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18 राज्य व एक केंद्र शासित प्रदेश में बना पुलिस एक्ट, झारखंड में अभी तक कवायद नहीं

Chandi Dutta Jha

Ranchi:  प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ 2006 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद कई राज्यों में नया पुलिस अधिनियम या संशोधित अधिनियम बनाया गया. लेकिन झारखंड में अबतक पुलिस अधिनियम को लेकर कवायद नहीं की गयी है.

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कॉमनवेल्स ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई) द्वारा आकलन 2020 में यह बताया गया है. सीएचआरआई के अनुसार 18 राज्यों में पारित किया गया. जबकि एक केन्द्र शासित राज्य चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस अधिनियम 2007 को 2010 में अपनाया गया, अरुणाचल प्रदेश में पुलिस विधेयक मसौदा तैयार लेकिन पटल पर नहीं रखा गया. गोवा में नये सिरे से मसौदा तैयार किया जा रहा है. ओडिशा में 2015 में विधानसभा से पास होने के बाद राज्यपाल के पास भेजा गया, लेकिन राज्यपाल ने विधानसभा को वापस कर दिया. पश्चिम बंगाल में मसौदा तैयार होने के बाद पटल पर नहीं रखा गया. हालांकि झारखंड में नये पुलिस अधिनियम का ड्राप्ट बनाकर विभाग स्तर से सरकार को सौपा गया है. लेकिन इसको अंतिम रुप अबतक नहीं दिया गया है. झारखंड के अलावे अन्य पांच राज्य तेलंगाना, मणिपुर, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व नागालैण्ड में भी नया पुलिस अधिनियम नहीं बनाया गया है. जबकि अण्डमान और निकोबार, दमन और दीव, दादर और नगर हवेली, पुडुचेरी, दिल्ली व लक्षद्वीप जैसे केन्द्र शासित प्रदेशो में भी नये सिरे से इसका निर्माण नहीं किया गया है.

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अंतिम निर्णय आना बाकी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड में भी सरकार ने पुलिस सुधारों को लेकर तैयारियां की थी. अधिकारियों की माने तो पूर्व में भी झारखंड में पुलिस एक्ट बनाने की पहल हुई थी, लेकिन कुछ त्रुटियों के कारण इसमें सुधार के लिए फाइल पुलिस मुख्यालय को लौटा दी गई थी. इसके बाद सुधार के साथ मंतव्य सरकार को सौंपा गया. लेकिन इसपर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है.

इन राज्यों में है नया पुलिस अधिनियम

सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्णय के बाद पारित किए गए पुलिस अधिनियम/संशोधित अधिनियम का निर्माण 18 राज्यों व 1 केन्द्र शासित प्रदेशों में किया गया है. जिसमें असम, आन्ध्र प्रदेश, उत्तराखण्ड, कर्नाटक, केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, मिज़ोरम, मेघालय, राजस्थान, सिक्किम, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश का नाम शामिल है. जबकि केन्द्र शासित प्रदेशों में चंडीगढ में नये पुलिस अधिनियम बनाये गए है.

राजनीतिक दबाब से बाहर पुलिस काम करे तभी जनता की भलाई : एमवी राव, पूर्व डीजीपी

एक ड्राप्ट बनाया गया था, जिसे सरकार को दिया गया. अब सरकार का काम है. क्या हुआ इसकी जानकारी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट का गाइडलाइन है, अमल करना है. हालांकि मामले का अंतिम निर्णय आना बाकी है, कई राज्यों ने पीटीशन डाला है. देश में पुलिस रिफार्म पर जितना काम होना चाहिए नहीं हुआ है. कोई सरकार नहीं चाहती पुलिस निष्पक्ष होकर काम करे, राजनीतिक दबाब से बाहर पुलिस काम करे तभी जनता की भलाई होगी.

क्या है मामला

पुलिस सुधार के लिए साल 2006 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. सरकार को नये सिरे से पुलिस सुधार से लिए पुलिस अधिनियम बनाने का निर्देश दिया, जब तक अधिनियम न बन जाये तबतक के लिए अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस सुधार से जुड़े सात निर्देश जारी किए.

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