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डीजीपी का ‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ फेल, क्राइम के आंकड़ें बता रहे असलियत

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Ranchi: 16 जनवरी 2017 को झारखंड डीजीपी डीके पांडेय ने ‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ की शुरूआत की थी. राजधानी रांची के 20 मोहल्लों से शुरु हुए इस कार्यक्रम को लेकर डीजीपी डीके पांडेय ने कहा था कि आज का दिन रांची और झारखंड की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है. सुरक्षा की दृष्टि से यह पहल की गई है रांची और राज्य सुरक्षित होगा, तभी झारखंड विकास करेगा.

कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो लगा कि राजधानी में अपराध पर लगाम लगेगा. लेकिन मौजूदा वक्त में बढ़ते अपराध के आंकड़ें यही दर्शाते हैं कि ‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ विफल हो रहा है. अपराधियों के बढ़ते हौसलों से राजधानीवासियों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है.

क्या कहा गया था कार्यक्रम की शुरुआत के दौरान

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‘पुलिस आपके द्वार कार्यक्रम’ की शुरुआत करते हुए डीजीपी डीके पांडेय ने कहा था कि पुलिस अब हर मोहल्ले के लोगों के पास जाएगी, ताकि वे खुद को सुरक्षित समझें और भयमुक्त वातारण में रह सके. ये कार्यक्रम रांची और झारखंड की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है. उस समय के तत्कालीन एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा था कि पुलिस की यह महत्वाकांक्षी योजना है. इसके तहत पुलिस और पब्लिक मिलकर समस्याओं का समाधान करेगी. इसके लिए शक्ति कमांडो और बीट अफसर को ट्रेनिंग दी गई है. पुलिस व मोहल्ला समिति के साथ दोस्त बनकर अपराधियों में खौफ पैदा करेंगे.

नहीं हो रहा जनता के साथ दोस्ताना व्यवहार

तत्कालीन एसएसपी कुलदीप द्विवेदी ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे जनता के साथ कैसे दोस्ताना व्यवहार करेंगे, और उनकी समस्याओं को हल करने की कोशिश करें. आज पुलिस की कार्यशैली में बदलाव समय की मांग है. लेकिन वर्तमान में स्थिति है कि जनता को एफआईआर कराने के लिए भी थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं. अक्सर थानों से लोगों को बहाने बनाकर भगा दिया जाता है.

स्कूल-कॉलेज के सामने कभी-कभार ही देखेते हैं शक्ति कमांडोज

तत्कालीन एसएसपी ने कहा था कि महिला शक्ति कमांडो स्कूल-कॉलेज और मोहल्ले की लड़कियों-छात्राओं की दोस्त बनकर उनकी सुरक्षा करेगी. इसके लिए 47 बीट अफसरों, 40 शक्ति कमांडो और 10 महिला अफसरों को तीन दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. लेकिन वर्तमान में क्या हालत है कि स्कूल और कॉलेज के सामने कभी-कभी ही शक्ति कमांडोज को देखा जाता है.

मोहल्ला कमेटी के नाम पर दलाल हो गए सक्रिय

उस समय कहा गया था कि जनसहभागिता से प्रत्येक मोहल्ले में एक क्राइम कंट्रोल समिति बनाई जाएगी. इसमें आम लोगों के साथ बीट अफसर और शक्ति कमांडो के जवान जुड़ेंगे. डीएसपी स्तर के अधिकारी मोहल्ला समिति पर रखेंगे नजर. लेकिन वर्तमान में यह हालत है कि मोहल्ला कमेटी के नाम पर थाना क्षेत्र में दलाल सक्रिय हो गए हैं, जो पुलिस और जमीन माफियाओं के बीच सांठगांठ करवाने का काम कर रहे हैं.

पूर्व की कई योजना विफल

रांची जिले के 16 थाना क्षेत्रों में मोहल्ला समिति का गठन हुआ. समिति की ओर से मोहल्ले के ऐसे क्षेत्रों में सीसीटीवी लगाया जाएगा, जहां इसकी जरूरत है. मोहल्ला समिति का एक वाट्सएप ग्रुप होगा. इसमें वहां के गणमान्य लोगों के अलावा पुलिस के अफसर भी शामिल होंगे. मोहल्ले में पुलिस की ओर से पोस्ट बॉक्स लगाया जाएगा. इसमें जो शिकायतें आएंगी और उस पर गंभीरता से कार्रवाई होगी. मोहल्ला समिति चौकीदार को भी प्रतिनियुक्त करने का प्रयास करेगी. हर मोहल्ला समिति में चार से लेकर 15 सदस्य होंगे. लेकिन वर्तमान में अगर देखा जाए तो कुछ मोहल्ले में ही सीसीटीवी लगाया गया है. बाकी की जितनी भी योजना बनाई गई थी वह सारे पूरी तरह से विफल हो चुके हैं.

अपराधी बेलगाम, असुरक्षित लोग

राजधानी रांची में अपराधी बेलगाम हो गए हैं. हाल के दिनों में देखें तो जहां अपराधी दिनदहाड़े एक महिला पर एसिड से हमला कर रहे हैं, तो वहीं घर वाले को बंधक बनाकर लाखों की डकैती कर ले रहे हैं. दिनदहाड़े लोगों की हत्या कर दी जा रही है. पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, हाल के कुछ महीनों के आंकड़े को देखें तो सबसे ज्यादा चोरी, हत्या और किडनैपिंग के मामले सामने आए हैं. जिसके चलते लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है.

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