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NEWSWING EXCLUSIVE : एसबीआई की क्लर्की, मेडिकल एडमिशन में जेल और साधु यादव कनेक्शन से लेकर झारखंड की सत्ता का केंद्र बनने तक, जानें प्रेम प्रकाश के जीवन के अनजाने पहलू

POLITIICAL EDITOR
Ranchi : सासाराम की बैंक कालोनी में रहनेवाला एक आम सा युवक जिसे पिता की जगह स्टेट बैंक में क्लर्क की नौकरी मिली थी, वह इतना ताकतवर कैसे हो गया कि झारखंड की सत्ता उसके इर्द-गिर्द नाचने लगी और वह सत्ता शीर्ष पर बैठे लोगों और भ्रष्ट नौकरशाहों को अपनी उंगली पर नचाने लगा. कैसे पैसा लेकर भी एक डॉक्टर की बेटी का मेडिकल में दाखिला नहीं करा पाने के कारण जेल की सैर करनेवाले उस युवक के दरवाजे पर ट्रांसफर–पोस्टिंग के लिए उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों की लाइन लगने लगी और बिहार के एक बड़े नेता के साले का पैसा लेकर भागनेवाला वह युवक झारखंड में सबसे बड़े मनी लांड्रिंग मामले का मास्टर माइंड बन गया.
वह युवक और कोई नहीं, बल्कि प्रेम प्रकाश सिन्हा है, जो फिलहाल इडी की हिरासत में है. प्रेम कितना ताकतवर है, यह बात मी़डिया के जरिये हर कोई जान चुका है, लेकिन सासाराम से पटना होते हुए रांची के सत्ता प्रतिष्ठान का केंद्र बिंदु बनने की उसकी यात्रा किन पड़ावों से होकर गुजरी है, यह न्यूजविंग आपको बता रहा है. न्यूजविंग आपको यह भी बता रहा है कि प्रेम प्रकाश किन पैंतरों से नेताओं और अफसरों को अपने वश में करता था. अपने आका अफसरों के घरों में महीने का राशन पहुंचाने से लेकर उनकी मैडमों को कोलकाता और दिल्ली में शॉपिंग कराने तक का काम करनेवाला यह शख्स पानी की तरह पैसा बहाता है. राजद, भाजपा और झामुमो सभी पार्टियों में इसके चाहनेवालों की लंबी फेहरिस्त है. सत्ता प्रतिष्ठान के शीर्ष लोगों से सीधे वह किस मोबाइल एप के जरिये बात करता है, यह भी हम आपको इसी रिपोर्ट में बतायेंगे. तो पेश है प्रेम प्रकाश सिन्हा के जीवन की कहानी –
बैंक की नौकरी और साधु यादव से संपर्क
सासाराम की बैंक कालोनी में रहनेवाला प्रेम प्रकाश सिन्हा एक आम सा युवक था. उसकी पढ़ाई लिखाई सासाराम और पटना में हुई. पिता भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी करते थे. 1997-98 के आसपास प्रेम प्रकाश के पिता का आकस्मिक निधन हो गया और प्रेम को उनकी जगह अनुकंपा पर एसबीआई की पटना राजभवन शाखा में नौकरी लग गयी. नौकरी के दौरान प्रेम प्रकाश का संपर्क हवाला कारोबारियों और सूद पर पैसा लगानेवालों से हुआ. बताया जाता है कि वह शनिवार को बैंक के खाते से रुपये निकाल कर उन्हें दे देता और सोमवार को पैसे वापस बैंक में जमा कर देता. प्रेम प्रकाश पटना में जहां रहता था, वहीं राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के साले साधु यादव के साढ़ू भी रहते थे. साढ़ू के जरिये प्रेम प्रकाश साधु यादव के संपर्क में आया. धीरे-धीरे साधु यादव का उसके घर आना-जाना शुरू हो गया. फिर साधु के भाई सुभाष से भी प्रेम प्रकाश की अच्छी बनने लगी और वह साधु यादव का पैसा भी कारोबारियों के यहां लगाने लगा.
