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अजमल खां की कविता – लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं

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(फिलिस्तीन के महमूद दरवेश, कश्मीर के आगा साहिद अली और असम के मिया कवियों की कड़ी में)

लिख दो कि एक भारतीय हूं मैं

 

लिख दो

कि एक भारतीय हूं मैं

उसके नीचे लिखो

कि मेरा नाम अजमल है

एक मुसलमान हूं मैं

और भारतीय नागरिक

घर में हम सात जने हैं

सभी पैदाइशी भारतीय

क्या तुम्हें दस्तावेज़ चाहिये?

 

लिख दो

कि एक भारतीय हूं मैं

मैं एक मोपला हूं

मेरे पूर्वज अछूत थे

तुम्हारी भाषा में हिंदू

मनु के मुंह पर झापड़़ मार कर

नाम बदल लिये उन्होंने अपने

जब बख़्शी गयी उनको इज़्ज़त

शताब्दयों पहले

तुम्हारे विचारकों के

दादा-परदादाओं के जन्म से भी पहले

क्या कोई शक है तुम्हें?

 

लिख दो

कि एक भारतीय हूं मैं

मेरे पुरखों ने चलाया था हल इस मिट्टी में

यहीं रहते आये थे वे

और यहीं पर मर-खप गये

उनकी जड़ें कहीं ज्यादा गहरी हैं

बरगद और नारियल के इन पेड़ों की जड़ों से

यह बात अलग है कि भूस्वामी नहीं थे वे

साधारण किसान ही थे

यह मिट्टी ही उनकी जड़ है

उनकी जड़ की गंध ही सुगंध है इस मिट्टी की

उनकी चमड़ी का रंग ही

रंग है इस मिट्टी का

क्या तुम्हें दस्तावेज़ चाहिये?

 

लिख दो

कि एक भारतीय हूं मैं

क्या तुम्हें अभी और भी दस्तावेज़ चाहिये?

तो फिर मुझे खोदने होंगे कब्र मालाबार में

और बहुत-सी जगहों पर

मैं दिखाना चाहता हूं तुम्हें

बूटों और गोलियों के निशान उनके सीनों पर

जहां वे गिरे थे गोलियां खाकर अंग्रेज़ों की

क्या तुम्हें अब भी ज़रूरत है दस्तावेजों की?

मुझे मालूम है कि

कौन से दस्तावेज़ हैं ख़ुद तुम्हारे पास

सेलुलर जेल से लिखे गये माफ़ीनामे की प्रति

और

खून के छींटे गांधी के इन हाथों पर तुम्हारे

क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें

कुछ और भी याद दिलाऊं ?

मैं कहता हूं

भाड़ में जाओगे तुम

अगर फिर तुमने कोई दस्तावेज़ मांगा मुझसे तो।

 

लिख दो

कि एक भारतीय हूं मैं

याद रखो

भूला नहीं हूं मैं कि

तुमने ही भेजा था लोगों को

मस्ज़िद को गिराने के लिये

लेकिन आज तो

तुमने ध्वस्त कर दिया है संविधान को

इस धरती की आत्मा को

मैं क्षुब्ध हूं

हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी?

तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?

 

लिख दो

कि मैं एक भारतीय हूं

यह धरती मेरी है

अगर मैं पैदा हुआ हूं यहां

तो मैं दफ़्न भी होऊंगा यहीं पर

इसीलिये

लिख दो

बिल्कुल साफ़-साफ़

गाढ़े और बड़े-बड़े अक्षरों में

अपने एनआरसी के माथे पर

कि मैं एक भारतीय हूं।

 

(अंग्रेज़ी से अनुवाद- राजेश चन्द्र)

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