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झारखंड के गिरिधारी राम गौंझू को मरणोपरांत पद्मश्री

Ranchi : झारखंड के गिरधारी राम गौंझू को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की गयी है. उन्हें यह सम्मान साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है.

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गिरधारी राम गौंझू रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय भाषा विभाग के विभाग अध्यक्ष रह चुके थे. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बीते साल उनका निधन हो गया.

शिक्षाविद, साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी के रूप में उनकी पहचान थी .झारखंडी कला संस्‍कृति की तिकड़ी में डॉ. रामदयाल मुंडा, डॉक्‍टर बीपी केसरी और डॉ. गिरिधारी राम गौंझू का नाम था.

उन्होंने डेढ़ दर्जन से भी ज्यादा किताबें लिखी थी. उनकी किताबों में झारखंड का अमृत पुत्र: मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, महाराजा मदरा मुंडा, झारखंड के लोक नृत्‍य, झारखंड की पारंपरिक कलाएं, झारखंड की सांस्‍कृतिक विरासत, नागपुरी के प्राचीन कवि, रुगड़ा-खुखड़ी, सदानी नागपुरी सदरी व्‍याकरण, नागपुरी शब्‍द कोश, झारखण्‍ड के लोक गीत, झारखंड के वाद्य यंत्र, मातृभाषा की भूमिका, ऋतु के रंग मांदर के संग, महाबली राधे कर बलिदान आदि प्रमुख हैं.

गिरधारी राम गौंझू बेलवादाग खूंटी में 1949 में जन्मे और परमवीर अलबर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज चैनपुर गुमला से होते हुए गोस्सनर कॉलेज रांची, रांची कॉलेज और उसके बाद स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग होते होते हुए क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा विभाग तक का शैक्षणिक सफर के साथ सांस्कृतिक शोध और लेखन से निरंतर जुड़े रहे.

 

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