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बिजली संकटः थर्मल पावर प्लांटों में है कोयले की कमी, कोल इंडिया का हजारों करोड़ है बकाया, जानें किन राज्यों पर कितना बकाया

Ranchi : पिछले कुछ दिनों से राज्य में बिजली संकट गहराया हुआ है. हालांकि बीते एक-दो दिनों से स्थिति में कुछ हद तक सुधार है. इन सबके बावजूद बिजली संकट की प्रमुख वजह कोयले की कमी को बताया गया. सिर्फ झारखंड ही नहीं, कोयले की कमी से जूझनेवाले राज्यों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश शामिल हैं. इन राज्यों पर कोल इंडिया का हजारों करोड़ रुपये का बकाया है. जो लगभग 6477.5 करोड़ रुपये है. जानकारी हो कि थर्मल बिजली कोयले से बनायी जाती है. जिसकी आपूर्ति में कोल इंडिया का अहम योगदान है.

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तेनुघाट बिजली निगम पर 1018.22 करोड़ बाकी

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के तेनुघाट बिजली निगम लिमिटेड के ऊपर कोल इंडिया का 1018.22 करोड़ रुपये बकाया है. पिछले दिनों सीसीएल में बकाया के कारण ही टीवीयूएनएल में कोयले के स्टॉक में कमी हुई थी. जिसके कारण एक यूनिट बंद करनी पड़ी थी. बता दें कि राज्य में टीवीयूएनएल एक मात्र सरकारी थर्मल पावर प्लांट है. जिससे कोयले की आपूर्ति सामान्य रहने पर 330 मेगावाट यूनिट तक बिजली उत्पादन किया जाता है. वहीं, इंलैंड, आधुनिक पावर समेत अन्य पावर प्लांट भी हैं.

Sanjeevani

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किन राज्यों पर कितना बकाया

तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 823.92 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश पावर जेनरेशन कंपनी के ऊपर 531.42 करोड़ रुपये, राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के ऊपर 429.47 करोड़ रुपये का बकाया है. इस सूची में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सबसे आगे हैं. जहां महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन कंपनी पर कोल इंडिया का 2,608.07 करोड़ रुपये का बकाया है. जबकि पश्चिम बंगाल विद्युत विकास कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 1,066.40 करोड़ रुपये बाकी है. आंध्र प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम पर 764.70 करोड़, कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड पर 514.14 करोड़, तमिलनाडु एनर्जी कंपनी लिमिटेड पर 59.19 करोड़ और तमिलनाडु जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के ऊपर 32.79 करोड़ रुपये का बकाया है.

कोल इंडिया ने समय-समय पर किया दावा

हालांकि कोल इंडिया ने बढ़ते बिजली संकट के बीच समय-समय पर बकाया वसूली के लिए दावा किया है. जिसमें कोल इंडिया ने बताया कि झारखंड, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की बिजली उत्पादक कंपनियों का बकाया अधिक है. लेकिन इन राज्यों में कोयले की आपूर्ति कभी नहीं रोकी गयी. रेक की उपलब्धता के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति की जा रही है.

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