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#PramilaJaipal ने अमेरिकी संसद में कश्मीर में संचार प्रतिबंध खत्म करने, बंदियों को रिहा करने का प्रस्ताव रखा

इस प्रस्ताव को कंसास के रिपब्लिकन सांसद स्टीव वाटकिंस के रूप में केवल एक सदस्य का समर्थन प्राप्त है.यह एक केवल एक प्रस्ताव है, जिस पर दूसरे सदन में वोट नहीं किया जा सकता और यह कानून नहीं बनेगा.

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Washington : भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने अमेरिकी संसद में जम्मू कश्मीर पर एक प्रस्ताव पेश किया है.  प्रस्ताव में  भारत से अपील की गयी है कि जम्मू कश्मीर में लगाये गये संचार प्रतिबंधों को जल्द से जल्द हटाया जाये और सभी निवासियों की धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षित रखी जाये. हालोंकि इस प्रस्ताव को कंसास के रिपब्लिकन सांसद स्टीव वाटकिंस के रूप में केवल एक सदस्य का समर्थन प्राप्त है.

यह एक केवल एक प्रस्ताव है, जिस पर दूसरे सदन में वोट नहीं किया जा सकता और यह कानून नहीं बनेगा.   प्रमिला जयपाल द्वारा कई सप्ताह के प्रयासों के बाद प्रतिनिधिसभा में पेश किये गये प्रस्ताव में भारत से पूरे जम्मू कश्मीर में संचार सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने की अपील की गयी है.

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भारतीय मूल के अमेरिकियों ने विभिन्न मंचों से इसका विरोध किया था

इस प्रस्ताव को पेश किये जाने से पूर्व  भारतीय मूल के अमेरिकियों ने विभिन्न मंचों से इसका विरोध किया था. प्रमिला जयपाल के कार्यालय को इस प्रस्ताव को पेश नहीं करने के लिए भारतीय अमेरिकियों के 25 हजार से अधिक ईमेल प्राप्त हुए. भारतीय अमेरिकियों ने कश्मीर पर प्रस्ताव पेश करने के उनके कदम के खिलाफ उनके कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन भी किया.

जान लें कि  भारत सरकार द्वारा पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म उसे दो केन्द्रशासित प्रदेश में विभाजित करने के बाद से ही वहां कई प्रतिबंध लगे हुए हैं. प्रस्ताव में भारत से अपील की गयी  है कि मनमाने ढंग से हिरासत में लिये गये लोगों की जल्द से जल्द रिहाई की जाये और उन पर राजनीतिक गतिविधियों एवं भाषणों पर किसी प्रकार की रोक लगाने वाले बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने की शर्त लगाने से बचा जाये.

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भारत ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है

प्रस्ताव में दावा किया गया है कि इस बात के फोटोग्राफिक सबूत हैं कि हिरासत में लिये गये लोगों को उनकी रिहाई की शर्त के रूप में राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से मना करने और बयान जारी करने के लिए निश्चित बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने होंगे.  भारत ने हालांकि इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है. भारत का कहना है कि जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने का निर्णय संप्रभु है और वह अपने आंतरिक मामले में किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा.

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