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पेयजल और स्वच्छता विभाग में अभियंता प्रमुख की पोस्टिंग का मामला फंसा

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  • अब तक नहीं हुई है स्थापना समिति की बैठक, आठ दिन बाद सेवानिवृत्त हो जायेंगे वर्तमान अभियंता प्रमुख

Ranchi : पेयजल और स्वच्छता विभाग में नये अभियंता प्रमुख की पोस्टिंग का मामला फंस गया है. अब तक विभाग की स्थापना समिति की बैठक भी नहीं हुई है. आठ दिन बाद, यानी 31 जनवरी को अभियंता प्रमुख तनवीर अख्तर सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इसको लेकर अब तक किसी तरह की कोई सुगबुगाहट विभाग में शुरू नहीं हुई है. इस बार भी पिछली बार की तरह संचिका बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं. जानकारी के अनुसार तनवीर अख्तर को अभियंता प्रमुख बनाये जाने के मामले में न सिर्फ विभागीय मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी की टिप्पणी की अवहेलना की गयी, बल्कि वरीयता सूची को भी प्रमुखता नहीं दी गयी. सूत्रों का कहना है कि श्री अख्तर को अभियंता प्रमुख बनाने से पहले विभाग के ही सहायक द्वारा बढ़ायी गयी संचिका के आधार पर अंतिम निर्णय ले लिया गया. इसके लिए स्थापना समिति की बैठक तक नहीं की गयी. पूर्व में अभियंता प्रमुख की पोस्टिंग के लिए स्थापना समिति की नियमित बैठकें होती रही हैं.

विभाग के संयुक्त सचिव अभय नंदन अंबष्ठ ने सहायक की ओर से बढ़ायी गयी संचिका पर बताये गये तीन नामों में से श्री अख्तर के नाम की अनुशंसा कर उस पर सचिव आराधना पटनायक से सहमति ले ली थी. इसमें हीरा लाल प्रसाद और श्वेताभ कुमार का नाम भी लिखा गया था. तीनों नामों में से तनवीर अख्तर के नाम से संबंधित संचिका विभागीय मंत्री के पास भेजी गयी. संचिका में विभागीय मंत्री ने वरीयता सूची को तवज्जो देने की बातें भी कहीं, पर विभाग के स्तर पर आनन-फानन में संचिका पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेकर अधिसूचना जारी कर दी गयी.

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15 दिनों तक मुख्यमंत्री सचिवालय में लंबित थी संचिका

पिछले अभियंता प्रमुख के नाम पर मुख्यमंत्री सचिवालय में संचिका एक महीने तक लंबित रही. दो अप्रैल 2018 को संचिका विभागीय मंत्री के पास भेजी गयी थी. इसके बाद नौ अप्रैल 2018 को विभागीय मंत्री ने टिप्पणी की कि वरीयता सूची के आधार पर अभियंता प्रमुख का चयन किया जाये. नौ अप्रैल से 22 अप्रैल तक संचिका मुख्यमंत्री सचिवालय में पड़ी रही. हाथों-हाथ संचिका पर अनुमोदन लिया गया.

हीरा लाल प्रसाद सबसे अनुभवी

वरीयता सूची को देखा जाये, तो 1987 बैच के हीरा लाल प्रसाद अभियंता प्रमुख पद के लिए सबसे अनुभवी हैं. वह 30 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त भी होंगे. वह विभाग में 2012 से नियमित मुख्य अभियंता हैं. चर्चा यह भी है कि चूंकि वह आरक्षित संवर्ग से आते हैं, इसलिए इन्हें अभियंता प्रमुख बनाने में विभाग की एक लॉबी दिलचस्पी नहीं ले रही है. दूसरे स्थान पर श्वेताभ कुमार हैं. इन्हें दिसंबर 2018 में नियमित मुख्य अभियंता बनाया गया है. इन पर रांची में अधीक्षण अभियंता रहते हुए सुवर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल में 14 करोड़ की लागत से भूकंप जोन में बाउंड्री वॉल बनाये जाने में अनियमितता बरतने का मामला चल रहा है. यह मामला निगरानी में लंबित है. तीसरे स्थान पर सृष्टिधर मोदी हैं, जो क्षेत्रीय मुख्य अभियंता दुमका हैं. इन्हें भी 2012 में नियमित मुख्य अभियंता बनाया गया था. वह 1989 बैच के अधिकारी हैं. मुख्य अभियंता के दो पद पर अब भी किसी को प्रोन्नति नहीं दी गयी है. इस पद के लिए उमेश गुप्ता और नवरंग सिंह दावेदार हैं.

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