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दो साल और रूलायेगी बिजली, 8109 करोड़ के ट्रांसमिशन लाइन का प्रोजेक्ट दो साल में होगा पूरा

वर्तमान में ट्रांसमिशन लाइन से बिजली आपूर्ति की क्षमता 3690 एमवीए, 2019 तक चाहिए 5384 एमवीए

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– वर्ल्ड बैंक के 2311 करोड़ लोन से बनेगी 61 ट्रांसमिशन लाइन व ग्रिड सब स्टेशन

– 4605 करोड़ खर्च कर पीपीपी मोड से 59 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन

– 1193 करोड़ खर्च कर स्टेट प्लान से बनेगा 35 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन

Ranchi: प्रदेश की बिजली व्यवस्था 15 से 20 साल पुराने तार पर टिकी हुई है. पुराने तार होने की वजह से महीने में 30 से 40 बार लाइन ट्रिप कर जाती है. पुराने तारों में अधिक बिजली लेने की क्षमता भी नहीं है. अधिक बिजली लेने पर लाइन या पावर प्लांट ट्रिप कर जाता है. जिसके कारण कई जिलों में बिजली की आपूर्ति ठप हो जाती है. वर्तमान में ट्रांसमिशन से लाइन से 3690 एमवीए ही बिजली आपूर्ति की क्षमता है.

2019 तक 5384 एमवीए क्षमता की ट्रांसमिशन लाइन की जरूरत है. इस हिसाब से 1694 एमवीए की कमी है. इस कारण बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अधिक बिजली नहीं ली जा सकती. अब सरकार ने निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 8109 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है.

दो साल में प्रोजेक्ट पूरा करने का दावा

झारखंड राज्य संचरण निगम ने इन सभी प्रोजेक्ट्स को दो साल में पूरा करने का दावा किया है. इस हिसाब से दो साल तक प्रदेश में अधिक बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकती है. संचरण निगम द्वारा तैयार किये गये प्रोजेक्ट के अनुसार वर्ल्ड बैंक के लोन से 61 ट्रांसमिशन लाइन व ग्रिड सब स्टेशन बनाये जायेंगे. इसमें 2311 करोड़ रुपये खर्च होगा. पीपीपी मोड से 59 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन बनेगी. इस प्रोजेक्ट में 4605 करोड़ रुपया खर्च किया जायेगा. स्टेट प्लान से 35 ग्रिड सब स्टेशन व ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण होगा. यह प्रोजेक्ट 1193 करोड़ का है.

पीजीसीआइएल के प्रोजेक्ट में अब तक फंसा है पेंच

बिजली की दशा और दिशा सुधारने के लिए ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड निर्माण के लिए पीजीसीआइएल के साथ जून 2014 में करार हुआ था. करार के मुताबिक, दिसंबर 2015 तक 19 ट्रांसमिशन लाइन और 10 ग्रिड का निर्माण कार्य पूरा करना था. करार की मियाद पूरी होने के बावजूद भी काम पूरा नहीं हुआ. इसके बाद पीजीसीआइएल को कई बार अवधि विस्तार भी दिया गया. अब अगले साल ट्रांसमिशन लाइन को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अब तक पांच ट्रांसमिशन लाइन और तीन ग्रिड का निर्माण अधर में लटका हुआ है.

390 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

तय समय पर काम नहीं होने के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट भी बढ़ता चला गया. करार के वक्त यह प्रोजेक्ट 1310 करोड़ का था. अब यह बढ़कर 1700 करोड़ रुपये का हो गया है. इस हिसाब से 390 करोड़ का अतिरिक्त भार राज्य सरकार पर पड़ा है. पीजीसीआइएल को अब तक काम के एवज में लगभग 1200 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है.

इन लाइनों में अबतक फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच

बेड़ो-पतरातू ट्रांसमिशन लाइन,पतरातू-लातेहार ट्रांसमिशन लाइन,लातेहार-एस्सार ट्रांसमिशन लाइन,दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन,गोविंदपुर- टीवीएनएल ट्रांसमिशन लाइन,चतरा-लातेहार ट्रांसमिशन लाइन,गिरिडीह-सरिया,गिरिडीह- जमुआ,खूंटी-तमाड़ और बहरागोड़ा-धालधूमगढ़. इसके अलावा पतरातू ग्रिड, लातेहार ग्रिड और लोहरदगा ग्रिड का काम पूरा नहीं हो पाया है.

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