Opinion

पीएम नरेंद्र मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा का इस्तीफा एक रहस्य

Girish Malvia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. प्रमुख सचिव यानि प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रधानमंत्री और सरकार के बीच की अहम कड़ी होता है. पीएमओ यानि प्रधानमंत्री कार्यालय में उसकी भूमिका सबसे अहम होती है.

प्रमुख सचिव पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय और मंत्रालयों के सचिवों के बीच समन्वय के लिए संपर्क का कार्य करता है. नृपेंद्र मिश्रा 28 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नियुक्त किए गए थे.

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कहा जाता है कि पीएम मोदी से नृपेंद्र मिश्रा के नाम की सिफारिश अमित शाह ने की थी. शाह जब यूपी प्रभारी थे तभी मिश्र से उनकी जान पहचान हुई थी.

नृपेंद्र मिश्रा 1967 बैच के उत्तरप्रदेश कैडर के अधिकारी हैं, यूपी काडर के आइएएस नृपेंद्र मिश्रा कभी मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह सरकार में प्रमुख सचिव रहे. रिटायर होने के बाद नृपेंद्र मिश्रा 2006 से 2009 के बीच ट्राई के चेयरमैन पद पर रहे थे.

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नियम के मुताबिक, ट्राई का चेयरमैन आगे चलकर केंद्र या राज्य सरकार में कोई पद धारण नहीं कर सकता था. यह नियम जब नृपेंद्र मिश्रा की राह में रोड़ा बना तो मोदी सरकार ने ट्राई एक्ट में अध्यादेश के जरिये संशोधन कर उनके प्रमुख सचिव बनने का रास्ता साफ कर दिया.

ट्राई चेयरमैन के रूप में श्री मिश्र ने दूरसंचार क्षेत्र की निविदाओं के लिए बहुस्तरीय निविदा प्रणाली की सिफारिश की थी, जिसे खारिज कर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने अपनी नीति लागू की. जो 2G घोटाले के रूप में सामने आई.

मिश्रा जी 2G स्पेक्ट्रम आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले की सुनवाई में दिल्ली की एक अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश हो चुके हैं.

बताया जाता है कि नृपेंद्र मिश्रा विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं. नृपेंद्र मिश्रा के बेटे साकेत मिश्रा की 2019 के लोकसभा चुनाव में श्रावस्ती सीट से लड़ने की चर्चा भी चली थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी उनके प्रमुख सचिव नियुक्त होने पर माना जा रहा था कि उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया जा सकता है. क्योंकि इस बार उन्हें प्रमुख सचिव बनाने के साथ कैबिनेट मंत्री की रैंक से भी नवाजा गया था.

केन्द्र की राजनीति में गहरी रुचि रखने वाले लोगो को नृपेंद्र मिश्रा का प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से इस प्रकार से इस्तीफा देना हजम नहीं हो पा रहा है.

लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनकी निजी राय है.

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