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पीजीटी शिक्षक नियुक्ति : सरकार ने बिना जांच के अभ्यर्थियों को दिया नियुक्ति पत्र

Ranchi : पीजीटी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान परीक्षाफल की घोषणा होते ही रघुवर सरकार ने झारखंड स्थापना दिवस समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए 1385 अभ्यर्थियों को 15 नवंबर को नियुक्ति पत्र बांटा. उस दिन तो इन अभ्यर्थियों के चेहरे पर मुस्कान देखते बनी, लेकिन यह मुस्कान फिलहाल 300 अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का कारण बन गयी है. स्कूली साक्षरता विभाग ने इन अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्र की जांच के संबंध में नोटिस दिया है कि समय रहते अभ्यर्थी मूल प्रमाणपत्रों का सत्यापन संबंधित बोर्ड या संस्थान से कराकर विभागों को जमा करें. मूल प्रमाणपत्रों के सत्यापन से संबंधित फॉर्मेट भी अभ्यर्थियों को विभाग की ओर से दिया गया है.

300 अभ्यर्थियों में से 200 अभ्यर्थी स्थानीय निवासी हैं

पीजीटी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में ज्यादातर अभ्यर्थी राज्य के बाहर से हैं, जिन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया. लेकिन, जिन अभ्यर्थियों को विभाग की ओर से मूल प्रमाणपत्रों के सत्यापन के संदर्भ विभाग की ओर से आदेश दिया गया है, उनमें सबसे ज्यादा अभ्यर्थी झारखंड के स्थानीय निवासी हैं. 300 अभ्यर्थियों में से लगभग 200 अभ्यर्थी झारखंड के स्थानीय निवासी हैं.

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बीएड की डिग्री के सत्यापन के लिए अभ्यर्थी लगा रहे हैं दिल्ली-भुवनेश्वर का चक्कर

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सफल अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा परेशानी उनकी बीएड की डिग्री को लेकर हो रही है. विभाग के अधिकारी चिह्नित अभ्यर्थियों से उनकी बीएड की डिग्री की मान्यता से संबंधित सत्यपान उनके कॉलेज से लिखित रूप में मांग रहे हैं. पीजीटी सफल अभ्यर्थी मनोज का कहना है कि विभाग की ओर से कहा गया है कि अपनी बीएड की डिग्री से संबंधित मान्यता कॉलेज से लेकर आयें, जिसमें एनसीटीई से मान्यता का ब्योरा दिया हो. मनोज ने कॉलेज के लेटरहेड पर मान्यता से संबंधित प्रमाण विभाग को दिया, तो विभाग के अधिकारियों ने मनोज से कहा कि आप एनसीटीई, भुवनेश्वर एवं एनसीटीई, दिल्ली से मान्यता से संबंधित कागजात प्रस्तुत करें. फिलहाल मनोज जैसे 300 अभ्यर्थी एनसीटीई दिल्ली एवं एनसीटीई भुवनेश्वर का चक्कर लगा रहे हैं.

क्या है नियम

सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान सफल अभ्यर्थी अपने मूल प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि स्वअभिप्रमाणित करके विभाग के समक्ष जमा करते हैं. विभाग की ओर से इन प्रमाणपत्रों का सत्यापन अपने स्तर से किया जाता है. लेकिन, पीजीटी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ऐसा नहीं किया जा रहा है. बड़ा सवाल यह है कि विभाग ने अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों की जांच नियुक्ति पत्र बांटने से पहले क्यों नहीं की.

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