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प्रदीप यादव ने कहा एक शौचालय पर है 6000 का कमीशन, अध्यक्ष ने कहा नह इतना नहीं है

- सीएम ने कहा कम से कम हम ने प्रयास तो किया

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Ranchi: विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को भी काफी सरल तरीके से चली. बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही 10:00 बजे से ही शुरू हो गई. सबसे पहले ध्यानाकर्षण चला. ध्यानाकर्षण के दौरान विधायकों ने कई मुद्दे पर सदन का ध्यान आकर्षित कराया. उसी क्रम में प्रदीप यादव ने ओडीएफ को लेकर सदन का ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की. उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि ओडीएफ का असली सच यह है कि ₹12000 में से ₹6000 एक शौचालय के लिए कमीशन देना पड़ता है. कमीशन की बात सुन कर अध्य्क्ष ने कहा कि नह इतना नहीं है. ये सुनकर कई विधायक हंस  पड़े. प्रदीप यादन ने कहा,  सरकार का दावा है कि उसने 40 लाख लोगों के लिए शौचालय बनाया है. लेकिन यहां मैं बताना चाहूंगा कि जो शौचालय बने हैं, वह इंसान के जाने के लायक नहीं है. इंसान क्या जानवर भी उस शौचालय का इस्तेमाल नहीं करेगा. उन्होंने अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि मेरे सवाल के जवाब में सरकार ने कहा है कि शौचालय बनने के 90 दिनों के बाद पहला वेरीफिकेशन होता है. दूसरा 6 महीने के बाद फिर वेरीफिकेशन होगा. प्रदीप यादव ने कहा कि शौचालय अक्टूबर तक बना दिए गए. 90 दिन हो गए हैं, तो वह पहली वेरिफिकेशन रिपोर्ट कहां है. सदन में वह रिपोर्ट क्यों नहीं रखी जा रही है.

वेरीफिकेशन के लिए क्यों नहीं पास के शौचालय में जाकर देखा जाए : सीपी सिंह

सदन में शौचालय को लेकर काफी हंसी-मजाक भी हुआ. दरअसल प्रदीप यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शौचालय इतने घटिया तरीके से बने हैं कि अगर कोई शौच के लिए अंदर गया और अपने दोनों हाथ उठा ले, तो दीवारें गिर जाएंगी. इसके बाद सदन में इस बात को लेकर काफी हंसी मजाक होने लगा. हेमंत सोरेन ने कहा कि वह शौचालय कम है और किसानों के लिए स्टोररूम ज्यादा. इस पर सीपी सिंह ने कहा कि क्यों नहीं रांची के पास के किसी गांव में जहां शौचालय बना है, वहां जाकर इस बात की पुष्टि करा ली जाए कि हाथ उठाने से शौचालय की दीवार गिरती है या नहीं.

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कमियां हो सकती हैं, लेकिन हमने प्रयास किया : सीएम

शौचालय वाले मामले पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अध्यक्ष से सदन में अपनी बात रखने की इच्छा जताई. सीएम ने कहा कि 70 सालों से सुदूर गांव के लोग खुले में शौच कर रहे थे. गांव की गरीब मां और बहन शाम होने का और अंधेरा होने का इंतजार करती थी. लेकिन मोदी सरकार ने एक कोशिश की शुरुआत की. सरकार ने यह प्रयास किया कि शौचालय के लिए अब कहीं बाहर नहीं जाना पड़े. उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं मानता हूं कि कमियां होंगी त्रुटि होगी. लेकिन गरीब मां बहन अब शाम ढ़लने का इंतजार शौच के लिए नहीं करती हैं. उन्होंने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि झारखंड में रानी मिस्त्री का काम सीखकर महिलाओं ने शौचालय बनाने का काम किया. जल सहिया का भी समर्थन शौचालय बनाने के लिए काफी हद तक मिला. उन्होंने कहा कि हमने 9 9.95 फ़ीसदी टारगेट पूरा कर लिया है, आने वाले दिनों में हम शत-प्रतिशत टारगेट पूरा कर लेंगे. उन्होंने गुस्से में विपक्ष की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आप लोग झारखंड का मजाक बनाना बंद करें.

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