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नियोजन नीति : भाजपा का आरोप- हाइकोर्ट में अपना पक्ष रखने में राज्य सरकार ने नहीं दिखायी गंभीरता

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Ranchi : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में 2016 में लागू नियोजन नीति को असंवैधानिक बताया है. सीएम हेमंत सोरेन ने इस पर कहा था कि पिछली सरकार के कार्यों ने गंदगी फैला रखी थी. इसके बहाने से राज्य को दो हिस्सों में बांटने की साजिश थी. प्रदेश भाजपा ने सीएम के इस बयान पर कहा है कि राज्य सरकार कायदे से नियोजन नीति पर राज्य का पक्ष अदालत में नहीं रख सकी. इसी वजह से यह फैसला सामने आया है. पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि वास्तव में इस फैसले के लिए वर्तमान सरकार दोषी है. राज्य के आदिवासी, मूलवासी के हितों की रक्षा करने में वह निकम्मी साबित हुई है. कोर्ट के फैसले से किसी की नौकरी ना जाये, सरकार इस पर पहल करे.

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2016 में बनी नीति पर कोर्ट की थी सहमति

प्रतुल शाहदेव के अनुसार 2016 में रघुवर सरकार के समय नियोजन नीति बनी थी. 2017-19 के बीच इस आधार पर कई नियुक्तियां भी राज्य में की गयीं. हाइकोर्ट ने उस दौरान इस नीति को सही बताया था. परंतु वर्तमान सरकार नियोजन नीति पर सही से इसका बचाव नहीं कर पायी. इस कारण हजारों आदिवासी मूलवासी युवाओं के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है. 1985 के कटऑफ डेट को बचाने में विफल रही है तो 1932 के कटऑफ  डेट की रक्षा भी वह नहीं कर पायेगी. सो राज्य में वर्तमान सरकार महानिकम्मी और पलटू सरकार है.

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पंचायत सचिव रिजल्ट मामले पर सरकार फेल

हाइकोर्ट के फैसले (पैरा 47) में लिखा गया है कि पंचायत सचिव सहायक अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर किसी प्रकार की रोक नहीं है. पर इसके बावजूद पंचायत सचिव नियुक्ति मामला अटका हुआ है. प्रदेश भाजपा ने इस मामले पर सरकार को जवाबदेही लेने को कहा है. साथ ही नियोजन नीति से प्रभावित हो रहे लोगों को बेरोजगार होने से बचाने की भी अपील की है.

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