पैसों का डूबना और प्रेम का पटना से पलायन
वर्ष 2002-03 के आसपास प्रेम प्रकाश की लगायी बड़ी रकम डूब गयी. उसमें साधु यादव का लाखों रुपया भी शामिल था. जब प्रेम प्रकाश पर पैसा लौटाने का दवाब बढ़ा तो वह पटना से भाग निकला. तब साधु यादव की खूब चलती थी. प्रेम की खोज शुरू हुई. झारखंड तक में उसे तलाश किया गया मगर प्रेम नहीं मिला. जब प्रेम नहीं मिला, तो साधु के कहने पर प्रेम प्रकाश, उसके भाई और यहां तक कि उसकी मां पर भी मुकदमा दर्ज कर दिया गया. पुलिस फौरन एक्शन में आयी और प्रेम प्रकाश के भाई को गुजरात से धर कर बिहार ले आयी. प्रेम प्रकाश के भाई को गया जिले के बेलागंज के तत्कालीन विधायक सह आबकारी मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव के घर रखा गया. वहां उसकी बेतरह पिटाई की जाने लगी. जब उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गुजरात से आयी पुलिस टीम को लगा कि वह पिटाई से मर जायेगा और उनकी नौकरी खतरे में पड़ जायेगी, तो उन्होंने वहां से भाग यह खबर मीडिया में लीक कर दी. खबर ने तूल पकड़ा, तो एसपी ने मंत्री के घर से प्रेम प्रकाश के भाई को बरामद किया. इस मामले ने इतना तूल पकड़ा था कि 2003 में आबकारी मंत्री सुरेंद्र यादव को इस्तीफा देना पड़ा था.
सत्ता से करीबी और पावर का खेल
इधर, सब कुछ गंवाकर प्रेम प्रकाश बहुत बुरी हालत में पहुंच गया था. कई साल ऐसे ही गुजरे. फिर प्रेम प्रकाश एक न्यूज चैनल की फ्रेंचाइजी लेकर रांची आया. बीच में उसने कई और काम भी किये. एक महिला आइएएस अधिकारी से उसका थोड़ा – बहुत पुराना संपर्क था. रघुवर सरकार में वह महिला अधिकारी बहुत ताकतवर हो गयीं. उन्होंने प्रेम प्रकाश को सत्ता शीर्ष पर बैठे लोगों तक पहुंचा दिया. हालत यह हो गयी कि वह ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से सीधे संपर्क में आ गया. कहा जाता है कि पिछली सरकार में एक वर्तमान सत्ताधारी नेता की फैक्टरी का कोई क्लीयरेंस टॉप लेवल से नहीं हो रहा था. प्रेम प्रकाश ने वह क्लीरेंस दिलाया और वर्तमान सत्ताधारी नेता के करीब आ गया. उसके बाद तो चुनाव होने तक उन नेताजी के महंगे शौक प्रेम प्रकाश ही पूरा करने लगा. सत्ता परिवर्तन के बाद यह करीबी इतनी बढ़ी कि दिन में कई-कई बार फेस लाइव एप पर दोनों की सीधी बातें होने लगीं. हनक इतनी बढ़ी कि वह डीसी-एससपी की मनचाही पोस्टिंग कराने लगा. भ्रष्ट नौकरशाह उसके एक इशारे पर सब कुछ करने को तैयार रहने लगे. प्रेम भी उनका खास खयाल रखता.
एडमिशन का खेल और प्रेम की जेल यात्रा
प्रेम प्रकाश ने सासाराम के एक डॉक्टर को उनकी बेटी का मेडिकल में दाखिला कराने का वादा करके मोटी रकम ली थी. दाखिला नहीं करा सका, तो डॉक्टर साहब ने केस कर दिया. प्रेम को जेल जाना पड़ा. काफी दिन जेल में रहने के बाद उसकी जमानत हुई.
गॉसिप तो ये भी है
चर्चा है कि प्रेम प्रकाश रांची के एक स्टोर से महीना 30 से 35 लाख का राशन उठाता है, जो उसके चहेते अधिकारियों और राजनेताओं के यहां जाता है. अपने खास अफसरों की पत्नियों को कोलकाता और दिल्ली में महंगी शॉपिंग कराना भी उसकी एक खासियत है. प्रेम प्रकाश बेहद शाहखर्च है. तमाम महंगे शौक उसने पाल रखे हैं. अपने कदरदानों की भी वह पूरी खातिर करता है. गर्मी में ट्रक में भरकर आम मंगाना और अफसरों-नेताओं के यहां बंटवाना प्रेम प्रकाश का शौक है. रांची में 12 करोड़ की एक जमीन का सौदा डेढ़ करोड़ में करा दिया गया था. प्रेम प्रकाश के खास व्यक्ति के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री वर्तमान उपायुक्त के कार्यकाल में ही हुई थी. जमीन के असली दावेदार पलामू के रहनेवाले हैं. चर्चा है कि प्रेम के इशारे पर उस व्यक्ति के खिलाफ 42 मामले दर्ज कर दिये गये हैं.

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