Opinion

HDIL के 2500 करोड़ लोन डूबने की वजह से संकट में आया PMC बैंक

Girish Malviya

PMC बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल वरयाम सिंह पहले HDIL ग्रुप में भी शामिल थे. उन्हीं ने ढाई हजार करोड़ रुपये का लोन PMC से HDIL को दिलवा दिया, HDIL दीवालिया हो गयी तो PMC बैंक का लोन भी डूब गया, जो अब तक उसने NPA में शो नहीं किया था. आरबीआई गाइडलाइंस के मुताबिक ऐसे मामलों में बैंक को लॉस का जिक्र करना चाहिए.

पीएमसी बैंक का कैश रिजर्व ही कुल 1,000 करोड़ रुपये का है, जबकि कंपनी पर उसका 2,500 करोड़ रुपये का लोन बकाया है. रिजर्व बैंक ने माना कि एचडीआईएल को दिया गया पूरा लोन ही एनपीए है. इसके बाद उसने बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया, लिहाजा लाखों जमाकर्ताओं के पैसे डूब गए….

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यह है PMC बैंक के डूब जाने की असलियत

लेकिन इसे आप शुरुआत ही मानिए.. आरबीआई के मुताबिक, PMC बैंक जैसे देश में कुल 1,542 अरबन कोऑपरेटिव बैंक हैं और हजारों की संख्या में ग्रामीण सहकारी बैंक है, पता नहीं किस बैंक में कितने गड़बड़ घोटाले चल रहे होंगे.

इस पूरे सबसे प्रकरण में सबसे बड़ी गलती रिजर्व बैंक की सामने आ रही है, आखिरकार रिजर्व बैंक कैसे इस बात की अनदेखी कर गया कि पीएमसी बैंक के अध्यक्ष वरियाम सिंह के माध्यम से एचडीआईएल समूह और बैंक के बीच घनिष्ठ संबंध था. जबकि RBI ने नए बैंकिंग लाइसेंस देने के बारे में कड़े कदम उठाए हैं.

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वैसे वरियाम सिंह का गहरा संबंध DHFL समूह से भी रहा है. 31 मार्च को समाप्त हुए चौथी तिमाही के रिजल्ट नोट में डीएचएफएल के चैयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर कपिल वाधवन कहा था कि मौजूदा हालात को देखते कंपनी के आगे चलने पर संदेह है.

DHFL समूह भी गहरे संकट में है और इस समूह द्वारा किया जाने वाला घोटाला देश का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा, ऐसा अनुमान पहले ही लगाया जा चुका है.

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चुनाव से कुछ महीने पहले पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल पर लगे 31,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की थी, यह मांग जर्नलिस्टिक स्टिंग ऑपरेशन के लिए जानी जाने वाली कोबरापोस्ट वेबसाइट द्वारा किये गए एक स्टिंग के तुरंत बाद की गयी थी…कंपनी पर आरोप था कि उसने 97000 करोड़ रुपये के कुल बैंक लोन में से 31000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल मुखौटा कंपनियों कर्ज देने में किया.

यानी अभी तो यह शुरुआत ही है एक बात और गौरतलब है कि DHFL समूह की कई कंपनियों द्वारा भाजपा को करोड़ों रुपए चुनावी चंदा दिया गया है, कोबरापोस्ट की जांच में यह भी दावा किया गया है कि 2014 से 2017 के बीच, इन तीन कंपनियों ने अवैध रूप से भाजपा को लगभग 20 करोड़ रुपये का चंदा दिया.

दअरसल IL&FS का संकट खड़ा होने के बाद एनबीएफसी क्षेत्र और अब बैंक भी गहरे संकट में आ गए हैं. नकदी संकट के दबाव में DHFL और इंडियाबुल्स फाइनेंस समेत कई NBFC कंपनियों पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है, यह स्थिति अब विस्पोटक रूप अख्तियार कर रही है…

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(लेखक आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं)

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