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RIMS में प्लाज्मा डोनेशन की शुरुआत तो हुई पर मात्र 3 यूनिट ही प्लाज्मा हो सका है डोनेट, मशीन की कमी भी बन रही वजह

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♦अभी तक सात लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया,जिसमें 4 मिले अनफिट

♦A सिम्टोमेटिक मरीजों से नहीं लिया जाना है प्लाज्मा

Ranchi: प्लाज्मा डोनेशन की शुरुआत होने के बाद से रिम्स में मात्र तीन यूनिट ही प्लाज्मा डोनेट हो सका है. जिन सात लोगों को प्लाज्मा डोनेशन के लिए चिन्हित किया गया था, उनमें से मात्र तीन लोग ही प्लाज्मा डोनेट कर सके हैं.

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बाकि चार को अनफिट घोषित किया जा चुका है. चारों पैथोलॉजिकल रिपोर्ट के हिसाब से प्लाज्मा डोनेशन की रिक्वारमेंट को पूरा नहीं कर रहे थे. इसके अलावा वैसे मरीज, जिनमें कोरोना के लक्षण नहीं मिले थे, उनसे प्लाज्मा नहीं लिया जा सकता है. वहीं वैसी महिलायें जो मां बन चुकी हैं, वो प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकती हैं.

इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के पास प्लाज्मा डोनेट कराने के लिए मरीजों के आवेदन भी नहीं हैं. हालांकि मरीजों के ठीक होने के 15 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं. इसके अलावा गंभीर बीमारी के मरीज भी आवेदन नहीं कर सकते हैं. प्लाज्मा से सिरम बनाने की प्रक्रिया के बाद जिस मरीज को जरुरत पड़ती है, उससे प्लाज्मा के सैंपल का मिलान कराया जाता है. जिसके बाद ही उससे ट्रीटमेंट हो पायेगा.

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रिम्स में एकमात्र मशीन है जिससे दोनों काम हो रहा

दो यूनिट सिरम ही क्यों बन पाया इसे लेकर रिम्स ब्लड बैंक के एक स्टाफ ने बताया कि हमारे पास प्लेटलेट्स की अधिक डिमांड होती है. ऐसे वक्त में हम प्लाज्मा सेपरेशन का काम नहीं कर सकते हैं. राज्य के सबसे अस्पताल के ब्लड बैंक में एकमात्र मशीन है जिससे प्लाज्मा और प्लेटलेट्स दोनों निकाला जाता है.

उन्होंने बताया कि प्लाज्मा सेपरेशन में कम से कम दो घंटे का समय लगता है. ऐसे में सिर्फ एक मशीन के भरोसे प्लेटलेट्स और प्लाज्मा दोनों का काम नहीं कर सकते. स्वास्थ्य सचिव ने रिम्स प्रबंधन को मशीन की खरीदारी के लिए कहा था, उन्होंने साथ ही कहा था कि प्लाज्मा डोनेशन की मशीन खरीदारी के लिए रिम्स को स्वास्थ्य विभाग की अलग से अनुमति की जरुरत ही नहीं है.

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कब और कैसे दिया जा सकता है प्लाज्मा डोनेशन

-कोविड से ठीक होने के दो सप्ताह के बाद ही किसी का प्लाज्मा लिया जाएगा.

-55 साल से अधिक, सुगर, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी, गर्भवती महिलाएं प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते.

-एक बार में कम से कम 500 एमएल प्लाज्मा डोनेट किया जाना है, जिससे दो मरीजों के ट्रीटमेंट में मदद मिल सके.

-रिकवर हो चुके मरीज जो प्लाज्मा डोनेट करना चाहते हैं, उन्हें जरुरी सभी तरह के टेस्ट से गुजरना पड़ेगा.

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