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कोलेबिरा विस सीट पर होनेवाले उपचुनाव में पीएलएफआई कर सकता है उलटफेर

Ranchi : कोलेबिरा विधानसभा सीट झारखंड पार्टी के सुप्रीमो सह कोलेबिरा के पूर्व विधायक एनोस एक्का को हत्या के मामले में सजा होने पर खाली हुई. उसी कोलेबिरा विधानसभा सीट पर होनेवाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलो में खास रुचि तो नहीं दिख रही है, फिर भी नेता अपने खास को चुनाव में लड़ाकर अपनी ताकत का अंदाजा लगा रहे हैं एवं चुनाव जीतने के जोड़-तोड़ में लग गये हैं. उपचुनाव के लिए हुए नॉमिनेशन की स्क्रूटिनी के बाद सातों उम्मीदवारों का नॉमिनेशन सही पाया गया. भाजपा ने बसंत सोरेंग को अपना उम्मीदवर बनाया है. बसंत सोरेंग केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किये गये विकास कार्य को भुनाने की कोशिश में लगे हैं. वहीं, झारखंड पार्टी ने अपनी सीट बचाने के लिए झामुमो का समर्थन पा लिया है. कांगेस ने नमन विक्सल कोंगाड़ी को अपना उम्मीदवार बनाकर उपचुनाव को रोचक बना दिया है. जबकि, आम आदमी पार्टी से जुड़े विनोद केरकेट्टा, प्यारा मुंडू, अनिल कंडुलना, बसंत डुंगडुंग निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में डटे हैं. इन सबके बीच जो एक नाम चर्चा का केंद्र बना हुआ है, वह है उग्रवादी संगठन पीएलएफआई. माना यह जा रहा है कि कोलेबिरा विधानसभा सीट पर होनेवाले उपचुनाव में पीएलएफआई प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई बड़ा उलटफेर कर सकता है, जो उपचुनाव के नतीजे पर असर डालेगा.

कोलेबिरा विस सीट पर होनेवाले उपचुनाव में पीएलएफआई कर सकता है उलटफेर
निर्दलीय उम्मीदवार विनोद केरकेट्टा.

क्या है इलाके में आम चर्चा

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कोलेबिरा विधानसभा क्षेत्र में हथियारबंद गिरोह पीएलएफआई का वर्चस्व रहा है. आज भी इस इलाके में हथियार लेकर घूमते लोग नजर आते हैं. ऐसे में चुनाव की हार-जीत में पीएलएफआई का सर्मथन महत्वपूर्ण माना जाता है. पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पीएलएफआई द्वारा एक उम्मीदवार के पक्ष में काम करने का मामला समाने आया था. सूत्रों की मानें, तो स्थानीय स्तर पर इसी क्रम में एक खास राजनीतिक दल को पीएलएफआई पर भरोसा है. संबंधित दल को लगता है कि पीएलएफआई प्रभावित विधानसभा सीट होने के कारण यहां बगैर पीएलएफआई की मदद के चुनाव की बिसात बिछाना संभव नहीं है. पीएलएफआई के आह्वान पर चुनाव को जीतना संभव हो सकता है और इसी क्रम में संबंधित दल पीएलएफआई के संपर्क में है.

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पारा शिक्षक हत्या मामले में एनोस को गंवानी पड़ी सीट

कोलेबिरा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक एनोस एक्का लगातार चुनाव जीतते रहे हैं. ग्रामीणों की मानें, तो वहां के हर घर में उनकी दस्तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद है. एनोस एक्का का नाम एक पारा शिक्षक मनोज की हत्या मामले में सामने आया. साथ ही, एनोस एक्का और पीएलएफआई सदस्यों में सांठगांठ की बातें भी समाने आ चुकी हैं. पारा शिक्षक हत्याकांड में एनोस एक्का को कोर्ट से सजा हो गयी और इसके बाद कोलेबिरा विधानसभा सीट से एनोस एक्का को अपनी विधायकी खोनी पड़ी.

झामुमो मेनन एक्का को समर्थन देने का कर चुका है एलान

कोलेबिरा विस सीट पर होनेवाले उपचुनाव में पीएलएफआई कर सकता है उलटफेर
मेनन एक्का.

कोलेबिरा विधानसभा सीट पर होनेवाले उपचुनाव में झामुमो ने एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का को समर्थन देने की घोषणा की है. ऐसे में झामुमो के कितने वोट झारखंड पार्टी को मिलेंगे, इसका दावा झामुमो के नेता भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि मेनन के समर्थन के बाद झामुमो के प्रखंड के कई पदाधिकारी नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं. ऐसे में झामुमो के हिस्से के वोट कांग्रेस या दूसरे निर्दलीय को जाने की गुंजाइश बढ़ गयी है. खड़िया आदिवासी बहुल इलाका होने के कराण चुनाव में खड़े उम्मीदवारों की प्राथमिकता है कि खड़िया मतों का ध्रुवीकरण किया जाये. इस उम्मीद में भाजपा ने भी खड़िया प्रत्याशी को ही उपचुनाव में उतारा है.

कांग्रेस भी नहीं दे सकी मजबूत उम्मीदवार

कांग्रेस उम्मीदवार विक्सल कोगाड़ी

झारखंड में जहां महागठबंधन की बात की जा रही थी, इस उपचुनाव में महागठबंधन नहीं दिखा. महागठबंधन का एक मजबूत धड़ा झामुमो ने झारखंड पार्टी उम्मीदवार को समर्थन दिया है. वहीं, झाविमो ने कांग्रेस को समर्थन देकर कांग्रेस का मनोबल ऊंचा रखने का काम किया है. वर्तमान हालात को देखते हुए कांग्रेस पार्टी भी मजबूत उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतार पायी.

एक के बाद एक पांच उपचुनाव में भाजपा रही फिसड्डी

बीजेपी उम्मीदवार बसंत सोरेंग

राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पांच विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए. इन पांचों उपचुनावों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है. वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में कुछ खास सीटों पर क्षेत्रीय दल ने अपना वजूद कायम रखा है, जिस कारण भाजपा को हार का समाना करना पड़ा है.

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