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नहीं हो सका शव का पोस्टमार्टम, अब डीएनए टेस्‍ट से खुलेगा विश्‍वनाथ की मौत का रहस्‍य

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Giridih: शहर के मकतपुर रोड के इंदिरा कॉलोनी स्थित घर से एक व्‍यक्ति की सड़ी-गली लाश मिली थी. इस लाश को करीब आठ माह से उस व्‍यक्ति के बेटे ने ही तंत्र-मंत्र के जरीये जिंदा करने के लिए घर में छुपा रखा था. मामले में पुलिस ने बेटे को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद रविवार को नगर थाना पुलिस ने जरूरी पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया. पुलिस ने उसे यह कहकर छोड़ा है कि मृत विश्वनाथ प्रसाद सिन्हा के बेटे प्रशांत कुमार सिन्हा को दिमागी रुप से इलाज की जरूरत है.

हर संभावनाओं को तलाश रही है पुलिस

नगर थाना पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी हुई है कि इंदिरा कॉलोनी स्थित घर से बरामद शव मृतक विश्वनाथ प्रसाद का ही है या किसी और का. पुलिस को इस बात का भी संदेह है कि कोई भी बेटा दिमागी रूप से भले ही बीमार हो.  लेकिन, इतने माह तक पिता के शव को घर पर नहीं रख सकता. पुलिस को इस बात भी शक है कि अगर शव विश्वनाथ प्रसाद का ही है तो कहीं बेटे ने ही पिता की हत्या तो नहीं की है. लिहाजा, पुलिस अपने इसी शक को मिटाने के लिए ही अब शव का डीएनए टेस्ट कराकर शव की पहचान कराने में जुट गयी है. डीएसपी नवीन सिंह ने बताया कि शव इस कदर सड़-गल चुका है कि पोस्टमार्टम करना संभव नहीं है. घटना के दूसरे दिन तांत्रिक बेटे के घर जाने पर कई ऐसे तथ्य सामने आये जो बेहद रोचक और चौंकानेवाले हैं. 40 वर्षीय युवक प्रशांत बीएससी की पढ़ाई करने के बाद घर पर पिता का शव रखकर तंत्र-मंत्र कर दोबारा जीवित करने के प्रयास में लगा था. इसका खुलासा शनिवार की शाम तांत्रिक बेटे के पकड़ाने के बाद ही हो गया था. घटना की शाम कमरे से शव के साथ प्लास्टिक बाल्टी के साथ एक कड़ाही भी बरामद हुई. जिसमें केमिकल के साथ पानी भरा मिला. इसके बाद पता चला कि प्रशांत मृतक पिता के शरीर पर केमिकल का लेप लगाने की तैयारी में जुटा हुआ था. पिता के शव पर लेप लगा पाता कि इसे पहले ही मां के हंगामे ने प्रशांत की पोल खोल कर रख दी.

नोटिस बोर्ड भी बना हुआ है चर्चा का विषय

शव के साथ तंत्र-मंत्र करने के अलावे प्रशांत पिता के शव साथ कुछ रिसर्च भी कर रहा था. इसका इशारा कमरे में टंगा नोटिस बोर्ड कर रहा है. जिसमें ‘संविधान शून्य, भगवान होता है, शुभ विवाह लगन उत्सव, संपूर्ण धन संपति, प्लानिंग एक्शन’ जैसे अनगिनत शब्दों के साथ कई अंग्रेजी शब्द लिखे हुए हैं. नोटिस बोर्ड में कई ऐसी बातें लिखी हुई थी, जिसका किसी सामान्य व्यक्ति के जीवन से कोई लेनादेना नहीं है. पूरे बोर्ड पर नजर डालने के बाद साफ तौर यह लगता है कि प्रशांत पिता के शव को रखकर तंत्र-मंत्र करता रहा है.

इस बीच शनिवार रात से लेकर रविवार तक शुरुआती पूछताछ के बाद डीएसपी नवीन सिंह और नगर थाना पुलिस इस नतीजे पर पहुंची है कि प्रशांत दिमागी रुप से बीमार होने के कारण वह अपने पिता के शव को घर पर रखकर जिंदा करने के प्रयास में था. इसके पीछे तांत्रिक बेटे प्रशांत का पिता से गहरा लगाव होना सामने आया है. घर के एक कमरे में एक सफेद नोटिस बोर्ड टंगे होने के साथ कमरे में कई ऐसी आयुर्वेदिक और अंग्रेजी दवाएं रखी हुई थी. जिसका लेप लगाकर प्रशांत संभवत: पिता के शरीर को सुरक्षित रखे हुए था. इनमें से कुछ ऐसे दवाइयां भी कमरे में देखी गयी. जिनका इस्तेमाल प्रशांत द्वारा पिता के शव को सुरक्षित करने के लिए करता रहा था.

जानकारी के मुताबिक मृतक विश्वनाथ को शुगर, बीपी और घुटनों के दर्द की बीमारी काफी सालों से थी. इन बीमारियों से विश्वनाथ प्रसाद के परेशान होने की बात भी कही जा रही है. इन बीमारियों से पिता को राहत दिलाने के लिए प्रशांत अपने स्तर से चिकित्सक के सुझाव पर पिता को दवा देता रहा था.

हालांकि पुलिस अब भी पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. इस बीच रविवार को पुलिस के द्वारा छोड़ने के बाद अब प्रशांत अपने घर में मां अनु कुमारी और दोनों बहन ममता सिन्हा और शशिकला के साथ रह रहा है. बीती रात घर से विश्वनाथ प्रसाद की डेड बॉडी निकालने के बाद दोनों बहनों और वृद्ध मां ने मिलकर पूरे घर की सफाई की. खास तौर पर उस कमरे की सफाई अच्छी तरीके से की गयी, जहां मृतक विश्वनाथ का शव रखा हुआ था.

मां व बहन ने विश्वनाथ के मौत की जानकारी होने से किया इंकार

इधर घर पर पूछने पर पहले तो मां और बहन ने कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया. लेकिन दबाव के बाद अब ये कह रही हैं कि उनलोगों को कोई जानकारी नहीं है कि विश्वनाथ प्रसाद की मृत्यु कब हुई है. क्योंकि प्रशांत तीन दिन पहले ही विश्वनाथ प्रसाद को लेकर लौटा है. जब लौटा तो तब पता चला कि विश्वनाथ प्रसाद की मौत हो चुकी है और प्रशांत पिता के मृत शरीर को घर पर रखकर तंत्र साधना कर रहा है. इसके लिए वह एक तांत्रिक का सहयोग भी ले रहा था. तांत्रिक कौन है और कहां का है इसकी जानकारी भी उनलोगों को नहीं है. जबकि जानकारी जुटाने के क्रम में यह पता चला कि जो बहन (ममता) पिता की मौत की जानकारी होने से इंकार रही है, उसी ने अपने घर पढ़ने वाले एक बच्चे के अभिभावक से 15 दिन पहले यह कहकर फीस मांगी कि उसके पिता बीमार हैं. वहीं मुहल्ले वाले भी साफ तौर पर कह रहे हैं कि विश्वनाथ प्रसाद की मौत की जानकारी परिवार के हर सदस्य को है. बहरहाल, सच क्या है इसका खुलासा अब डीएनए टेस्ट के बाद ही पता चल सकेगा. लेकिन, घटना के रात से मामला गिरिडीह के साथ पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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