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प्रधान कैफेटेरिया मामलाः हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा जिला प्रशासन, अब निगम के ठेकेदार ने गेट तोड़ा

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Hazaribag: हजारीबाग शहर का प्रधान कैफेटेरिया वहां के जिला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है. जिला प्रशासन ने पिछले साल कैफेटेरिया को सील कर दिया था. कैफेटेरिया को सील करने के दौरान निगम और प्रशासन ने किसी भी सरकारी नियम का पालन नहीं किया. जिसके कारण हाइकोर्ट ने पहले स्टे आर्डर दिया और फिर प्रशासन को आदेश दिया कि कैफेटिरिया को खोल दिया जाये. लेकिन प्रशासन ने इस मामले को इज्जत का सवाल उठाते हुए अदालती आदेश नहीं माना और डबल बेंच में अपील याचिका दाखिल कर रखी है.

इस बीच 28 जून की रात नगर निगम के ठेकेदार ने कैफेटिरिया के गेट को तोड़ दिया. अफसरोंं के कहने पर ठेकेदार ने यह काम किया. ताकि कैफेटेरिया में जाने के रास्ते को बंद किया जा सके. वर्तमान में ठेकेदार के द्वारा कैफेटेरिया के बगल में स्थित बुढ़वा महादेव तालाब का सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है. इसी काम के बहाने अधिकारियों का दबाव है कि वह कैफेटेरिया में जाने वाले गेट को भी तालाब की चाहरदीवारी के भीतर ले आये. उल्लेखनीय है कि अदालत ने कैफेटेरिया संचालक के पक्ष में 15 जून 2017 को ही स्टे अॉर्डर दिया था.

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बताया जाता है कि जिला प्रशासन के अफसरोंं ने प्रधान कैफेटेरिया के मामले में नियम विरुद्ध कार्रवाई की. प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और कोर्ट ने कैफेटेरिया संचालक के पक्ष में फैसला दिया है. इस स्थिति में प्रशासन के शीर्ष अधिकारी चाहते हैं किसी भी तरह उनके पदस्थापन तक कैफेटेरिया खुले नहीं. क्योंकि इससे उनकी फजीहत होगी.

जानकारी के मुताबिक 30 जनवरी 2006 को नगर निगम ने बुढ़वा महादेव तालाब के पास की जमीन कैफेटेरिया के लिए लीज 30 साल तक के लिए  दिया था. 28 मार्च 2016 को नगर निगम ने लीज की दर को भी रीवाईज करते हुए तीन रुपया प्रति फीट कर दिया था. 24 अप्रैल 2017 को प्रशासन ने बिना कोई प्रक्रिया शुरु किये कैफेटेरिया को सील कर दिया. जिसके खिलाफ कैफेटेरिया संचालक ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. प्रशासन की तरफ से एेसा कोई दस्तावेज अदालत में नहीं प्रस्तुत किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि प्रशासन की कार्रवाई जायज थी. कोर्ट ने पहले स्टे अॉर्डर दिया और फिर संचालक के पक्ष में आदेश दिया कि कैफेटेरिया को खोला जाये. प्रशासन ने अदालत के किसी भी आदेश का पालन आज तक नहीं किया.

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