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नीति आयोग की रिपोर्ट ने खोली झारखंड के विकास की पोल : झाविमो

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Chatra : झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि नीति आयोग द्वारा जारी डेल्टा रैकिंग ने झारखंड में विकास की पोल खोलकर रख दी है. विडम्बना देखिए, जिस दिन रघुवर सरकार अपने चार वर्षों के कार्यकाल में झूठे व कागजी विकास का बखान कर रही थी, उसी दिन नीति आयोग द्वारा जारी रैकिंग सरकार के उन तमाम दावों की हवा निकाल रही थी. नीति आयोग के अनुसार देश के कुल 111 आकांक्षी जिलों में झारखंड का पाकुड़ जिला सबसे निचले पायदान पर है.

यही नहीं, अंतिम 20 पिछड़ें जिलों में झारखंड के कुल सात जिले शुमार हैं. जिसमें चतरा नीचे से तीसरे, गिरिडीह चौथे, साहिबगंज आठवें, लातेहार नौवें, हजारीबाग दसवें और पश्चिमी सिंहभूम पंद्रहवें स्थान पर है.

सरकार को अपनी पीठ खुद थपथपाने में महारत हासिल

इस रैकिंग में पिछले वर्ष महज पांच जिले 20 अंतिम पिछड़े जिलों में शामिल थे. अब सवाल है कि अगर झारखंड सरकार थोड़ी भी विकास कर रही होती तो, इस बार अति पिछड़ें जिलों की संख्या पांच से कम होनी चाहिए या फिर बढ़कर सात हो जाएगी. आयोग ने यह रैकिंग स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं, कृषि और जल संसाधन जैसे छह क्षेत्रों में प्रदर्शन के आधार पर तैयार की है. अब तो डर यह भी लगता है कि कहीं केंद्र सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए राज्य सरकार इसको भी टाइपिंग मिस्टेक नहीं बता दे. दरअसल झारखंड की रघुवर सरकार को अपनी पीठ खुद थपथपाने में महारत हासिल है.

पिछले चार वर्षों में राज्य में विकास का एक भी ऐसा काम नहीं हुआ, जो स्मरणीय रखा जा सके. सरकार ने चार वर्षों तक केवल हवाबाजी की है. अपना चेहरा चमकाने के लिए सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई के 323 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिये. 2019 में जनता इस बैनर-पोस्टर वाली भाजपा सरकार को पूरी तरह उखाड़ फेंंकेगी.

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