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रांची में मीडियाकर्मियों पर हमले के दोषी पुलिसवालों को सख्त सजा दी जाये : जनहस्तक्षेप

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New Delhi : मानवाधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित संगठन जनहस्तक्षेप ने रांची में झारखंड स्थापना दिवस समारोह के दौरान मीडियाकर्मियों पर पुलिस के बर्बर हमले की तीखी निंदा की है. जनहस्तक्षेप के संयोजक ईश मिश्रा ने पुलिस की इस करतूत को समाचार माध्यमों की स्वतंत्रता का गला घोंटने के केंद्र और राज्यों की दक्षिणपंथी सरकारों के घिनौने प्रयासों की ताजा कड़ी बताया है. उन्होंने कहा कि इन मीडियाकर्मियों पर 15 नवंबर को पुलिस ने उस समय हमला किया, जब वे झारखंड स्थापना दिवस समारोह के दौरान पारा शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन का समाचार संकलित कर रहे थे. पुलिस के इस लाठीचार्ज में दर्जनों मीडियाकर्मियों को गंभीर चोटें आयी हैं. साफ तौर पर झारखंड की जनविरोधी भाजपा सरकार को यह गवारा नहीं था कि समय पर वेतन, तनख्वाह में बढ़ोतरी और नौकरी पक्की की जाने की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पारा शिक्षकों की आवाज दूर तक पहुंचे. लिहाजा पुलिसवालों ने खास तौर से छायाकारों को निशाना बनाया और उनके कैमरे छीन उनमें से आंदोलन की तस्वीरें डिलीट कर दीं.

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राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर ही किया गया यह हमला

ईश मिश्रा ने कहा कि झारखंड के मीडियाकर्मियों ने पुलिस की इस घोर निंदनीय कार्रवाई के विरोध में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भी सौंपा है. लेकिन, इस शर्मनाक घटना के तीन दिन बाद तक दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से स्पष्ट है कि यह हमला राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर ही किया गया था. प्रशासन और पुलिस की इस सरेआम गुंडागर्दी को मीडियाकर्मियों को डरा-धमकाकर आजाद समाचार माध्यमों के पंख कतरने के केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उनकी भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकारों के दीर्घकालीन अभियान का हिस्सा माना जाना चाहिए. इस अभियान में प्रलोभनों, धमकियों और फर्जी मामलों में फंसाने की कोशिशों के अलावा सरकारी मशीनरी और हिंदुत्ववादी गिरोहों के हमलों का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है.

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घटना की हो न्यायिक जांच, दोषी अधिकारियों व पुलिसवालों पर हो कार्रवाई

ईश मिश्रा ने कहा कि जनहस्तक्षेप सरकार प्रायोजित आतंक की इस घटना की न्यायिक जांच तथा दोषी अधिकारियों और पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पुरजोर मांग करता है. साथ ही, वह आम आदमी के सरोकारों को स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से अभिव्यक्त करने की मीडिया की आजादी का समर्थन करनेवाले तमाम व्यक्तियों और संगठनों से झारखंड के मीडियाकर्मियों के संघर्ष में उनके साथ खड़े होने की अपेक्षा करता है.

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