Khas-KhabarRanchi

2016 से डॉरमेट्री में दिन गुजारने को मजबूर प्लेयर्स, होटवार में 750 बेड के हॉस्टल निर्माण के लिए 8 महीनों से पड़े हैं 60 करोड़

10 करोड़ रुपये का भवन निर्माण विभाग ने नहीं दिया है UC

Ranchi: मिशन ओलंपिक के लिये तैयार किये जा रहे प्लेयर्स को डॉरमेट्री के भरोसे दिन बिताना पड़ रहा है. होटवार स्थित मुख्य ग्राउंड के एक रूम में बनी डॉरमेट्री ही चार सालों से उनका सहारा है. ऐसे हालात तब हैं जब उनके लिये हॉस्टल बनाये जाने का पैसा 8 महीने से पड़ा हुआ है. 60 करोड़ की लागत से 750 बेड का हॉस्टल तैयार किया जाना है. लेकिन सरकारी फाइलों में घुमती इस योजना के चलते प्लेयर्स को आगे भी लंबे समय तक डॉरमेट्री के सहारे ही समय काटना है.

इसे भी पढ़ेंः उपचुनाव : भगवान का आशीष लेकर BJP की लुईस मरांडी ने दुमका सीट से भर दिया पर्चा

advt

केंद्र ने दी है मदद

जनजातीय मंत्रालय ने ट्राइबल सब प्लान 2019-20 के तहत हॉस्टल बनाये जाने के लिये झारखंड को विशेष मदद दी है. पिछले साल 3 सितंबर को दिल्ली में केंद्र सरकार (मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स) और झारखंड (ट्राइबल वेलफेयर) के बीच बैठक हुई थी. राज्य की ओर से इसमें ट्राइबल वेलफेयर डिपोर्टमेंट के विशेष सचिव एक के सोरेंग, ब्रजेश कुमार लाल डिपार्टमेंट के कमिश्नर एस के सिन्हा शामिल हुए थे. बैठक में PAC (प्रोजेक्ट एप्रेजल कमिटी) ने झारखंड में हॉस्टल बनाये जाने सहित अलग-अलग कामों के लिये मदद देने पर सहमति जतायी थी.

मिल चुके हैं 10 करोड़

जेएसएसपीएस (झारखंड स्पोर्टस खेल प्रमोशन सोसाइटी) से मिली जानकारी के अनुसार, आदिवासी कल्याण मंत्रालय़, केंद्र सरकार ने हॉस्टल के लिये 60 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इससे 750 बेड का हॉस्टल बनाया जायेगा. इसके लिए होटवार में ही गर्ल्स हॉस्टल के पीछे 10 एकड़ जमीन को देखा जा चुका है. फिलहाल मंत्रालय से 10 करोड़ रुपये का आवंटन हो चुका है. इस पैसे का UC (उपयोगिता प्रमाण पत्र) भवन निर्माण ने अब तक जनजातीय मंत्रालय को नहीं दिया है. इसे जमा किये जाने के बाद ही इस दिशा में काम आगे बढ़ेगा. कोरोना आपदा के कारण भी योजना फंसी पड़ी थी.

इसे भी पढ़ेंः धनबाद में IPS और डॉक्टर के घर में हथियारबंद अपराधियों ने की लूटपाट

डॉरमेट्री में रहते हैं 231 लड़के

जेएसएसपीएस की तरफ से खेल एकेडमी का संचालन 2016 से किया जा रहा है. 8 से 12 साल के लगभग 450 बच्चों को होटवार में रखकर फ्री एजुकेशन दिया जाता है. साथ ही अलग-अलग खेलों में ट्रेनिंग भी दी जाती है. फिलहाल इनमें 231 लड़के और 206 लड़कियों को इसका फायदा मिलता है. होटवार के एकलव्य हॉस्टल में 206 गर्ल्स प्लेयर्स रहती हैं. पर 231 लड़कों को अभी भी बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम के डॉरमेट्री में रखा जाता है. जेएसएसपीएस की एकेडमी में पढ़ने और ट्रेनिंग करने वाले प्लेयर्स में से 60 फीसदी बच्चे एसटी कैटेगरी के हैं. हॉस्टल के अभाव में उन्हें लगातार चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है.

इसे भी पढ़ेंः जामताड़ा: कैसे गांववालों को मिलेगा हाई स्पीड इंटरनेट, जिले में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने का काम अब भी अधूरा

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: