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Police Housing Colony : कौन है ये जीएस कंस्ट्रक्शन, जो जीएम और सीएनटी लैंड पर बसा रहा दिग्गजों का आशियाना

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Akshay/Pravin

Ranchi : यह बात समझी जा सकती है कि जिस सोसाइटी में किसी डीजीपी रैंक के अधिकारी का सपनों का महल बन रहा हो, तो वो सोसाइटी कितनी खास होगी. डीजीपी के अलावा इस सोसाइटी में कई बड़े आईपीएस अधिकारियों के लिए भी आशियाना बनाया जा रहा है.

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जीएम लैंड को हथिया कर और बीच में आ रहे सीएनटी लैंड को औने-पौने दाम पर खरीद कर पुलिस हाउसिंग कॉलोनी बनायी जा रही है. खुद डीजीपी डीके पांडेय जिस जमीन पर अपना महल खड़ा कर रहे हैं, वो साफ तौर से एक ऐसे नेचर का जीएम लैंड है, जिसे ना तो खरीदा जा सकता है और ना ही बेचा जा सकता है.

इस सोसाइटी में सिर्फ एक ही जमीन पर विवाद नहीं है, बल्कि पूरे हाउसिंग कॉलोनी पर आरोप की झरी लगी है. जिस तरह से वहां सोसाइटी बसायी जा रहा है, उससे साफ तौर कहा जा सकता है कि रैयतों को बेवकूफ बना कर मुट्ठी भर रकम देकर जमीन ले ली गयी.

इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कौन है वो जीएस कंस्ट्रक्शन जो इतनी बड़ा गड़बड़झाला कर सोसाइटी बना रहा है.

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खाकी के संरक्षण से मिली जीएस कंस्ट्रक्शन को हिम्मत

कहा जा रहा है कि जीएस कंस्ट्रक्शन का पूरा नाम गौरी शंकर कंस्ट्रक्शन है. जो अपने-आप को पुलिस का ही एक विभाग समझता है. क्योंकि साइट पर जिसने भी बोर्ड जीएस कंस्ट्रक्शन के लगे हैं, वो सभी के सभी बोर्ड पुलिस प्रतीक चिन्ह वाले ही बोर्ड हैं.

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हो भी क्यों ना जीएस कंस्ट्रक्शन को पुलिस की तरफ से पूरा संरक्षण जो मिला हुआ है. पुख्ता सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक संरक्षण देने में सबसे आगे एक एसपी रैंक के अधिकारी हैं. वो फिलहाल एक सेंटिंग पोस्ट में हैं.

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वहीं इस कंपनी का एक और एसपी रैंक का संरक्षण फिलहाल एक उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में तैनात है. उनकी खासियत उनकी लंबाई है. जितना ऊंचा कद है इनका, उतनी ही पहुंच भी. कहा जाता है एक पूर्व मंत्री से भी इस एसपी के काफी अच्छे संबंध हैं. जिनसे इन्हें काफी हद तक राजनीतिक फायदा भी मिलता है.

ऐसे में जब दो-दो एसपी का संरक्षण और पूर्व डीजीपी का घर बसाने का जिम्मा इस कंपनी को मिला हो, तो भला कैसे वो अपने आप को पुलिस विभाग का ही एक अंग क्यों ना माने.

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जिस सीओ ने की जीएम लैंड की बंदोबस्ती, उनपर पहले से ही चल रही है जांच

जिस वक्त यह जमीन की बंदोबस्ती हुई, उस वक्त कांके अंचल के सीओ प्रभात कुमार थे. प्रभात कुमार पर गलत जाति प्रणाम देकर नौकरी लेने जैसे गंभीर आरोप है. सरकार की तरफ से प्रभात कुमार पर गलत जाति प्रमाण देने को लेकर जांच चल रही है.

इधर इस बीच इन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने गलत तरीके से पूर्व डीजीपी डीके पांडेय समेत कई लोगों के लिए एक ऐसे जीएम लैंड की बंदोबस्ती कर दी है, जिसे ना ही किसी को खरीदने का अधिकार है और ना ही बेचने का.

न्यूज विंग से बात करते हुए तत्कालीन सीओ प्रभात कुमार ने कहा कि उस वक्त क्या हुआ था ठीक से याद नहीं है. कागजात देखने के बाद ही इस मामले पर कुछ कहा जा सकता है. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि डीजीपी जैसे बड़े अधिकारी की पत्नी का म्यूटेशन क्या सच में भूल जाने जैसी बात है. वो भी तब जब वो निश्चित तौर पर विवादित हो.

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