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#BioMedicalWaste को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बोकारो के नौ अस्पतालों को थमाया नोटिस

Bokaro: झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) ने बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 का उल्लंघन करने पर शुक्रवार को बोकारो जनरल हॉस्पिटल (बीजीएच) सहित नौ प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया.

Jharkhand Rai

जेएसपीसीबी ने बायो मेडिकल वेस्ट सही तरीके से नहीं फेंकने वालों के खिलाफ नोटिस जारी किया है. प्रदूषण विभाग की इंस्पेक्शन टीम को शहर में कई जगह कचरे के ढेर में बायो मेडिकल वेस्ट पड़े हुए मिले थे.

सूत्रों के अनुसार पहले फेज में सिर्फ 9 संस्थानों को लेटर भेजा गया है. ये पीएसयू और प्राइवेट हॉस्पिटल्स हैं. इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रदूषण विभाग अगले फेज में चिन्हित डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथोलॉजिकल लैब्स और नर्सिंग होम्स के मालिकों को भी नोटिस भेजेगी.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बीजीएच सहित नौ मेडिकल संस्थानों की अथॉरिटीज को 28 जनवरी को झारखंड स्टेट प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के मेंबर सेक्रेट्री के ऑफिस में सशरीर प्रस्तुत होने और अपनी सफाई में बातें रखने की बात नोटिस में कही है.

Samford

बोर्ड ने कचरे के ढेर में बायो मेडिकल वेस्ट पाये जाने के मामले में इन संस्थानों को अपने तथ्यों की व्याख्या करने के लिए कहते हुए लिखा है कि आपकी इकाई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए और पर्यावरण मुआवजा क्यों नहीं लगाना चाहिए.

प्रदूषण बोर्ड के पर्यावरण इंजीनियर दिलीप कुमार द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजा गया था.

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ऐसे सामने आया मामला

बोकारो स्टील टाउनशिप में पिछले 48 दिनों में कचरे का उठाव नहीं होने के चलते यह मामला प्रकाश में आया. कूड़े के ढेर में बायो मेडिकल वेस्ट फेंका हुआ पाया गया.

इस मामले के संज्ञान में आने के बाद प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय निदेशक के नेतृत्व में एक टीम ने शहर में डम्प किए हुए कूड़े के ढेर का निरीक्षण किया.

नया मोड़ के किनारे कूड़े के ढेर में और कुछ अन्य जगहों पर भी प्रदूषण विभाग की टीम को बायो मेडिकल वेस्ट, जैसे- यूज किये हुए सिरिंज, सेलाइन और दवाइयों की खाली बोतलें मिलीं.

इसके अलावा टीम ने बीजीएच के पास एक गोदाम का भी निरीक्षण किया जहां बायो मैडिकल वेस्ट का स्टॉक पाया.

यहां पर यूज की हुई सिरिंज और सेलाइन की खाली बोतलों बोरे में रखी हुई मिलीं. कचरे के कारोबारी के अनुसार यह बायो मेडिकल वेस्ट उसे बीजीएच और शहर में कचरा चुनने वालों से मिलता है. उसे वह 15 रुपये किलो खरीदता है और आगे 20 रुपये किलो के हिसाब से बेच देता है.

प्रदूषण विभाग की टीम ने यह रिपोर्ट बोर्ड को प्रस्तुत की है, जिसके बाद कारण बताओ जारी किया गया है.

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किन संस्थानों को जारी किया गया नोटिस

जिन संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है उनमें बोकारो जनरल हॉस्पिटल (बीजीएच), कृष्णा नर्सिंग होम,  डॉ केके दास का सरजी सेंटर, आशादीप मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, श्री साई हॉस्पिटल, न्यू सेंट पॉल हेल्थवेअर्स और  प्रियदर्शनी क्लिनिक शामिल हैं.

बीजीएच इस ज़ोन का सबसे बड़ा है जो सेल के बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) का है.  बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के लिए 910 बेड वाले बीजीएच के परिसर में इंसीनेरेटर स्थापित है.  इसके बावजूद, बीजीएच का मेडिकल कचरे बाहर कैसे जाता है, इस पर अधिकारी गंभीर हैं.

एक दिन पहले, जिला स्वास्थ्य विभाग ने भी निरीक्षण कर टाउनशिप में बीएमडब्लू अधिनियम का उल्लंघन पाया था और सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजिकल लेबोरेटरी और डायग्नोस्टिक सेंटरों को नोटिस भेजे थे कि वे अपनाये गये डिस्पोजल सिस्टम के बारे में विवरण प्रस्तुत करें.

स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने राज्य मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी थी. स्वास्थ्य विभाग ने भी बीजीएच द्वारा उत्पन्न मेडिकल कचरे को बगल में स्थित कबाड़ी के गोदाम में पाया था.

स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए भी खतरा

बायो मेडिकल वेस्ट का इस तरह खुले में फेंका पाया जाना निवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा था. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में एक पत्र  का भी जिक्र है जिसमें बीजीएच अस्पताल के एक ज्वाइंट डायरेक्टर की मोहर और सिग्नेचर है. गोदाम मालिक इसी लेटर की आड़ में बायो मेडिकल वेस्ट का धंधा करता था.

अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में कचरे का उत्पादन होता है जो स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों का कारण बनता है. भारत सरकार ने बायोमेडिकल वेस्ट (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 1998 के नियमों को अधिसूचित किया.

इन नियमों को भारत सरकार द्वारा 28 मार्च, 2016 को संशोधित किया गया था. नये बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 में, पर्यावरणीय दृष्टि से बायोमेडिकल कचरे के संग्रह, अलगाव, प्रसंस्करण, उपचार और निपटान में और सुधार लाने के लिए कई बदलाव किये गये हैं.

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