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रांची हिंसा में PFI का हाथ होने की आशंका, पत्थरबाजी में रोहिंग्या भी शामिल

Ranchi: रांची मेन रोड में हुई हिंसक घटनाओं के बाद उपद्रवियों की पड़ताल तेज की गई है. पुलिस कई बिंदुओं पर छानबीन कर रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही उपद्रवियों को बेनकाब किया जाएगा. उपद्रव मामले में इस्लामिक कट्‌टरपंथी संगठन (पीएफआई) की साजिश की बात सामने आ रही है. जिस पैटर्न पर यह हिंसा हुई है, उसमें पीएफआई के हाथ होने की आशंका है. पत्थरबाजी का पैटर्न वही प्रदर्शित करता है. हिंसा के तार सीधे-सीधे पीएफआई से जुड़ते दिख रहे हैं. पीएफआई ने स्थानीय युवकों से संपर्क कर इस घटना की प्लानिंग की. जुमे की नमाज के बाद लोगों को भड़का कर पत्थरबाजी के लिए प्रेरित किया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रांची में पीएफआई के कनेक्शन की सूचना पुलिस को मिली है. उसी कनेक्शन की विशेष समुदाय के स्थानीय युवकों के गठजोड़ के कारण इस घटना को अंजाम दिया गया. रांची के सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के लिये यूपी से फंडिग की गयी थी.

मंदिर में पत्थरबाजी करते उपद्रवी

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रघुवर दास ने जतायी PFI कनेक्शन की आशंका

यह बात और पुख्ता इसलिये हो रही है कि झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने भी रांची घटना में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कनेक्शन होने की बात कही है. उन्होने साफ कहा है कि उनकी सरकार के समय पीएफआई पर बैन लगा दिया गया था. जो हंगामा का रास्ता अख्तियार किया गया वह स्वरुप पीएफआई के तरफ इशारा करता है. उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर केद्रीय गृह मंत्रालय ने काफी पहले कई राज्यों में अलर्ट जारी किया था. जिसमें झारखंड का भी नाम था.

सहारनपुर से पहले भी रहा है झारखंड का कनेक्शन

रांची मेन रोड में हुए उपद्रव में सहारनपुर दंगे के मास्टरमाइंड ने ही रांची को भी दहलाने की साजिश रचने की जानकारी पुलिस को मिली है. यह कोई पहला मौका नही है, कि झारखंड का यूपी सहारनपुर के कनेक्शन है. इससे पहले भी मार्च 2022 को गिरीडीह जिले के एक युवक को यूपी एटीएस की टीम ने आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े होने के आरोप में सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था. गिरीडीह जिले के गावां थाना क्षेत्र के पतना निवासी इनामुलहक उर्फ इनाम इम्तियाज पर देवबंद कोतवाली में देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का मुकदमा दर्ज है. इनामुलहक एक समुदाय विशेष के लोगों के खिलाफ भड़काऊ वीडियो इंटरनेट पर लोड करता था. समुदाय विशेष के लोगों को देश के खिलाफ उकसाता था. वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठनों के संपर्क में भी था. झारखंड के एक समुदाय विशेष के युवकों को गुमराह करने में लगा था.

रोहिंग्याओं पर भी शक

पुलिस सूत्रों की माने तो उपद्रव में कई रोहिंग्या भी शामिल थे, रांची में हुए बवाल को लेकर शक की सूई रोहिंग्या पर भी जा रही है. हालांकि झारखंड के कई हिस्सों में रोहिंग्या के उपस्थिति और सक्रियता के प्रमाण मिले हैं. अप्रैल 2020 में धनबाद के बैंक मोड़ इलाके में तीन रोहिंग्या मुसलमानों को भी पकड़ा गया था, वहीं खुफिया विभाग के इनपुट पर लोहरदगा में भी कई रोहिंग्या के छिपकर रहने की सूचना पुलिस को मिली थी. खुफिया विभाग ने करीब एक दर्जन लोगों के नाम पता की जानकारी दी थी, जिसपर आरोप था कि लोहरदगा के ये लोग रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को छिपाकर रखा है.

 

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