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नियोजन नीति: रघुवर के समय में ही दलीलों को सुन हाइकोर्ट ने 22 जनवरी को रखा था फैसला सुरक्षित

भाजपा ने कहा, हेमंत सरकार ने नहीं किया IA दाखिल, सत्ता पक्ष में कहा, झारखंडी छात्रों के हित में सरकार जा रही सुप्रीम कोर्ट

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Ranchi  : रघुवर सरकार की नियोजन नीति-2016 को असंवैधानिक करार देते हुए पिछले दिनों हाइकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक नियुक्त हुए हजारों झारखंडी छात्र-छात्राओं के रोजगार पर ग्रहण लग गया है. वहीं नियोजन नीति के कोर्ट के फैसले बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है. इस बीच यह जानकारी मिली है कि पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के दौरान ही कोर्ट ने नियोजन नीति पर दायर याचिका पर पूरी सुनवाई की थी.

सुनवाई के बाद कोर्ट ने पिछले 22 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था. बीते सोमवार यानी 21 सितंबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. यानी हेमंत सरकार के समय कोर्ट ने केवल अपना फैसला सुनाया है. जबकि पूरी सुनवाई तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में ही हुई थी. हालांकि इस बीच हेमंत सरकार ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला कर लिया है.

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पक्ष-विपक्ष ने लगाया है आरोप

बता दें कि सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पार्टी ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर स्थानीय नीति के नाम पर झारखंडी छात्र-छात्राओं को धोखा देने का आरोप लगाया है. वहीं भाजपा का कहना है कि हाइकोर्ट में अपना पक्ष रखने में हेमंत सरकार ने गंभीरता नहीं दिखायी, जिससे इन छात्रों को आज परेशानी हुई है.

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला था सुरक्षित

 

बीते 22 जनवरी को ही हाइकोर्ट ने नियोजन नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तत्कालीन सरकार के महाधिवक्ता अजीत कुमार और प्रार्थी की दलीलों को सुना था. उसके बाद हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. फैसला को रिजर्व रखने से केवल 25 दिन पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. यानी कोर्ट ने अपना जो भी फैसला सुरक्षित रखा था, वह भाजपा सरकार की दलीलों को सुनने के बाद ही रखा था.

तत्कालीन महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि सरकार की ओर से बनी नियोजन नीति विधि सम्मत है. वहीं प्रार्थियों ने  कोर्ट को बताया था कि सरकार की बनायी नियोजन नीति असंवैधानिक और समानता के अधिकार के खिलाफ है. दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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सरकार को छात्र-छात्राओं की चिंता, तभी तो गयी है सुप्रीम कोर्ट :  सत्ता पक्ष

 

कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि चुनाव में मिली करारी हार से भाजपा अभी भी बाहर नहीं निकल सकी है. जेएमएम नेता विनोद पांडेय का कहना है कि सरकार अगर गंभीर नहीं होती, तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाती. झारखंड छात्र-छात्राओं के लिए हेमंत सरकार हर लड़ाई लड़ने का काम कर रही है. भाजपा का लगा आरोप पूरी तरह से निराधार है.

 

स्पेशल IA दाखिल कर हेमंत सरकार को रखना चाहिए था अपना पक्ष- प्रतुल

 

वहीं भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही लीलाराव V/S  स्टेट ऑफ आंध्र मामले में फैसला आने तक हाइकोर्ट ने केवल अंतरिम स्टे लगाया था. हाइकोर्ट का कहना था कि लीलाराव मामले में जो भी फैसला आएगा, उससे नियोजन नीति का फैसला प्रभावित होगा. जब फैसला आया तो हेमंत सरकार को स्पेशल आइए दाखिल कर कोर्ट को बताना चाहिए कि दोनों मामले अलग-अलग है. लेकिन राज्य सरकार ने इसपर कोई पहल नहीं की.

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