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छोटे-छोटे अफीम तस्करों को गिरफ्तार कर पुलिस थपथपा रही है अपनी पीठ

बड़े माफिया पर कार्रवाई करने की हिमाकत नहीं जुटा पाती है पुलिस

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Khunti: झारखंड के खूंटी में लंबे अरसे से अफीम की खेती हो रही है. हाल के दिनों में इसमें और तेजी आयी है. अफीम की खेती को कहीं-न कहीं से बड़े माफियाओं को संरक्षण प्राप्त है. जहां एक तरफ पुलिस छोटे-छोटे अफीम तस्करों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस अफीम की खेती के पीछे शामिल बड़े माफियाओं पर कार्रवाई करने की हिमाकत नहीं कर पा रही है. जिसके चलते खूंटी जिला में धड़ल्ले से अफीम की खेती हो रही है. पहले तो अफीम की खेती वैसे जगहों में होती थी जहां सुनसान एरिया होता है, पहाड़ों से घिरा हुआ क्षेत्र, लेकिन अब स्थिति बदल गयी है. अब तो खूंटी के अधिकतर गांव में लोग धड़ल्ले से अफीम की खेती कर रहे हैं.

इन इलाकों में हो रही है अफीम की खेती

खूंटी जिला के मुरहू, अड़की, सायको, खूंटी, बदगांव क्षेत्र के घाघरा, खतंगा, गुटी, बर्जू, बारी, आडा, किताआतू, डिग्री, सुली, तिलना, गड़ीगांव, सोहदाग जैसे कई गांवों में अफीम की खेती की जा रही है. बता दें कि यह सभी क्षेत्र खूंटी मुख्यालय से महज 5 से 10 किलोमीटर के दूरी पर स्थित है. इसके बावजूद भी इन सभी क्षेत्रों में धड़ल्ले से अफीम की खेती की जा रही है.

अफीम की खेती के पीछे बड़े माफिया का हाथ

अफीम मुक्ति अभियान से जुड़े खूंटी के मंगल सिंह मुंडा बताते हैं कि खूंटी में हो रहे धड़ल्ले से अफीम की खेती के जहां पीछे बड़े माफिया का हाथ है. वहीं कुछ कुछ क्षेत्रों में नक्सलियों के द्वारा भी अफीम की खेती करवाई जा रही है. पिछले 2 साल में देखें तो खूंटी जिला में नक्सली कमजोर पड़ गया है जिसके चलते अफीम की करवाने में नक्सली संगठन की भागीदारी कम हो गई है.हालांकि कुछ क्षेत्रों में नक्सलियों के द्वारा अफीम की खेती करवाए जाने की सूचना मिली है लेकिन अधिकतर क्षेत्रों में अफीम की खेती करवाने के पीछे बड़ा माफिया का हाथ है.

प्रलोभन देकर किसानों से करवाया जाता है अफीम की खेती

खेत मालिकों को अफीम की खेती के लिए पैसे अफीम माफिया मुहैया करवाते हैं. साथ ही अफीम की फसल की निगरानी से लेकर पुलिस प्रशासन को मैनेज करने की भी जिम्मेदारी खुद अफीम माफिया अपने ऊपर लेते है. अफीम माफिया किसानों को मोटी रकम का प्रलोभन देकर इसकी खेती से करवाते हैं. किसान भी कम आमदनी में अधिक मुनाफा को देखते हुए अफीम की खेती करने को राजी हो जाते हैं. अफीम की खेती सितंबर से अक्टूबर के बीच प्रारंभ हो जाती है. मार्च से अप्रैल तक अफीम तैयार हो जाता है. अफीम की खेती तैयार होने के बाद अफीम माफिया किसानों कुछ रुपया देकर सारा माल बेच देते है.

बड़े माफियाओं के संरक्षण में हो रही है अफीम की खेती

खूंटी जिले में अफीम की खेती बड़े अफीम माफिया के संरक्षण में फल फूल रहा है. बड़े अभी माफिया पर्दे के पीछे रहकर अफीम की खेती करवा रहे हैं. पुलिस भले ही छोटे तस्करों को पकड़ कर अपनी वाहवाही लूट रही है, लेकिन हकीकत तो यह है कि खूंटी में हो रहे अफीम की खेती के पीछे जिन बड़े माफियाओं का हाथ है उनको पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाती है.

पुलिस नहीं करती है बड़ी कार्रवाई

मिली जानकारी के अनुसार खूंटी जिले में हो रही अफीम की खेती में पुलिस बड़ी कार्रवाई नहीं करती है. मिली जानकारी के अनुसार बड़े अफीम माफियाओं और पुलिस की मिलीभगत से भी अफीम की खेती फल फूल रहा है. खूंटी जिले में लगभग 70 प्रतिशत अफीम की खेती हो चुकी है.

दिल्ली, पंजाब, बंगलादेश में होती है सप्लाई

मिली जानकारी के अनुसार अफीम खूंटी के आसपास जिलों से अफीम बंग्लाेदेश, नेपाल, दिल्ली, पंजाब और कोलकता भेजा जाता है. पिछले साल इस क्षेत्र में अफीम की जबरदस्त खेती हुई थी. करीब चार हजार करोड़ रुपये का धंधा अफीम से हुआ था. किसानों को अधिक आमदनी चाहिए और अफीम माफिया को खेत. जिसके चलते भले से अफीम की खेती फल फूल रहा है.

सैकड़ों एकड़ जमीन पर हो रही है अफीम की खेती

बता दें कि झारखंड में माओवादियों के सघन प्रभाव वाले इलाकों में सैकड़ों एकड़ जमीन पर अफीम की खेती हो रही है. नक्सलियों के संरक्षण में ड्रग्स माफिया कई वर्षों से अपनी अफीम की खेती कर रहे हैं. कई बार यह बात सामने आ चुकी है. मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के मोहनिया और सासाराम के भूमिगत हेरोइन कारखानों को कच्चे माल की आपूर्ति झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों से होती है. नक्सली गांव किसानों से अफीम की खेती करवाते हैं और उसे ब्राउन शुगर में में बदल कर ड्रग माफिया को दे देते हैं.

अफीम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40 लाख रुपए प्रतिकिलो तक है

खूंटी में हजारों एकड़ में अफीम माफिया के संरक्षण में अफीम की खेती हो रही है.इसका हर कुछ बिकने वाला होता है. पोस्ता दाना से लेकर डंठल और कण तक. एक एकड़ जमीन में करीब चालीस किलो अफीम की पैदावार होती है. स्थानीय बाजार में प्रतिकिलो चालीस हजार रुपए से लेकर 15 लाख रुपए तक इसकी कीमत लगाई जाती है. जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40 लाख रुपए प्रतिकिलो तक इसकी कीमत हो जाती है.

पुलिस मूकदर्शक बनी नहीं रहेगी

खूंटी एसपी आलोक कहते हैं कि खूंटी जिले में हो रही अफीम की खेती को लेकर पुलिस मूकदर्शक नहीं बनी रहेगी. इसके पीछे जो भी रहेंगे वह बख्शे नहीं जाएंगे पुलिस उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी.

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