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प्रतिमा पर पॉलिटिक्स : दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा पर सरयू की गुगली में फंसे रघुवर, भाजपा में ही खेमेबंदी

लगातार बदलती तस्वीरों में फिलवक्त झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास हिट विकेट होते दिख रहे हैं

Rakesh Ranjan

कहते हैं राजनीति बच्चों का खेल नहीं. राजनीति के खेल में वही टिक सकता है जो हरफनमौला हो. जितनी सधी बैटिंग हो, उतनी ही सधी बॉलिंग. राजनीति में रन बटोरने से लेकर विकेट चटकाने में माहिर सरयू राय ने एक बार फिर ऐसी गुगली फेंकी है कि रघुवर दास फंस गये. रघुवर दास को बैकफुट पर रखने के लिए सधी गेंद फेंकते रहनेवाले सरयू राय ने जमशेदपुर पूर्वी से तीन दफा भाजपा विधायक रहे दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा स्थापना के बहाने ऐसा दांव चला कि लगातार बदलती तस्वीरों में फिलवक्त रघुवर दास हिट विकेट होते दिख रहे हैं.
सरयू राय की पार्टी भारतीय जनतंत्र मोर्चा ने पहले दीना बाबा के नाम से मशहूर रहे दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा लगाने का ऐलान किया. फिर प्रतिमा स्थापना के लिए जगह की जानकारी साझा की गयी. अगली कड़ी में आदमकद प्रतिमा लाये जाने के साथ भूमिपूजन की तारीख की घोषणा हुई. भूमिपूजन का दिन आया तो ऐसा बखेड़ा खड़ा हो गया कि भूमिपूजन नहीं हो पाया. हालात के मददेनजर प्रशासन ने तय स्थल पर धारा 144 लगा दी है. दरअसल, भूमिपूजन में बाधा स्थानीय दुकानदारों के विरोध की वजह से आयी. गोलमुरी थाना इलाके में टिनप्लेट चौक पर संजय मार्केट परिसर को प्रतिमा स्थापना के लिए चुना गया था. मंगलवार को भूमिपूजन के कार्यक्रम के लिए सरयू की पार्टी के नेता व कार्यकर्ता पहुंचे तो एक खास व्यक्ति की अगुवाई में दुकानदारों ने विरोध करना शुरू कर दिया. दुकानदारों के विरोध के बाद हालात असामान्य होने की सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस दल पहुंचा. भूमिपूजन रोक दिया गया. दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा स्थापना में रोड़ा अटकाने का नया मसला ही अब सरयू बनाम रघुवर की बजाय भाजपा में ही खेमेबंदी का सबब बन गया है. कहने को रघुवर खेमे ने प्रतिमा स्थापना का विरोध नहीं किया. विरोध करनेवाले दुकानदार हैं. लेकिन विरोध की बाबत दुकानदारों का बयान ही यह बता गया कि विरोध की वजह विशुद्ध राजनीतिक है. दुकानदारों ने कहा कि दीनानाथ पांडेय के प्रति उनके दिल में भी बड़ा सम्मान है. वे भी चाहते हैं कि प्रतिमा लगे, लेकिन दूसरी जगह पर. अभी जहां प्रतिमा लगाने की बात है वहां दुकानदारों एवं ग्राहकों के वाहनों की पार्किंग होती है. पार्किंग की जगह छिन जाने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी.

विरोध के अगुवा अप्पा राव भाजपा के पदधारी एवं रघुवर के करीबियों में शुमार

Sanjeevani

मंगलवार को विरोध की अगुवाई अप्पा राव ने की. अप्पा राव की संजय मार्केट में बड़ी दुकान है. दुकान के आगे ही वह जगह है, जिसे दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा लगाने के लिए चुना गया था. अप्पा राव न केवल भाजपा के पदधारी हैं बल्कि उनकी गिनती रघुवर दास के चहेतों में होती है. मार्केट परिसर की खाली जगह पर अधिकतर भाजपाइयों की ही बैठकी लगती है. अप्पा राव की दुकानदारी के साथ राजनीति भी बगैर बाधा के चलती रहती है. प्रतिमा स्थापना के बाद अप्पा राव एवं रघुवर समर्थक भाजपाइयों की बैठकी छिन जायेगी. इस तरह सरयू खेमे का यह एक तीर से दो शिकार का दांव भी है.

