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माओवादी संगठन में होता है महिलाओं का शारीरिक-मानसिक शोषण, स्थिति अराजक

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Ranchi: माओवादी संगठन में महिला नक्सलियों के साथ जानवरों सा सलूक होता है. उनके साथ दुराचार और हिंसा की वारदातें आम हो चुकी हैं. ये बात खुलासा झारखंड में हाल के दिनों में पुलिस के समक्ष सरेंडर करने वाले नक्सलियों के द्वारा कही गई बात से होता है.

सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि माओवादी संगठन में महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और शोषण किया जाता है.

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इसके साथ ही संगठन की महिलाओं के साथ सामाजिक बराबरी नहीं की जाती है. झारखंड में इस वर्ष 11 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया जिनमें 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं.

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पांच वर्षों में 95 नक्सलियों ने किया सरेंडर

झारखंड में पिछले पांच वर्षों के में 95 नक्सलियों ने सरेंडर किया. 2014 में दो, 2015 में नौ, 2016 में 27, 2017 में 40 , 2018 में सात और 2019 में अभी तक 11 नक्सली ने सरेंडर किया है.

वहीं, एक करोड़ के इनामी नक्सली सुधाकरण और उसकी पत्नी 25 लाख की इनामी नक्सली नीलिमा ने झारखंड से जाकर तेलंगाना में सरेंडर कर दिया.

पिछले पांच साल के दौरान 958 से ज्यादा नक्सली गिरफ्तार हो चुके हैं. झारखंड के विभिन्न जिलों में पहाड़ी चीता, जेपीसी, जेजेएमपी, एसजेएमएम, एसपीएम की सक्रियता अब न के बराबर रह गयी है.

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जिन नक्सली-उग्रवादी संगठनों की सक्रियता नजर आती हैं, उनमें माओवादी, टीपीसी और पीएलएफआइ शामिल हैं. पुलिस के दावे के मुताबिक, माओवादी अब 25 फीसदी बचे हैं.

पीएलएफआइ 60 फीसदी खत्म हो चुके हैं, सिर्फ 40 फीसदी खत्म करना बाकी है. टीपीसी की कमर लगभग तोड़ी जा चुकी है. हाल में कई नक्सली, पीएलएफआइ उग्रवादी और टीपीसी उग्रवादियों की गिरफ्तारी होने से ये सभी संगठन कमजोर पड़ गये हैं.

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माओवादी पूरी तरह विचारधारा विहीन हो गये हैं

गुमला पुलिस लाइन में 18 सितंबर को वरीय पुलिस अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करनेवाले भूषण यादव ने सरेंडर के दौरान कहा कि इन दिनों माओवादी विचारधारा विहीन होकर केवल लूट में लगे हुए हैं.

संगठन में महिलाओं और बच्चों का शोषण किया जा रहा है. आम जनता को परेशान किया जाता है. साथ ही सुरक्षाबलों के अभियान से माओवादियों में डर बना हुआ है.

पिछले कुछ वर्षों से लगातार अभियान और गिरफ्तारी के कारण माओवाद गुमला, लातेहार व लोहरदगा में लगभग खत्म हो चुके हैं. उसने बताया कि कई और माओवादी हैं जो मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं.

झारखंड में माओवादी संगठन की स्थिति अराजक

भाकपा माओवादी संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ का इनामी सुधाकरण उर्फ सुधाकर और 25 लाख की इनामी उसकी पत्नी नीलिमा ने इस वर्ष 14 फरवरी को विधिवत तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था.

इस दौरान नीलिमा ने सनसनीखेज खुलासे किये. उसने कहा कि छत्तीसगढ़ में पति के साथ पहले संगठन में काम करती थी. वहां का अनुभव अच्छा रहा. जब झारखंड में आये, तो देखा कि माओवादी संगठन की स्थिति अराजक है.

यहां संगठन की नीति के विरुद्ध काम चल रहा था. इससे संगठन को नुकसान हो रहा था. संगठन में शामिल कुछ लोग महिलाओं का शोषण करते हैं. वहीं सुधाकरण ने कहा कि बाहर से बहुत लोग संगठन को समर्थन करते हैं.

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दस्ते में महिला नक्सलियों के साथ होता है अत्याचार 

दुमका पुलिस के समक्ष इस साल 17 जून को हथियार डालते वक्त हार्डकोर महिला नक्सली पीसी दी उर्फ प्रीशिला देवी काफी खुश थी. उसने नक्सलियों के साथ गुजारे कड़वे अनुभवों को साझा किया और दस्ता में महिला नक्सलियों के साथ किये अत्याचार के बारे में बताया.

यह अत्याचार रोंगटे खड़ कर देने वाले थे. भाकपा माओवादी संगठन में पीसी दी का स्थान सब जोनल कमांडर का था. सरेंडर करने वाले अन्य पांच नक्सलियों ने दस्ते में शोषण होने की बात स्वीकार की.

पीसी दी ने कहा कि दस्ता में महिला नक्सलियों के साथ अत्याचार होता है. उनका मानसिक व शारीरिक शोषण किया जाता है. एके 47 हथियार लेकर सरेंडर करने आयी पीसी दी ने कहा था कि नक्सली दस्ता में शामिल महिलाओं का जीवन सबसे कठिन है. उन्हें अधिकार नहीं दिया जाता है और हर प्रकार से शोषण होता है.

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