न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

राजनीतिक पार्टियां आदिवासियों के प्रति बदले अपना आचरण, नहीं तो किया जाएगा बहिष्कार – जाहेर अखड़ा

राजनीतिक पार्टियों द्वारा संताल आदिवासियों के पर्व में शुभकामनाएं नहीं दी जाती है.

228

Dumka : सोमवार को दिशोम मारंग बुरु युग जाहेर अखड़ा के बैनर तले ग्रामीणों द्वारा दुमका प्रखंड के लेटो गांव में कुल्ही दुरुप कर एक बैठक का आयोजन किया गया. बैठक का मुख्य मुद्दा यह था कि आए दिन राजनीतिक पार्टियों द्वारा बाजार में बड़े-बड़े होर्डिंग के माध्यम से हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई त्योहारों में शुभकामनाएं दी जाती है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों द्वारा संताल आदिवासियों के पर्व में शुभकामनाएं नहीं दी जाती है.

इसे भी पढ़ें : धनबाद के राधिका इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेशल एजुकेशन में नामांकन पर लगी रोक

निर्दलीय प्रत्याशी को देंगे वोट 

हाल ही में संताल आदिवासियों द्वारा बेलबोरोन पूजा मनाया जिसमें इष्ट देवता ठाकुर और ठकरन को प्रसन्न करने के लिए दशाय नृत्य किया जाता है. राजनीतिक पार्टियों द्वारा चौक-चौराहों में क्रिसमस, दुर्गा पूजा, दिपावली, छठ, चित्रगुप्त पूजा की शुभकामनाएं भरे होर्डिंग लगाये गये थे. लेकिन किसी भी राजनीतिक पार्टी द्वारा संतालो के बेलबोरोन पूजा की शुभकामनाएं भरा होर्डिंग नहीं लगाया गया. जबकि दुमका विधानसभा और दुमका संसद क्षेत्र आरक्षित(ST) सीट है. जहां एक ओर सभी राजनीतिक पार्टियां अपने आप को आदिवासी हितैषी बताती है. वहीं दूसरी ओर कोई राजनीतिक पार्टी आदिवासियों के पर्व में शुभकामनाएं नहीं देती है. ऐसी दोहरी नीति अब नहीं चलेगी. अखड़ा और ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां आदिवासियों के पर्व व पूजा में शुभकामनाएं नहीं दे सकते है, तो वे राजनीतिक पार्टियां आदिवासियों के हक और अधिकार की लड़ाई कैसे लड़ेगी ? इन पार्टियों को वोट देकर क्या फायदा होगा ? इससे तो अच्छा है किसी निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देकर विजय बनाया जाय.

इसे भी पढ़ें : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा ने किया ट्वीट, कहा – जन आरोग्य योजना लागू होने के एक…

राजनीतिक पार्टियां आदिवासियों के प्रति बदले अपना आचरण

अखड़ा और ग्रामीणों ने यह दुःख और आक्रोश भी व्यक्त किया कि देश की आजादी के 71 वर्ष बीत जाने के बाद भी आदिवासियों के पर्व में राजनीतिक पार्टियों द्वारा शुभकामनाएं नहीं मिलना यह बताता है कि अभी भी आम आदिवासी हाशिये में है. इन्हें जो मान और सम्मान राजनीतिक पार्टियों द्वारा मिलना चाहिए नहीं मिल रहा है. अखड़ा और ग्रामीणों द्वारा सरकार से भी यह मांग की गई कि पेपर व टीवी के मध्यम से भी सरकार आदिवासी पर्व व पूजा में बधाई दे. अखड़ा और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि अगर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के नेता आदिवासियों के प्रति अपना आचरण नहीं बदलते हैं. तो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी को वोट देकर विजय बनाया जायेगा.

इसे भी पढ़ें : सीबीआई ने अपने निदेशक आलोक वर्मा का किया बचाव, आरोपों को बताया दुर्भावनापूर्ण

इस बैठक में सुनील टुडू, मंगल मरांडी, झोमोन मरांडी, काहा मरांडी, दीवान टुडू, मंगल मुर्मू, बाबुराम मुर्मू, सोले मुर्मू, साहेब टुडू, सुलेमान मुर्मू, सोम किस्कू, गोपीन किस्कू, बाबुधन मरांडी, सोहराय टुडू, संतोष मरांडी, राजेश मुमु, रासमती किस्कू, मिनी मरांडी, एलेजाबेद हेम्ब्रोम, मोनिका हांसदा, अनिता टुडू, मर्शीला हेम्ब्रोम के साथ काफी संख्या में ग्रामीण महिला और पुरुष मौजूद थे.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: