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टाइम मैग्जीन के कवर पर पीएम मोदी की फोटो, लिखा, इंडियाज डिवाइडर इन चीफ

टाइम मैग्जीन में प्रकाशित लेख में पीएम मोदी को लेकर फील गुड फैक्टर गायब है. पत्रिका द्वारा पीएम मोदी की इस फोटो के साथ दि‍या गया शीर्षक विवाद पैदा कर रहा है.

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NewDelhi : अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैग्जीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया का डिवाइडर इन चीफ करार दिया है. बता दें कि मैग्जीन ने मोदी की तस्वीर कवर फोटो के रूप में प्रकाशित करते हुए इंडिया का डिवाइडर इन चीफ का टैग लगाया है. टाइम मैग्जीन में प्रकाशित लेख में पीएम मोदी को लेकर फील गुड फैक्टर गायब है. पत्रिका द्वारा पीएम मोदी की इस फोटो के साथ दि‍या गया शीर्षक विवाद पैदा कर रहा है.   लोकसभा चुनाव के बीच इस  टाइम मैग्जीन की तस्वीर और खबर को लेकर विवाद होने की आशंका है.   मैग्जीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडिया का डिवाइडर इन चीफ यानि भारत को बांटने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया गया है.

पीएम मोदी पर लिखे आर्टिकल में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का हवाला दिया गया है.  लेखक के अनुसार भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति के कारण वोटरों का ध्रुवीकरण हो रहा है.  आर्टिकल की शुरुआत में ही लिखा गया है कि महान लोकतंत्रों का पापुलिज्म की तरफ झुकाव, भारत इस दिशा में पहला लोकतंत्र होगा. कवर स्टोरी का शीर्षक है, क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को फिर पांच साल के लिए भुगतेगा? स्टोरी के लेखक आतिश तासीर लोकतंत्रों में बढ़ते पॉपुलरिज्म की बात करते हैं.  वे तुर्की, ब्राजील, ब्रिटेन और अमेरिका का भी हवाला देते हैं.

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  गुजरात दंगों के समय मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप

आर्टिकल में कहा गया है, पॉपुलिज्म ने बहुत से लोगों में शिकायत की भावना को भी आवाज दी है,  जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है. आर्टिकल में 2014 के चुनाव के बाद पीएम मोदी को लेकर आलोचनात्मक रुख दिखाई देता है.  इसमें लि‍खा गया   है कि आजाद भारत की धर्मनिरपेक्षता, उदारवाद और स्वतंत्र प्रेस जैसी उपलब्धियां ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे वे किसी षड्यंत्र का हिस्सा हों. आर्टिकल में साल 2002 के गुजरात दंगों के समय नरेंद्र मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया गया है. साथ ही उन्हें भीड़ का दोस्त करार दिया गया है.

आर्टिकल में गाय के मामले में भीड़ हिंसा को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठाये गये हैं.   लेखक ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के विचार और मोदी के शासनकाल में प्रचलित सामाजिक तना’ की तुलना की है.  बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब मैग्जीन ने नरेंद्र मोदी की आलोचना की है.  इससे पहले साल 2012 में भी टाइम मैग्जीन ने नरेंद्र मोदी को विवादास्पद, महत्वाकांक्षी और एक चतुर राजनेता माना था.

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