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पीएम मोदी के मन की बात :  कश्मीर में नफरत फैलाने,  विकास को  बाधित करने वाले सफल नहीं होंगे  

NewDelhi : प्रधानमंत्री  मोदी ने आकाशवाणी पर प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में रविवार को कश्मीर के लोगों के विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए बेताब होने का जिक्र किया.  कहा कि विकास की शक्ति, बम-बंदूक की शक्ति पर हमेशा भारी पड़ती है और जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, अवरोध पैदा करना चाहते हैं, वो कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते.

इस क्रम में प्रधानमंत्री ने जून महीने में जम्मू कश्मीर में आयोजित गांव की ओर लौट चले’ जैसी ग्रामीण सशक्तिकरण पहल का जिक्र किया.  उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम कोई सरकारी खानापूर्ति नहीं था कि अधिकारी दिन भर गांव में घूमकर वापस लौट आयें, बल्कि इस बार अधिकारियों ने दो दिन और एक रात पंचायत में ही बिताई. सब जगह ग्रामीणों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया, इसमें उन गांवों के लोग भी शामिल हुए जो बेहद संवेदनशील और दूरदराज के इलाकों में स्थित हैं.  सरकारी अधिकारी स्थानीय लोगों के साथ विकास योजनाओं पर चर्चा करने के लिए गांव गांव पहुंचे थे.

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अनंतनाग जिले के अति संवेदनशील इलाके में अधिकारी  पहुंचे

जिन अधिकारियों को कभी गांव वालों ने देखा तक नहीं था, वो खुद चलकर उनके दरवाजे तक पहुँचे ताकि विकास के काम में आ रही बाधाओं को समझा जा सके, समस्याओं को दूर किया जा सके. प्रधानमंत्री ने कहा, ये अधिकारी उन सीमावर्ती पंचायतों तक भी पहुंचे, जो हमेशा सीमा पार से होने वाली गोलीबारी के साये में रहती हैं.  यही नहीं शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग जिले के अति संवेदनशील इलाके में भी अधिकारी बिना किसी भय के पहुंचे. मोदी ने कहा कि पहली बार, वरिष्ठ अधिकारी 4,500 से अधिक पंचायतों में ग्रामीणों की दहलीज पर पहुंचे.

प्रधानमंत्री ने कहा, ऐसे कार्यक्रम और उसमें लोगों की भागीदारी ये बताती है कि कश्मीर के हमारे भाई-बहन सुशासन चाहते हैं.  इससे यह भी सिद्ध हो जाता है कि विकास की शक्ति, बम-बंदूक की शक्ति पर हमेशा भारी पड़ती है. उन्होंने कहा, ये साफ है कि जो लोग विकास की राह में नफरत फैलाना चाहते हैं, अवरोध पैदा करना चाहते हैं, वो कभी अपने नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सकते.

पीएम ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत यह जानने का भी प्रयास किया गया कि लोगों तक सरकारी सेवाएं पहंचती भी हैं या नहीं? पंचायतों को कैसे और मजबूत बनाया जा सकता है ? उनकी आमदनी को कैसे बढ़ाया जा सकता है ? उनकी सेवाएं सामान्य मानवी के जीवन में क्या प्रभाव पैदा कर सकती हैं ? उन्होंने कहा कि गांव वालों ने भी खुलकर अपनी समस्याओं को बताया,  साक्षरता, लिंग अनुपात, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, बिजली, पानी, बालिकाओं की शिक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के प्रश्न, ऐसे कई विषयों पर भी चर्चा हुई.

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 तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा पूरी कर चुके हैं

प्रधानमंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि एक जुलाई से शुरू होने के बाद तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री अमरनाथ यात्रा पूरी कर चुके हैं और तीर्थयात्रियों का आंकड़ा साल 2015 में 60 दिनों में तीर्थयात्रा करने वाले कुल तीर्थयात्रियों को पीछे छोड़ चुका है. प्रदेश के लोगों की आदर सत्कार भावना की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे राज्य में पर्यटन में वृद्धि होगी.

उन्होंने उत्तराखंड की चार धाम यात्रा का भी जिक्र किया जहां बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं और पर्यटकों ने पवित्र तीर्थस्थलों की यात्रा की है, उन्होंने बताया कि 2013 की विनाशकारी आपदा के बाद आठ लाख से अधिक लोग केदारनाथ मंदिर में दर्शन कर चुके है.  अपने 25 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोगों से 15 अगस्त को विशेष तैयारियों के साथ मनाने का आह्वान किया.

15 अगस्त को लोक उत्सव के रूप में मनायें

उन्होंने कहा, आपको अवश्य ही इस तथ्य पर विचार करना चाहिए कि 15 अगस्त को कैसे लोक उत्सव के रूप में और जनता के त्यौहार के रूप में मनाया जा सकता है. देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति पर प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र, राज्य सरकारों के साथ मिलजुलकर तेजी से काम कर रहा है ताकि लोगों को तुरंत राहत पहुंचायी जा सके.

उन्होंने साथ ही कहा कि जल संरक्षण के मुद्दे ने देश में हलचल पैदा कर रखी है. उन्होंने एक जल नीति तैयार करने के लिए मेघालय सरकार की सराहना की और साथ ही हरियाणा सरकार की भी प्रशंसा की जो किसानों को ऐसी फसलों की ओर उन्मुख कर रही है जिनमें पानी की कम जरूरत होती है.

चंद्रयान-2 ने श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष की ओर  कदम बढ़ाये

अंतरिक्ष की दृष्टि से 2019 भारत के लिए बहुत अच्छा साल रहा है. हमारे वैज्ञानिकों ने मार्च में A-SAT लॉन्च किया था और उसके बाद चंद्रयान-2. चुनाव की आपाधापी में उस समय ए-सेट जैसी बड़ी और अहम खबर की ज्यादा चर्चा नहीं हो पायी थी. जबकि हमने ए-सेट मिसाइल से महज तीन मिनट में, तीन सो किलोमीटर दूर सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता हासिल की है. उस उपलब्धि हासिल करने वाला भारत, दुनिया का चौथा देश बना. अब 22 जुलाई को पूरे देश ने गर्व के साथ देखा कि कैसे चंद्रयान-2 ने श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष की ओर अपने कदम बढ़ाये चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तस्वीरों ने देशवासियों को गौरव और जोश से, प्रसन्नता से भर दिया.

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