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पीएम मोदी ने इंजीनियर्स डे पर बिहार में सात परियोजनाओं का शिलान्यास किया

Patna :  इंजीनियर्स डे के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से बिहार में सात परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. उन्होंने इस अवसर को विशेष दिन बताया और कहा, आज हम इंजीनियर्स डे मनाते हैं. ये दिन देश के महान इंजीनियर एम विश्वेश्वरैया जी की जन्म-जयंती का है, उन्हीं की स्मृति को समर्पित है.

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जल आपूर्ति से जुड़ी चार और रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की एक परियोजना का शिलान्यास

आज प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया उनमें चार परियोजनाएं जल आपूर्ति से संबंधित हैं.इसके साथ ही साथ ही दो जल-मल शोधन संयंत्र व एक परियोजना रिवर फ्रंट डेवलपमेंट से संबंधित है. इन सभी परियोजनाओं की लागत 541 करोड़ रुपये है।प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गंगा के किनारे बसे जितने भी शहर हैं, वहां गंदे नालों का पानी सीधे गंगा में गिरने से रोका जाना चाहिए. इसके लिए अनेकों वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाए जा रहे हैं. आज जो बेऊर और करम-लीचक की योजना का उद्घाटन हुआ है, उससे इस क्षेत्र के लाखों लोगों को लाभ होगा. उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों का तो गंगा जी से बहुत ही गहरा नाता है. गंगा जल की स्वच्छता का सीधा प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ता है.

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बिहार के लिए छह हजार करोड़ की 50 परियोजनाएं स्वीकृत 

गंगा की स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ही बिहार में 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 50 से ज्यादा परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. अब केंद्र और बिहार सरकार के साझा प्रयासों से बिहार के शहरों में पीने के पानी और सीवर जैसी मूल सुविधाओं में निरंतर सुधार हो रहा है. मिशन अमृत और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बीते चार-पांच सालों में बिहार के शहरी क्षेत्र में लाखों परिवारों को पानी की सुविधा से जोड़ा गया है.उन्होंने कहा कि शहरीकरण आज के दौर की सच्चाई है. लेकिन कई दशकों से हमारी एक मानसिकता बन गई थी, हमने ये मान लिया था जैसे कि शहरीकरण खुद में कोई समस्या है, कोई बाधा है. लेकिन मेरा मानना है, ऐसा नहीं है. ऐसा बिलकुल भी नहीं है.

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बिहार आविष्कार और इनोवेशन का पर्याय

बिहार देश के विकास को नई ऊंचाई देने वाले लाखों इंजीनियर देता है. बिहार की धरती तो आविष्कार और इनोवेशन की पर्याय रही है. बिहार के कितने ही बेटे हर साल देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग संस्थानों में पहुंचते हैं, अपनी चमक बिखेरते हैं. बीते डेढ़ दशक से नीतीश जी, सुशील जी और उनकी टीम समाज के सबसे कमजोर वर्ग में आत्मविश्वास को लौटाने का प्रयास कर रही है. जिस प्रकार बेटियों की पढ़ाई को, पंचायती राज सहित स्थानीय निकाय में वंचित, शोषित समाज की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है. उससे उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है.

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