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सीमा मिश्रा की कविता – एक अजन्मी  बेटी का डर

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एक अजन्मी  बेटी का डर

 

हे मां डर लगता है मुझे,

तुम्हारी उस दुनिया में आने से

मैंने सुना है तुम्हारी उस दुनिया में

हैं, कुछ हिंसक दानव रूपी मानव

पहले तो मैं थी बेताब

लेकिन अब डर लगता है बाहर आने से

हे मां कैसे दिखते हैं तुम्हारी दुनिया के दानव

क्या सच में क्रू दानव हैं तुम्हारी दुनिया में

क्या होगा मां मेरे आने से

क्या मेरा भी बलात्कार होगा

क्या मुझे भी तुम्हारी दुनिया के दानव जिन्दा जला देंगे

क्या मैं आने के बाद मार दी जाऊंगी

क्या तुम्हारी दुनिया के दानव में इंसानियत नहीं है

तो हे मां, मुझे रहने दो

अपने गर्भ में ही

मेरी ये दुनिया है,

बहुत ही प्यारी

यहां मूझे ना कोई मरेगा

ना बलात्कार करेगा, ना ही जलायेगा

हर पल तेरा साथ रहेगा….

 

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