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DEOGHAR: डिजिटल लुटेरों पर पुलिस सख्त, 13 माह में 810 साईबर अपराधी गिरफ्तार

Ranchi/Deoghar: आज के डिजिटल युग जहां हमारे लिए काफी कुछ आसान कर दिया है. वहीं अपराधियों ने भी घर बैठे लोगों की जेब काटने के कई विकल्प साध रखे हैं. जामताड़ा के बाद झारखंड में देवघर जिले साईबर अपराधियों का हॉट स्पॉट बनकर उभरा है. हालांकि वहां पुलिसिया कार्रवाई भी सख्त है. पुलिस कई कुख्यात साईबर अपराधियों को सलाखों के पीछे धकेल चुकी है. पिछले तेरह महीने में देवघर जिले से पुलिस ने 810 साइबर अपराधी गिरफ्तार किया हैं. यह आंकड़ा जनवरी 2021 से जनवरी 2022 तक का है. इन साईबर अपराधियों के पास से 12 लाख रुपये भी बरामद किये गये है. इन तेरह महीने में पुलिस ने 128 मामले दर्ज किये है.

साईबर क्राइम का अहम हथकंडा फर्जी सिम

इन तेरह माह में देवघर पुलिस ने 2173 सिम कार्ड बरामद किये है. साइबरक्राइम का एक अहम हथकंडा फर्जी सिम बन चुका है. जिसमें गलत नाम पते पर खरीदे गए सिम कार्ड से फोन कर लोगों से खाता नंबर एटीएम पासवर्ड अपराधियों द्वारा मांगी जाती है और रुपए उड़ाए जाते हैं. कई लोग इसके शिकार हो चुके हैं.

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आरोपित फोटोशाप के माध्यम से फर्जी आधार कार्ड बना लेते है. जिसके आधार पर यह लोग मोबाइल सिम कार्ड लेते है. और विभिन्न बैंकों में खाते भी खुलवा लेते है. लोगों का डेटा एकत्र कर आरोपित उन्हें कॉल करते थे और लोन दिलाने और नया क्रेडिट कार्ड बनवाने का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते है. इसके अलावे देवघर पुलिस तेरह माह में 1376 मोबाइल फोन, 2173 सिम कार्ड, 506 एटीएम, 376 पासबुक, 92 चेक बुक, 20 लैपटॉप, 4 स्वाइप मशीनें, 4 राउटर, 39 मोटरसाइकिलें, 12 चारपहिया वाहन जब्त किये गये हैं.

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इन तरीकों से करते है ठगी

• गूगल पर विभिन्न प्रकार के वॉलेट एवं बैंक के फर्जी कस्टमर केयर नंबर के स्थान पर अपना फर्जी नंबर कस्टमाइज कर ग्रीन पेमेंट वॉलेट्स का हेल्पलाइन अधिकारी बनकर एमआई पे गूगल फॉर्म की सहायता से आम लोगों से गुप्त जानकारी प्राप्त कर ठगी करता था.
• बैंक के ग्राहकों को फर्जी बैंक अधिकारी बनकर आधार नंबर पैन नंबर लिंक कराने के नाम पर जानकारी मांगता था. जानकारी लेने के बाद ऑनलाइन अकाउंट खोलकर साईबर ठगी की अवैध राशि मंगवाता था.
• फोन पे कस्टमर को कैशबैक कारिक्वेस्ट भेज कर अन्य इ-वालेट जैसे पे यू मनी, फ्रीचार्ज, धानी पे तथा गेमिंग एप ड्रीम-11, स्कील कैश के माध्यम से साइबर ठगी करता था.
• फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक पदाधिकारी बनकर आम लोगों को एटीएम बंद होने एवं उसे चालू कराने के लिए सीरीज कॉल करता था. उसके बाद कस्टमर को झांसे में लेकर ओटीपी प्राप्त कर ठगी करता था.
• फोन पे, पेटीएम में पीड़ित का एटीएम कार्ड नंबर को ऐड मनी कर ओटीपी प्राप्त कर रुपये की ठगी करता था.
• टीम विवर एवं क्विक सपोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करवा कर पीड़ित के मोबाइल पर आये ओटीपी को अपने मोबाइल पर एक्सेस कर साइबर ठगी का काम करता था.

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ये हैं बचने की सेफ्टी टिप्स

• सतर्क रहें और अपने मोबाइल फोन की नेटवर्क कनेक्टिविटी के स्टेटस के बारे में जानकारी रखें. अगर आपको पता चलता है कि लंबे समय से आपको कोई कॉल या एसएमएस नोटिफिकेशन नहीं मिल रहे हैं, तो कुछ गलत हो सकता है. ऐसी स्थिति में आपको मोबाइल ऑपरेटर के साथ पूछताछ करके यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं आप धोखाधड़ी का शिकार तो नहीं हुए हैं.
• कुछ मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर्स ग्राहकों को सिम स्वैप को लेकर अलर्ट करने के लिए एसएमएस भेजते हैं. जिसका मतलब है कि आप कार्रवाई कर सकते हैं और इस फ्रॉड को होने से रोक सकते हैं. इसके लिए आपको तुरंत अपने मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करना होगा.
• अपने फोन पर लगातार अनजान कॉल्स आने की स्थिति में अपने फोन को स्विच ऑफ नहीं करें, केवल उनका जवाब न दें. यह आपको झांसे में फंसाने का तरीका हो सकता है कि आप अपने फोन को बंद या साइलेंट पर रख दें, जिससे आपको यह न पता चले कि आपके फोन की कनेक्टिविटी के साथ छेड़छाड़ की गई है.
• अलर्ट के लिए रजिस्टर करें, जिससे अगर आपके बैंक अकाउंट पर कोई एक्टिविटी होती है, तो आपको अलर्ट मिल जाए.
• हमेशा अपने बैंक स्टेटमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री को नियमित तौर पर चेक करें, जिससे आपको कोई गड़बड़ी को पहचानने में मदद मिल सके.

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