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और गहरा सकता है बिजली संकट, डीवीसी का झारखंड सरकार पर 8 हजार करोड़ बकाया

30 साल में ऐसा बिजली संकट नहीं देखा, सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बिजली संकट पर बहस

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Dhanbad : झारखखंड के उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सात जिले की कम से कम 50 लाख की आबादी आज ढिबरी युग में जीने को मजबूर है. केंद्र के बाद झारखंड में भी भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए यह बिजली संकट बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रही है. इन 7 जिलों में झारखंड सरकार को बिजली देने वाले “दामोदर घाटी निगम” (DVC) ने तो विज्ञापन के जरिये निकट भविष्य में बिजली संकट और भी गहराने की चेतावनी दे डाली है. डीवीसी वैसे तो प्रतिदिन आधिकारिक तौर पर छह घंटे लोडशेडिंग की बात कहता है, लेकिन उपभोक्ताओं को अमूमन 10 से 12 घंटे बिजली संकट झेलना पड़ता है.

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बकाये से उत्पादन प्रभावित

चिराग तले अंधेरा” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. धनबाद कोयलांचल के बिजली उपभोक्ताओं के साथ देश के कई थर्मल पावर स्टेशन धनबाद से मिलने वाले कोयले से बिजली उत्पादन करते हैं और उस बिजली से देश का बड़ा हिस्सा जगमग करता है, तो वहीं दूसरी तरफ झारखंड के धनबाद, बोकारो, रामगढ़, चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह और कोडरमा में पिछले दो माह से “अभूतपूर्व बिजली संकट” गहराया हुआ है. ये 7 जिले DVC के कमांड एरिया में आते हैं.

DVC के द्वारा कुछ दिन पूर्व प्रकाशित कराये गए एक विज्ञापन की ही मानें तो झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड पर DVC का 8 हजार करोड़ रुपया बकाया है, तो वहीँ DVC पर कोल इंडिया का 2 हजार करोड़ रुपया बकाया हो गया है. विज्ञापन में कहा गया है कि बकाया होने के कारण कोयला नहीं मिल पा रहा है जिससे DVC के थर्मल पावर स्टेशनों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. इसी विज्ञापन के जरिये DVC ने चेताया है कि अगर बकाया राशि का भुगतान नहीं होता है तो स्थिति आगे और भी ख़राब हो सकती है.

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8 हजार करोड़ एकमुश्त भुगतान पर अड़ा है डीवीसी

DVC और झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के बीच चल रही खींचतान के बीच आम बिजली उपभोक्ता पिस रहे हैं. अपने बिजली बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ता 10-10 घंटे तक अंधेरे में रहने पर मजबूर हैं. सुबह आंख खुलने से रात के सोते वक्त तक बिजली के दर्शन नहीं होते, रूम हीटर, गीजर शोभा के वस्तु बन चुके हैं तो बिजली एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक कहते हैं कि उन्होंने अपनी 30 साल की नौकरी में इतना गहरा बिजली संकट नहीं देखा.

महाप्रबंधक कि माने तो DVC एकमुश्त 8 हजार करोड़ रुपये के भुगतान पर अड़ा हुआ है, जबकि बीच-बीच में DVC को भुगतान दिया भी जा रहा है और बकाया राशि में विवाद भी है. महाप्रबंधक बताते हैं कि बिजली संकट से त्रस्त सात जिलों में 7 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं. बिजली संकट से त्रस्त उपभोक्ता अब इस लड़ाई को सोशल मीडिया में भी उठा चुके हैं. साथ ही उपभोक्ता बड़े आंदोलन का भी मूड बना रहे हैं. समाचार-पत्रों में विज्ञापन और फिर सोशल मीडिया में छिड़ी बहस ने बिजली संकट के मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है.

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