सरयू ने प्रशासन के पाले में डाली गेंद

सरयू राय दीनानाथ पांडेय की प्रतिमा के लिए भूमिपूजन का विरोध एवं आयोजन टलने पर सधी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने गेंद को प्रशासन के पाले में डाल दिया. बकौल सरयू- प्रशासन मामले की जांच करेगा एवं फैसला लेगा.

दीना बाबा से छल एवं राजकीय सम्मान नहीं देने की फिर होने लगी चर्चा

बहरहाल, मंगलवार को हुए घटनाक्रम के बाद भाजपा से ही रघुवर दास पर अंगुली उठने लगी है. जमशेदपुर पूर्वी इलाके की बड़ी आबादी भी गुस्से में है. यह गुस्सा भी रघुवर दास की राजनीतिक सेहत के लिए ही घातक है. इस बात की कानोंकान चर्चा शुरू हो चली है कि दीना बाबा के साथ उनके जीते-जी रघुवर दास ने छल किया ही, मरने के बाद भी सम्मान का भाव नहीं दिखा. छल करके ही सिटिंग विधायक दीना बाबा को टिकट से वंचित कर रघुवर दास भाजपा के उम्मीदवार बने थे. पुराने भाजपाइयों के हवाले से यह बात चर्चा में तैर रही है कि टिकट तय करने को लेकर तय तरीकों के पीछे के छल को सीधे-साधे दीनानाथ पांडेय नहीं समझ पाये थे और बेटिकट हो गये थे. दीनानाथ पांडेय का जब निधन हो गया, तब संयोग से रघुवर दास ही झारखंड के मुख्यमंत्री थे. दीना बाबा को राजकीय सम्मान देने की मांग उठी, लेकिन रघुवर दास ने सम्मान देना गवारा नहीं किया.

दीना बाबा के पोते ने दिखाया आईना

प्रतिमा प्रकरण में सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रिया आ रही है. इसमें पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सरयू राय की ओर से छोड़ा गया रघुवर दाग, मोदी डिटर्जेंट, शाह लांड्री सरीखे जुमले का दोहराव है. लेकिन दीनानाथ पांडेय के पोते सिदधार्थ पांडेय का पोस्ट खास ध्यान खींच रहा है. यह पोस्ट यह साफ करने के लिए काफी है कि रघुवर सरयू की गुगली में किस कदर फंस गयें हैं.

हूबहू पढ लें सिदधार्थ पांडेय की पूरी पोस्ट.


“आदरणीय Raghubar Das जी मैंने तो आपको निजी तौर पे आमंत्रित किया था फिर आप अप्पा राव जी के थ्रू मूर्ति लगाने का विरोध क्यों करवा रहे है? भाजपा को जमशेदपुर में स्थापित करने वाले एक हिंदूवादी पुण्यात्मा से इतनी चिढ़? आपने बाबा को मरणोपरांत राजकीय सम्मान नही दिया. अब आदरणीय Saryu Roy जी जब मूर्ति लगवा रहे हैं. तो उसमें भी आपका विघ्न डालना क्या उचित है?? मैंने लोगों के लाख विरोध पर भी 2019 चुनाव में आपके लिए काम किया, वो भी राय जी के विरुद्ध. जबकि उनसे हमारे गांव से ही रिश्ता है. यहां जमशेदपुर से नहीं, जब आप चुनाव हार गए और किसी राष्ट्रीय पद पर नही थे और आपका कोई पदाधिकारी कोई कार्यकर्ता आपके समर्थन में नहीं लिख रहा था उस समय मैंने सोशल मीडिया (यथा शक्ति) आपके लिए मोर्चा संभाला था,और आप मेरे ही बाबा के मूर्ति के स्थापना में विघ्न डाल रहे है?? ये कैसी बात हुई? खैर मूर्ति तो लगेगी और वहीं लगेगी, आपको दोबारा मैं आमंत्रित करता हूँ, और अप्पा राव जी जब आप नाम के आगे भाजपा नेता लिखवाते है और जमशेदपुर में भाजपा को स्थापित करने वालो में से एक स्तम्भ की मूर्ति लगने में विघ्न डालते है तो आप हँसी के पात्र सा प्रतीत होते हैं !!

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