष, गोपाल वेदिया को सचिव, किस्वो कुजूर को संयुक्त सचिव, चतुर बड़ाईक को उपाध्यक्ष एवं रजीव रंजन मुंडा को संगठन सचिव के रूप में चुना गया. अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनजाति पार्टी के राष्ट्रीय सचिव शैलेश वालेकर ने शिरकत की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को उन मुद्दों की ओर नहीं ध्यान देना चाहिए, जिससे समाज का विकास संभव न हो. आदिवासी समाज को उन मुद्दों पर कार्य करना चाहिए, जिससे आदिवासियों का सामाजिक, शौक्षणिक एवं आर्थिक स्तर पर विकास हो.

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आदिवासियों को छलने का काम कर रही रघुवर सरकार : प्रेमशाही मुंडा

अदिवासी जन परिषद के नवनियुक्त केंद्रीय अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि झारखंड में आदिवासियों को वर्तमान रघुवर सरकार छलने का कार्य कर रही है. भूमि अधिग्रहण कानून 2017 आदिवासियों के लिए अभिशाप के समान है. इस कानून का राज्य स्तर पर एजेपी विरोध करेगी. साथ ही परिषद सरकार से मांग करती है कि आदिवासियों की धार्मिक पहचान के लिए धर्म कोड लागू करे, ताकि आदिवासी समाज की पहचान बनी रहे.

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अधिवेशन के दौरान उठीं ये मांगें

  • आदिवासियों की धार्मिक पहचान के लिए धर्म कोड लागू हो.
  • सरकार भूमि अधिग्रहण कानून 2017 अविलंब रद्द करे.
  • आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आदिवसी स्वशासी राज्य का गठन हो.
  • आदिवासियों के हित के लिए संविधान की छठी अनुसूची लागू की जाये.
  • निजी क्षेत्रों में आरक्षण नीति का पालन हो.
  • आदिवासियों की गैरकानूनी ढंग से हड़पी गयी जमीन उन्हें वापस दी जाये.

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ये रहे उपस्थित

आदिवासी जन परिषद् के अधिवेशन के दौरान एसी/एसटी/ओबीसी फोरम के सचिव शाहदेव राम, एजेपी के सोमा मुंडा, हरिलाल मुंडा, बिरसा मुंडा, विक्की लोहरा, पंकज उरांव, बंटी भुटूकुंवर, रश्मि देवी, जयंती मुंडा, दमयंती मुंडा, राधा मुंडा, जेतीता तिग्गा, पुष्पा टोप्पो, कविता कुमारी, लोलेन टोप्पो, भगीरथ मुंडा, शांति सवैया, गोपाल बेदिया, किष्टो कुजूर, जय सिंह लुखड, सिदाम मुंडा, लक्ष्मण सिंह मुंडा, महादेव मुंडा, श्याम मुंडा, सिकंदर मुंडा, रंजीत उरांव, श्रवण लोहरा, प्रीतम लोहरा व आदिवासी मूलवासी छात्र संघ के एस अली समेत बड़ी संख्या में अदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे.

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