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मीडिया के सामने खुलकर बोले प्रशांत किशोर, हमें पिछलग्गू नहीं बल्कि एक सशक्त नेता चाहिए

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Patna : जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर जेडीयू से निकाले जाने के बाद पहली बार पटना में मीडिया से मुखातिब हुए. प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉफ्रेंस में मीडिया के सामने बिहार के सीएम नीतीश कुमार को जमकर कोसा.

पीके ने नीतीश कुमार को पितातुल्य बताया, लेकिन साथ ही उन्हें पिछलग्गू कहकर आलोचना भी कर डाली. बीजेपी और जेडीयू गठबंधन पर पीके ने सवाल खड़े किये और कहा कि गांधी और गोडसे एकसाथ नहीं चल सकते.

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नीतीश कुमार के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना

जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने इससे आगे कहा कि वे नीतीश कुमार के फैसले को हृदय से स्वीकार करते हैं और उसपर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. उनके प्रति जो सम्मान है,वो आगे भी रहेगा.

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साथ ही कहा कि पार्टी से निकालने का एकाधिकार उनका था, जो आगे भी रहेगा. इस दौरान प्रशांत किशोर ने ऐलान किया कि 20 फरवरी से वे ‘बात बिहार की ‘ नाम से एक कैंपेन भी शुरू करने जा रहे हैं.

अपनी पीसी में प्रशांत किशोर ने कहा कि, नीतीश कुमार से उनका संबंध विशुद्ध रूप से राजनीतिक नहीं रहा है. कहा कि, नीतीश कुमार से मुलाकात 2014 में पहली बार हुई थी, और उन्होंने मुझे अपने बेटे जैसा रखा और वैसा ही प्यार भी दिया. और जबतक नीतीश जी के दल में रहा उन्हें मैंने भी पितातुल्य ही माना.

 नीतीश कुमार और मेरे बीच मतभेद की हैं दो वजह

प्रेस कॉफ्रेंस में प्रशांत किशोर ने खुलकर बताया कि उनके और नीतीश कुमार के बीच दो वैचारिक मतभेद हैं. पहला वैचारिक है, क्योंकि नीतीश कुमार को वे जितना जानते हैं, उसके मुताबिक नीतीश गांधी और लोहिया को नहीं छोड़ सकते हैं.

आगे पीके ने कहा कि दुविधा मन में इस बात को लेकर भी है कि एक ओर तो आप गांधी जी की बातों का शिलापट लगवा रहे हैं और लोगों को उनके विचारों से अवगत करवा रहे हैं.

तो ऐसे में गोडसे के साथ खड़े लोग उनके साथ कैसे खड़े हो सकते हैं. और ये दोनों तरह की बातें एक साथ नहीं हो सकती है. जबकि दूसरा मतभेद बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन में उनकी स्थिती को लेकर है. क्योंकि 2004 की तुलना में उनकी स्थिती आज दयनीय है.

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कितने समझौते हुए फिर भी बिहार में विकास नहीं  

प्रशांत किशोर ने पीसी में बीजेपी और जेडीयू के गठबंधन पर सवाल उठाये और नीतीश कुमार को निशाने पर लेते हुए कहा कि, आपके झुकने से अगर बिहार का विकास हो रहा है तो इसमें आपत्ति नहीं है. लेकिन इतने समझौतों के बाद बिहार में कितनी तरक्की हो गयी, क्या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला?

इससे आगे कहा कि बिहार यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए नीतीश कुमार ने सबके सामने हाथ जोड़े, लेकिन उसपर कोई रिप्लाई नहीं आया, बात करना तो दूर की बात है.पीके ने कहा कि, ऐसा नेता हम चाहते हैं , जो सशक्त हो और अपनी कहने के लिए किसी का पिछलग्गू ना बने.

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