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रांची-टाटा हाइवे में हैं हजारों गड्ढे, अधूरा सड़क का निर्माण महीनों से रूका

सड़क निर्माण में वित्तीय गड़बड़ी का है आरोप, बरसात के बाद रिपेयरिंग संभव

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Ranchi: रांची-टाटा-बहरागोड़ा हाईवे में 6 लेन का काम पिछले कई महीनों से रूका हुआ है. इस सड़क निर्माण में वित्तीय गड़बड़ी का आरोप है. मामला कोर्ट में है. सीबीआई 264 करोड़ रूपये की गड़बड़ी की जांच कर रही है. वहीं दूसरी ओर इस एक्सप्रेस वे के अधूरा रहने से रोड खस्ता हाल हो गया है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रांची के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय कुमार सिन्हा का कहना है कि अभी बारिश के समय में बिटुमिन से मरम्मती भी संभव नहीं है. 20 अगस्त को हाईवे की मरम्मती के लिए टेंडर निकाला जा रहा है. फिर भी बारिश का सीजन खत्म हो जाने के बाद ही रिपेयरिंग का काम शुरू हो पायेगा.

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NHAI ने कहा कंपनी को टर्मिनेट किया जाय, तभी वह कर सकता है काम

एनएचएआई(NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टचर अजय कुमार सिन्हाश ने बताया कि हमने कोर्ट से कहा है कि टाटा-रांची का काम आगे तभी शुरू कर सकते हैं, जब पुराने कॉन्ट्रेक्टर को टर्मिनेट किया जाय. इसके लिए पहले ही नोटिस दिया गया है. अब बैंकों और एनएचएआई बोर्ड में यह तय होना है कि फंडिंग कैसे होगी ? अब 23 अगस्तं को इस मामले में सुनवाई होगी, जो इस सडक निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है.

वित्तीय अनियमितता की सीबीआई जांच जारी
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वहीं झारखंड हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को कहा है कि वह तत्काल रांची-टाटा सड़क के निर्माण के लिए इसके सभी स्टेक होल्डर्स (stakes holder) जिनमें राज्य सरकार, पैसे देने वाले बैंकर, निर्माण कर रही कंपनी, रांची एक्सप्रेस वे के साथ बैठक करे और बताए कि सड़क का निर्माण कैसे होगा ? मामले को उलझाने के बजाए राज्य हित में यह अधिक जरूरी है कि सड़क बने. इसलिए जनहित का ध्यान रखते हुए एनएचएआई समाधान निकाले. यह सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क है. हजारो लोग प्रतिदिन इसपर चलते हैं. कोर्ट चाहता है कि सड़क का निर्माण जल्द से जल्द हो.

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सड़क निर्माण करने वाली कंपनी ने कोर्ट से किया आग्रह करार न करे रद्द

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कंपनी रांची एक्सप्रेस वे ने कहा कि उसने पचास प्रतिशत काम किया है. निर्माण में विलंब के लिए केवल वह जिम्मेवार नहीं है. उसे टर्मिनेट करने से सड़क तुरंत नहीं बन जाएगी. कोर्ट चाहे तो शेष काम की जिम्मेवारी दूसरी कंपनी को दे दे. लागत के अनुसार बाद में शेयरिंग निर्धारित हो सकती है. पर करार रद्द होने से उसे काफी नुकसान होगा. यह उचित भी नहीं.

बैंक ने कहा- करार रद्द करने पर नए सिरे से वह नहीं दे सकता और राशि

बैंक ने कहा कि उसने पहले ही कंपनी को प्रोजेक्ट के अगेंस्ट पैसे दे दिए हैं. अब अगर एग्रिमेंट रद्द होता है, कंपनी को टर्मिनेट किया जाता है तो वह दूसरी कंपनी को राशि नहीं दे सकता. पहले से दी गई राशि जो पब्लिक मनी है, उसके डूबने का खतरा भी हो जाएगा.

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264 करोड़ अनियमिता की सीबीआई कर रही है जांच

रांची-जमशेदपुर एनएच 33 के निर्माण और आवंटित फंड में से 264 करोड़ के अवैध डायवर्सन की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने बुधवार को प्रीलिमिनरी इंक्वायरी रिपोर्ट दर्ज कर ली है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएच निर्माण मद में आवंटित राशि में से 264 करोड़ रुपए निर्माण कंपनी ने अपने दूसरे प्रोजेक्ट में डायवर्ट कर दिया. निविदा शर्त की अवहेलना की. राशि ट्रांसफर की जानकारी संबंधित विभाग से भी छुपाई गई. जांच के दायरे में रांची एक्सप्रेस-वे लिमिटेड, मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड, मधुकॉन इन्फ्रा लिमिटेड, मधुकॉन टोल हाइवेज लिमिटेड, केनरा बैंक समेत 14 बैंकों को रखा गया है.

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