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बिजली संकट के बीच ग्रामीण इलाकों में चालू किया गया पावर ग्रिड सब स्टेशन

Ranchi : राज्य मे पिछले एक साल मे बिजली जहां संकट बनी, वहीं कुछ क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के संकल्प को पूरा किया गया. बिजली संकट की बात करें तो डीवीसी का विवाद बढ़ा. स्थिति यहां तक आ गयी की दो बार केंद्र सरकार ने राज्य मद से कटौती की. फिर भी नंवबर से अभी तक राज्य मे डीवीसी पचास फीसदी कटौती कर रही है. दूसरी तरफ एनटीपीसी ने भी राज्य को बिजली कटौती के लिए नोटिस थमाया. लेकिन वार्ता से बनी सहमति के बाद ऐसा नहीं हुआ.

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केंद्र कंपनियां राज्य से बकाया भुगतान की मांग कर रही है. उपलब्धियों की बात करें तो साल मे चार ग्रिड सब स्टेशनों को शुरू किया गया. जिससे गढ़वा और मेराल क्षेत्र मे निर्बाध बिजली संभव हुई. इसी साल जेबीवीएनएल ने डीवीसी कमांड एरिया मे डीवीसी से निजात पाने के लिए संचरण लाइन निर्माण कार्य शुरू किया. जो, राज्य मे डीवीसी की निर्भरता कम करेगी. प्रोजेक्ट फिलहाल जारी है.

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डीवीसी से विवाद बढ़ा

साल 2020 के शुरुआती दिनों से ही राज्य में डीवीसी की बिजली कटौती ने जोर पकड़ा. मामले मे केंद्रीय हस्तक्षेप और उच्च स्तरीय बैठक भी हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. पिछले साल, अक्टुबर और इस साल जनवरी मे डीवीसी मामले मे आरबीआई ने राज्य मद से कटौती भी की. इस साल सितंबर और जनवरी मे फिर से कटौती होनी थी. लेकिन रिक्वेस्ट लेटर लिखें जाने के बाद केंद्र ने कटौती नहीं की. छह नंवबर से डीवीसी सात जिलों में फिर से कटौती शुरू की. तब कटौती बीस फीसदी की गयी. जो अब पचास प्रतिशत हो गयी. ऐसे मे क्षेत्र मे आठ नौ घंटे तक बिजली कट रही है.

अन्य क्षेत्रों में भी जारी रही बिजली कटौती

एनटीपीसी ओड़िसा पावर प्लांट में तकनीकी खराबी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ. इससे राज्य को मिलने वाली बिजली भी प्रभावित हुई. जो लगभग दो सौ मेगावाट रही. बिजली केंद्रीय पुल से राज्य को मिलती है. ऐसे मे अलग अलग इलाकों में भी आठ से नौ घंटे की बिजली कटौती शुरू हुई.

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मुफ्त बिजली योजना का लाभ नहीं

जेएमएम के घोषणा पत्र में उपभोक्ताओं को 100 यूनिट मुफ्त देने की बात कही गयी. सरकार ने सत्ता संभालने के साथ इस पर काफी घोषणाएं की. लेकिन सरकार को सत्ता संभालें तीन साल होने को है, योजना सब्सिडी के इंतजार में पड़ी है. योजना के लिए ऊर्जा विभाग जेबीवीएनएल को लगभग दो हजार करोड़ सब्सिडी देती. अगस्त महीने में निगम को सब्सिडी के जगह राज्य सरकार ने डीवीसी को सीधे भुगतान कर दिया. ऐसी योजना पड़ी रह गयी.

सोलर सिटी के लिए फंड का इंतजार

100 यूनिट मुफ्त बिजली के जैसे ही सोलर सिटी बनाने की योजना भी ऊर्जा विभाग के पास पड़ी है. योजना के तहत गिरिडीह जिला का चयन भी किया गया. योजना कुल 150 करोड़ की है. लेकिन विभाग के फंडिंग के बाद ही योजना पर काम संभव है. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए योजना पर काम किया जा रहा. इसी के तहत, 1400 सरकारी भवनों मे सोलर पैनल लगाये जा रहे हैं. फिलहाल नौ सौ भवनों मे काम पूरा कर लिया गया है.

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नियामक आयोग पद खाली

राज्य नियामक आयोग मे अध्यक्ष और दो सदस्य पद खाली रह गए. जहां अध्यक्ष पद पिछले साल जून से खाली है. वहीं दो सदस्य पद इस साल जनवरी से. ऊर्जा विभाग की ओर से इन पदों पर बहाली होती. लेकिन पिछले साल सितंबर मे अध्यक्ष पद के लिए जारी विज्ञापन के बावजूद पद मे बहाली नहीं की गयी. जबकि विद्यूत नियमावली के मुताबिक एक महीने मे अध्यक्ष पद पर बहाली होनी है.

ग्रामीण उपभोक्ताओं के बिल माफी योजना

इस साल राज्य सरकार ने ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए विशेष योजना लायी है. इस योजना का नाम डीपीएस माफी या एक मुश्त बिजली योजना है. जिसके तहत 25 हजार ग्रामीण उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया. इस योजना के तहत चार किस्त मे ग्रामीण घरेलु उपभोक्ता बकाया बिल दे सकते हैं. जिससे विलंब शुल्क माफ की जायेगी. योजना को दिसंबर तक का एक्सटेंशन दिया गया है.

 

ग्रिड सबस्टेशनों की शुरुआत

भागोडीह मेराल ग्रिड सब स्टेशन का उदघाटन इसी साल सिंतबर मे हुआ. ग्रिड के शुरुआत से क्षेत्र मे 22 घंटे बिजली आपूर्ति संभव है. वही, भवनाथपुर, छत्तरपुर, पलामू ग्रिड सबस्टेशन का शिलान्यास भी इस साल किया गया.

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